> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2025-07-20

Pawan Jury BhilwaraRj

EVM हटाओ सबसे ज़रूरी क्यों है?
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नकली विपक्ष और बिकाऊ मीडिया की जितनी भी ताक़त है वह सारी खनिजों , ज़मीनों से आती हैं— उनका सबसे बड़ा ख़र्च जून 2000 से पहले तक था वोटर मैनेजमेंट में।
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मीडिया में काम करने वाले लोग मुश्किल से 3 लाख हैं। विश्वविद्यालयों में "राजनीतिक अंधविश्वास", "सामाजिक अंधविश्वास" या " बिन काम का इतिहास" पढ़ाने वाले प्रोफेसर लगभग 2 लाख हैं। IAS जैसे उच्च अफसर 1 लाख और जज मुश्किल से 30 हज़ार हैं। इतनी कम संख्या को खरीदना या कंट्रोल करना बहुत आसान है — और यही किया गया।
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लेकिन वोटर तो 95 करोड़ हैं! इन्हें न तो पूरी तरह खरीदा जा सकता है, न ही ज़बरदस्ती की जा सकती है। जब खरीदने की कोशिश असफल रही, तो देवी इंदिरा अम्मा को 1975 में ज़बरदस्ती का विकल्प अपनाना पड़ा। लेकिन वो भी अंततः ढह गया — और उन्हें चुनाव करवाने पड़े और हार माननी पड़ी।
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इससे elitemen ने जान लिया कि वोटर्स को हराना नामुमकिन है।
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और फिर देवी इंदिरा अम्मा ने जब 1980 में दोबारा PM बनीं, तो पहले ही दिन उन्होंने APJ कलाम जैसे शीर्ष वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की मीटिंग बुलाई — EVM बनाने के लिए, जिससे वोट को चुपचाप बदला जा सके!
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लेकिन वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों को पूरी तरह चुप करवाने में 20 साल लग गए।इसीलिए पूरी तरह EVM आधारित चुनाव जून 2000 में ही लागू हो सके।
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और जून 2000 से अब तक, BJP, RSS, कांग्रेस, AAP, CPM, CPI — सभी राजनीतिक पार्टियाँ EVM को समर्थन देती रही हैं।
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क्यों?
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क्योंकि elitemen जानते हैं कि वे 95 करोड़ लोगों के मन को ना डरा सकते हैं, ना खरीद सकते हैं — चाहे जितना पैसा बिकाऊ मीडिया या बिकाऊ प्रोफेसरों को दें।
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इसलिए जब EVM हटेगा, तब इन elitemen को मीडिया पर बहुत ज़्यादा पैसा खर्च करना पड़ेगा।
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और फिर उनकी नकली विपक्ष खड़ा करने की ताक़त कमज़ोर हो जाएगी।
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और जब नकली विपक्ष कमजोर होगा, तभी असली जानकारी सच्चे कार्यकर्ताओं तक पहुँचेगी।
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और फिर सच्चा विपक्ष बनना शुरू होगा।
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इसलिए, EVM ही elitemen के खनिजों और ज़मीनों पर कब्ज़े की सबसे कमज़ोर कड़ी है।
और इसलिए — मेरे मत में — हमें सबसे ज़्यादा ध्यान EVM हटाओ आंदोलन पर ही देना चाहिए।
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Original Post by Shri Rahul Chimanbhai Mehta