> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2025-04-01

Pawan Jury BhilwaraRj

झगड़े एवं गतिरोध देश की उत्पादकता में कमी लाते है। अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनियां जिस भी देश में जाती है, कानूनों की सहायता से इस तरह की व्यवस्था की रचना करती है कि, व्यक्तियों में आपसी झगड़े, कलह एवं गतिरोध में वृद्धि हो। इसके लिए वे Divide and Rule का इस्तेमाल करते है। इसके 2 रूप है :
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(1) सामुदायिक समूहों के बीच झगड़े
(2) सार्वजनिक मसलो पर व्यक्तिगत झगड़े एवं कलह
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(1) सामुदायिक समूहों के बीच झगड़े : इस नीति में समाज के विभिन्न समूहों में मौजूद विषमता को आधार बनाकर उन्हें पृथक पहचान (Identity) के आधार पर अलग-थलग किया जाता है, और फिर इस विषमता की दरार को चौड़ा किया जाता है।
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उदाहरण के लिए, धर्म के आधार पर (हिन्दू-मुस्लिम संघर्ष), जाति के आधार पर (अगड़ा-पिछड़ा संघर्ष), मूल निवास के आधार पर (आदि किसान-ब्राह्मण,बनिए संघर्ष), क्षेत्र के आधार पर (मराठी-बिहारी संघर्ष), भाषा के आधार पर (उत्तर-दक्षिण संघर्ष), लिंग के आधार पर (महिलावाद-पुरुष संघर्ष) खान-पान (शाकाहार-मांसाहार संघर्ष) के आधार पर आदि आदि।
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प्रत्येक समाज में जाति, धर्म, क्षेत्र, लिंग, नस्ल, भाषा आदि के आधार पर पायी जाने वाली विषमता के आधार पर विभिन्न समुदाय होते है, और ये विविध समुदाय मिलकर ही समाज की रचना करते है। दुनिया में ऐसा कोई समाज नहीं बनाया जा सकता, जिसमें समुदाय न हो। समाज की इकाई समुदाय ही है।
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और 2 समुदाय तभी 2 समुदाय के रूप में अस्तित्व में आते है, जब अमुक 2 समुदायों के मध्य किसी न किसी बिंदु को लेकर विषमता हो। यदि विषमता नहीं है तो समुदाय नहीं बनेगा। और किसी भी समाज में ऐसे दसियों और भारत जैसे समाज में ऐसे सैंकड़ो या छोटे बड़े हजारो तक समुदाय हो सकते है।
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उनकी बुनियादी नीति यह है की, समुदायों के मध्य मौजूद विषमता को चिन्हित करो और इस विषमता की लकीर को चौड़ा एवं गहरा करके इसे खाई में बदल दो। ये खाई खोदने के लिए वे पेड मीडिया एवं कानूनों का इस्तेमाल करते है। 1991 के बाद से भारत में ज्यादातर पार्टियाँ आइडेंटिटी पॉलिटिक्स कर रही है। क्योंकि इसके लिए उन्हें मीडिया कवरेज मिल जाता है।
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यू ट्यूब और फेसबुक आने के बाद इसकी रफ़्तार 10 गुना हो गयी है। और अब लगभग हर समुदाय किसी न किसी समुदाय को देश से खदेड़ने के लिए लट्ठ लिए घूम रहा है। समय गुजरने के साथ समुदायों का यह संघर्ष और भी गहरा और हिंसक होगा।
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यह अमेरिकी कम्पनियों का भारतीय राजनीती में बढ़ते नियंत्रण का परिणाम है। जैसे जैसे FDI बढ़ेगी, यह उसी अनुपात में बढेगा। आने वाले समय में पेड मीडिया के प्रायोजक समुदायों के इस संघर्ष को अलगाववादी आंदोलनों में बदल देंगे।
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(2) सार्वजनिक मसलो पर व्यक्तिगत झगड़े एवं कलह: यह समुदायों या समूहों के संघर्ष से अलग चीज है। यह सार्वजनिक स्थलों एवं सार्वजानिक मसलो से सम्बंधित व्यक्तिगत स्तर पर कलेश है। उन्होंने इस तरह की रचना की है कि, प्रत्येक व्यक्ति को किसी भी व्यक्ति के जीवन में परेशानी बढ़ाने की छूट है। और जब कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति को परेशान करता है, तो शासन उसे रोकने नहीं आएगा।
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होंकिंग, कान फाड़ू आवाज करने वाले साइलेंसर, सार्वजनिक स्थलों पर बहरा कर देने वाले ध्वनी विस्तारक यंत्र, अनियमित पार्किंग, भूमि अतिक्रमण, झूठे मुकदमें और इस तरह की छोटी छोटी चीजो और हरकतों की काफी लम्बी फेहरिस्त बनाई जा सकती है।
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सार्वजनिक व्यवहार एवं दुर्व्यवहार के बीच कोई सीमा रेखा नहीं है। और न ही इसकी कोई परिभाषा है। सार्वजनिक स्थलों पर 5 लोग शेष 500 लोगों को डिस्टर्ब करके चले जाते है, और उन्हें व्यवस्था कभी रोकने नहीं आती।
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बहुत ही छोटी छोटी और रोजमर्रा की रूटीन चीजो पर सार्वजनिक स्थलों पर इस तरह की कलह चलते रहती है, और लोगो को इरीटेड करते रहती है।
सार्वजनिक स्थलों पर वही लोग डोमिनेट करते है, जिनकी आवाज ऊँची है, और जो दबंग है। आदमी यदि सुबह घर से निकलेगा तो शाम को घर पहुँचने से पहले इस तरह के कई बिन्दुओ पर उसका कई बार खून गरम हो चुका होता है।
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समाधान:
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इस सब को रोकने के लिए हमें मीडिया में FDI रोकनी होगी। प्रस्तावित WOIC क़ानून के गेजेट में आने से संवेदन शील क्षेत्रो में FDI पर रोक आएगी। FDI रोकने के साथ हमें पुलिस एवं अदालतें सुधारने की जरूरत है।
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जब तक पुलिस एवं अदालतें ठीक नहीं होती, तब तक इसे आप रोक नहीं सकते। तो हमारी अनुशंषा है, कि कार्यकर्ताओ को सबसे अधिक भार भारत की पुलिस एवं अदालतों को सुधारने पर देना चाहिए।
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पुलिस एवं अदालतें सुधारने के लिए हमने राष्ट्रिय जूरी कोर्ट क़ानून प्रस्तावित किया है। कृपया इस क़ानून को पढ़ें एवं इसे गेजेट में छपवाने के लिए प्रयास करें।
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#JuryCourt
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