> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2025-08-24

Pawan Jury BhilwaraRj

केंचुआ Vs ईवीएम इंजीनियर्स (24-8-25)
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इस जवाब में मैंने बताया है कि, किस तरह पेड मीडिया के प्रायोजकों ने केंचुआ (केंद्रीय चुनाव आयोग) का इस्तेमाल करके 24 वर्ष (1991-2014) तक दोषपूर्ण Evm से चुनाव कराए, एवं कैसे केंचुआ 2018 से 2025 तक यानी आज भी कैसे फिर उसी तरीके का इस्तेमाल करने नागरिको को बुत्ता दे रहा है।
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भारत में दोषपूर्ण Evm को जारी रखने के लिए पेड मीडिया के प्रायोजको ने एक गलत तर्क / प्रश्न की रचना की है - "जब चुनाव आयोग बुलाता है (Evm चेलेंज, हेकेथॉन आदि) तब Evm विरोधी क्यों नहीं जाते"। मूलत: यह लेख उपरोक्त प्रश्न का जवाब देता है।
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चेप्टर : 1
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(1) 1991 में भारत में जब Evm आया तब कई इंजीनियर्स और इंजीनियरिंग की पृष्ठभूमि वाले कार्यकर्ताओं ने कहा था कि-
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“जिस भी व्यक्ति के पास Evm का फ़िज़िकल एक्सेस(*) हो वह वोट चुरा सकता है।”
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(*) फ़िज़िकल एक्सेस मतलब, Evm को खोलने, उसमें प्रोग्राम डालने आदि की छूट। जो कि केंचुआ के आला अधिकारियों के पास होती है।
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(2) केंचुआ ने कहा- “फ़िज़िकल एक्सेस तो हम नहीं देंगे। तुम इसे हैक* करके दिखाओ”
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(*) हैकिंग मतलब, मशीन को बिना छुए, वोट बदल के दिखाना। उदाहरण के लिए, यदि मैं टेबल पर एक मोबाइल / कंप्यूटर रखूँ और टेबल के सामने आपको बिठाकर कहूँ कि, मोबाइल/ कंप्यूटर को हाथ लगाए बिना इसे हैक करके दिखाओ।
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(2.1) इंजीनियर्स ने कहा - “हम इसे हैक करने का क्लेम नहीं कर रहे है। हम इनसाइडर टेंपरिंग (केंचुआ के आला अधिकारियों द्वारा हेराफेरी) की बात करे है। आप हमें एक मशीन दे दो, हम इसमें वोट चुरा के दिखा देंगे”
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(2.2) केंचुआ ने जवाब किया- “मशीन तो हम नहीं देंगे। पर हम भारत के प्रत्येक इंजीनियर को चुनौती देते है कि वे Evm को (बिना छुए) हैक करके दिखाए”
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(3) अगले 20 साल तक इंजीनियर्स मशीन माँगते रहे, और केंचुआ मशीन देने से इंकार करता रहा, और साथ ही यह भी कहता रहा कि, Evm को हैक करके दिखाओ, हैक करके दिखाओ !!
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(4) यहाँ ध्यान देने वाली पहली बात यह है कि :
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(4.1) आपने पिछले 35 साल में इंजीनियर्स द्वारा उठाये गए “इनसाइड टेम्परिंग” के ख़तरे के बारे में कभी नहीं सुना होगा। क्योंकि इंजीनियर्स का वर्जन पेड मीडिया ने कभी भी प्रकाशित नहीं किया। उन्होंने “इनसाइड टेम्परिंग” लफ़्ज़ को ग़ायब करके रखा। क्योंकि यह लफ़्ज़ वोट चोरी के मामले में ख़ुद केंचुए को ही शक के दायरे में ले आता है !!
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(4.2) दूसरी ध्यान देने वाली चौकाऊँ बात यह है कि, इस दौरान बारी बारी से कांग्रेस एवँ बीजेपी दोनों पार्टियां सत्ता में भी रही, और विपक्ष में भी रही, किन्तु किसी भी पार्टी ने Evm का फ़िज़िकल एक्सेस देने की माँग का समर्थन नहीं किया, और न ही इन्होंने कभी केंचुए से Evm मांगी !! और न ही इन पार्टियों ने कभी भी “इनसाइड टेम्परिंग” को आधार बनाया !!
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(5) इसी दौरान 2009 की बात है जब मेहता जी ने इन्डियन एक्सप्रेस के मुख्य पृष्ठ पर इस आशय का विज्ञापन देने की कोशिस की कि- "कैसे केंचुआ के दफ्तर में बैठे बैठे 10-12 लोग Evm के लाखों वोट बदल सकते है, और इस चोरी को पकड़ा भी नहीं जा सकेगा।"
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किन्तु इंडियन एक्सप्रेस ने पहले पेज पर यह विज्ञापन लगाने से इंकार कर दिया। तब उन्होंने यह विज्ञापन तीसरे पृष्ठ पर दिया। यह विज्ञापन 31 जुलाई 2009 को दिया गया था। विज्ञापन दिल्ली, मुंबई समेत कई महानगरो के एडिशन में प्रकाशित हुआ। इस विज्ञापन में राहुल भाई ने सिर्फ सैद्धांतिक दावा नहीं किया था, बल्कि उन्होंने विज्ञापन में वोट चोरी के तरीके की तकनिकी प्रक्रिया को चरणबद्ध रूप से लिखा भी था।
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(5.1) अगस्त 2010 में हैदराबाद के एक इंजीनियर हरिप्रसाद जी ने पूना के कलेक्टर से एक Evm प्राप्त की (केंचुए का वर्ज़न है कि “चुराई”) और अपने कुछ सहयोगियों (राहुल भाई मेहता भी इसमें शामिल थे) की सहायता से केंचुए की ही मशीन में वोट चोरी करके दिखा दिया।
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हरिप्रसाद जी ने पूना के कलेक्टर के सामने वोट चोरी करके दिखाया, और इसकी प्रक्रिया का डेमो बनाकर यू-ट्यूब पर भी डाल दिया।
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(5.2) वीडियो के आधार पर पिटीशन डाली गई और 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने यह माना कि, मौजूदा डिजाइन के Evm में वोट चोरी हो सकता है, और सुप्रीम कोर्ट ने केंचुए को आदेश किए कि, या तो वो Evm को फुल प्रूफ बनाएँ या वापिस बैलेट पेपर ले आए।
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तो इस तरह टेम्परिंग साबित होने और सुप्रीम कोर्ट के निर्णय आने पर केंचुआ ने Evm में VVPAT जोड़ी और भारत में पुरानी Evm का अंत हुआ।
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(6) इस घटनाक्रम से निम्नलिखित निष्कर्ष सामने आते है:
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(6.1) 20 साल तक केंचुआ जानबूझकर दोषपूर्ण मशीन से चुनाव कराता रहा। और केंचुआ ऐसा सिर्फ इसलिए कर पाया, क्योंकि उसने मशीन को इंजीनियर्स के हाथ में नहीं जाने दिया, और वह पेड मीडिया की सहायता से अपनी इस धांधली को छुपाने में भी सफल रहा। इससे पता चलता है, कि केंचुआ कितना ईमानदार जंतु है !!
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(6.2) यह घटना बताती है, कि बीजेपी, कांग्रेस आदि पार्टियां और इनके नेता कितने बिकाऊ/ निकम्मे है। और यदि आप इनसे कोई उम्मीद लगा के बैठे हो, तो हमें आपसे वाक़ई हमदर्दी है।
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(6.3) इससे यह भी मालूम चलता है कि, सभी भारी भरकम पत्रकार, मीडियाकर्मी, PIL माफिया, Evm विरोध के लिए जाने जाने वाले बड़े नेता और सुप्रीम कोर्ट आदि कितने बिकाऊ/ निकम्मे है।
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(6.4) यह बात भी साफ़ है कि, इन सब लोगो ने जो भी किया वो टाइम पास किया। जोखिम उठाकर काम अंत में कुछ छोटे-छोटे कार्यकर्ताओं ने ही किया जिससे अंतत: बदलाव आया।
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(7) यदि अब भी आपको इन भारी भरकम नेताओं, सेलिब्रिटी पत्रकारो, संपादकों, नामचीन वकीलों, PIL माफियाओ, जजों आदि से कोई आशा शेष है तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि -
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(7.1) जब 2011 में पूरे देश के सामने यह साबित हो गया था कि मौजूदा Evm में वोट चोरी संभव है, और सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी आ चुका था, तब भी केंचुए ने 2014 के आम चुनाव की 543 संसदीय सीटों में से सिर्फ 8 सीट पर ही VVPAT वाली Evm का इस्तेमाल किया था, और शेष 535 सीटो पर पुरानी Evm से ही चुनाव कराए थे, जबकि केंचुआ इन 535 सीट पर बैलेट पेपर से चुनाव करवा सकता था !!
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(7.2) और उस समय भी ये सभी भारी भरकम नेता, पत्रकार, सुप्रीम कोर्ट जज, PIL माफिया, कथित ईवीएम विरोधी नेता आदि खामोश थे !! असल में ये खामोश नहीं थे, ये लोग उस समय हरि प्रसाद जी द्वारा यू ट्यूब पर डाले गए उस वीडियो को दबाने के लिए काम कर रहे थे।
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(7.3) क्योंकि यदि वह वीडियो जन जन तक पहुंच जाता तो ये भारी भरकम लोग अपने भक्तों, पाठको, दर्शकों एवँ अपने अनुयायियों के सामने एक्सपोज़ हो जाते कि, आख़िर ये लोग धांधली वाली ईवीएम से चुनाव होने पर कुछ भी बोल क्यों नहीं रहे है !!
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(7.4) यदि आपको आज भी यह परीक्षा करनी हो कि ये भारी भरकम लोग कितने बड़े फ्रॉड है तो इनसे यह प्रश्न पूछे कि - क्या वे हरिप्रसाद जी के यू ट्यूब पर रखे उस वीडियो को अपने ट्विटर/ फेसबुक अकाउंट पर शेयर कर सकते है ?
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(7.5) बदले में आप देखेंगे कि या तो वो आपके प्रश्न को इग्नोर कर देंगे या आपको जवाब के रूप में जलेबी दे देंगे, जिसका आपको कोई सिरा नहीं मिलेगा। क्योंकि यदि वे यह वीडियो प्रचारित करते है तो उन्हें अपने फॉलोवर्स को यह जवाब देना पड़ेगा कि, आज भी पंचायत एवँ पार्षद के चुनावों में इसी वीवीपैट विहीन मशीन का इस्तेमाल होने के बावजूद वे चुप क्यों है!!
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चैप्टर - 2
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(1) जब VVPAT लाया गया था तो इसका काँच पारदर्शी सफेद था। लेकिन जून 2018 में केंचुए ने सभी मशीनों से पारदर्शी काँच हटा दिया और काला अपारदर्शी काँच लगा दिया।
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(2) दिल्ली आईआईटी से कंप्यूटर स्नातक राहुल भाई मेहता (जो कि 2010 के Evm ऑपरेशन में हरिप्रसाद जी के सहयोगी भी थे, और जिन्होंने सबसे पहले Evm में वोट चुराने के तरीके का सार्वजानिक विज्ञापन दिया था।) ने काले काँच के इस बदलाव को नोटिस किया, और यह खोज निकाला कि काले काँच वाली मशीन में कैसे काग़ज़ के वोट भी चुराए जा सकते है।
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(2.1) उन्होंने केंचुए के सामने यह क्लेम किया कि -“यदि मुझे एक मशीन दी जाए तो मैं काले काँच वाली Evm से “काग़ज़ के वोट” चुरा के दिखा सकता हूँ।”
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(2.2) केंचुए ने कहा- “मशीन नहीं मिलेगी, इसे बिना छुए हैक करके दिखाओ!!”
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(3) राहुल भाई मेहता ने केंचुए को मशीन की कीमत (40,000 rs) देने की पेशकश करते हुए कहा कि - “जब तक मुझे मशीन की एक्सेस नहीं दोगे तब तक कैसे चोरी करके दिखाऊँगा”।
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केंचुए ने कहा - “मशीन नहीं मिलेगी, इसे बिना छुए हैक करके दिखाओ!!”
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(4) इसके बाद राहुल भाई मेहता ने 7 अप्रेल 2019 को गुजरात के लीडिंग गुजराती दैनिक “गुजरात समाचार” के मुख्य पृष्ठ पर एक विज्ञापन दिया कि - "किस तरह काले काँच वाली मशीन में काग़ज़ के वोट भी लाखों की संख्या में चुराए जा सकते है। और इस चोरी के लिए सिर्फ अंदर के 5-7 लोगो की जरूरत होगी।"
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(4.1) एवज़ में केंचुए ने 9 अप्रेल 2019 को राहुल भाई को लीगल नोटिस भेजकर वार्निंग दी कि - “अखबार में दुबारा विज्ञापन लगाकर हमसे माफ़ी माँगो वरना हम अफ़वाह फैलाने, संवैधानिक संस्था की छवि धूमिल करने और लोगो को बरगलाने के आरोप में आपराधिक मुकदमा दर्ज करके कार्यवाही करेंगे।”
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(4.2) राहुल भाई ने कहा कि- “मेरा दावा सच्चा है, मुझे एक मशीन दे दो, मैं इसे कर के दिखा सकता हूँ।”
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केंचुए ने कहा- “मशीन नहीं मिलेगी। दूर से हैक करके दिखाओ।”
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(5) इसके बाद, राहुल भाई मेहता ने ख़ुद से VVPAT वाली Evm जैसा एक प्रोटोटाइप Evm बनाया और जंतर मंतर पर लाइव डेमो करके दिखाया कि, कैसे काले काँच वाले Evm से इलेक्ट्रॉनिक के साथ साथ कागज के वोट भी चोरी किए जा सकते है। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी प्रदर्शित किया कि कैसे यह धांधली मॉक पोल में भी पकड़ी नहीं जा सकेगी।
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बदले में केंचुए ने फिर से यही कहा - “हमारी Evm हैक नहीं होती है। हमारी मशीन को हैक करके दिखाओ !!!”
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(6) इसके बाद 6 फ़रवरी 2024 को ईवीएम हटाओ सेना ने जंतर मंतर पर अपनी मशीन से डेमो देकर दिखाया कि कैसे काले काँच की सहायता से काग़ज़ के वोट चुराए जा सकते है।
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(6.1) जंतर मंतर पर दिए डेमो का यह वीडियो वायरल हो गया और इसे लगभग 3 करोड़ लोगो ने देखा।
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(6.2) बदले में केंचुए ने डेमो देने वाले कार्यकर्ता का फोटो अपने ट्विटर हैंडल पर पोस्ट करके लिख दिया कि- “डेमो देने वाला यह आदमी फर्जी है, और यह मशीन हमारी नहीं है।”
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(6.3) जवाब में ईवीएम हटाओ सेना ने केंचुए से कहा कि, तुम्हारी मशीन दो हम उसमें भी चोरी करके दिखा देंगे। बदले में केंचुए ने कहा- मशीन नहीं देंगे। दूर से हैक करके दिखाओ !!
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(7) तब से अब तक ईवीएम हटाओ सेना के कार्यकर्ता लगातार भारत भर में अपनी बनाई मशीनों से डेमो दे रहे है, क्योंकि केंचुआ अपनी मशीन नहीं दे रहा।
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(8) सार यह है कि, 1991 से 2010 तक बिना वीवीपेट वाली ईवीएम ईमानदार बनी रही, क्योंकि केंचुए ने मशीन नहीं दी। और अब 2018 से 2025 तक काले काँच वाली Evm ईमानदार बनी हुई है, क्योंकि केंचुआ Evm नहीं दे रहा।
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हरी प्रसाद जी, राहुल जी मेहता और Evm हटाओ सेना द्वारा दिए गए ये सभी डेमो यू ट्यूब पर रखें है। आप इन्हें वहाँ देख सकते है। इस पोस्ट में दिए गए सभी तथ्यों की जाँच आप गूगल पर कर सकते है। यदि आप किसी तथ्य की पुष्टि नहीं कर पा रहे है तो कमेंट बॉक्स में पूछ सकते है।
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