> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2025-08-12

Pawan Jury BhilwaraRj

पेड मीडिया के प्रायोजकों को भारत की सड़को पर आवारा कुत्ते चाहिए। क्योंकि “आवारा” कुत्तो की बढ़ती संख्या वाहन, तेल और दवा कंपनियों को पैसा बनाकर देती है। असल में भारत में जितने भी “आवारा” कुत्ते है, वे वाजपेयी द्वारा 2001 में छापे गए और मनमोहन और मोदी द्वारा जारी रखे गए क़ानून द्वारा पाले पोसे गए है।
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पेड मीडिया द्वारा ही भारत में मेनका गांधी के नेतृत्व में “आवारा कुत्ते प्रेमियों” (कुत्ता प्रेमी नहीं, आवारा कुत्ता प्रेमी) का गिरोह खड़ा किया गया है। यह गिरोह पेड मीडिया का फर्स्ट लाइन ऑफ़ डिफेंस सिस्टम है।
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जब तक 2001 में बनाए गए “कुत्ता पकड़ रोक” क़ानून को केंसल नहीं किया जाता तब तक भारत की सड़को पर नागरिकों को भंभोड रहे इन करोड़ो कुत्तो (हाँ, इन आवारा कुत्तो की संख्या अभी करोड़ों में है, और लगातार बढ़ती जायेगी) को हटाया नहीं जा सकता।
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इस क़ानून को सिर्फ़ Pm रद्द कर सकता है, और Pm को सेफ एग्जिट देने के लिए सुप्रीम कोर्ट और मेनका गांधी मिलकर ड्रामा क्रिएट कर रहे है। ताकि प्रधानमंत्री को इस बारे में जिम्मेदारी न लेनी पड़े ।
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जिन कार्यकर्ताओं को “आवारा कुत्ते” सड़को से हटाने में रुचि है उन्हें Pm को पत्र / ट्विट द्वारा 2001 की “कुत्तो को पकड़ने और उन्हें स्थानांतरित करने पर रोक लगाने वाली धारा” को रद्द करने या कुत्ता पकड़ अधिकारी को वोट वापसी पासबुक के दायरे में लाने के लिए खुला आदेश पत्र भेजना चाहिए।
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क्योंकि सुप्रीम कोर्ट की इतनी हैसियत नहीं कि वह पेड मीडिया के प्रायोजकों के ख़िलाफ़ जाये । सुप्रीम कोर्ट आवारा कुत्तो को हटाने का सिर्फ़ ड्रामा कर सकता है , इन्हें हटा नहीं सकता ।
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और कृपया “आवारा कुत्तो के प्रेमियों” को कुत्ता प्रेमी नामक ग़लत शब्द से सम्बोधित न करे।
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