> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2025-01-05

Pawan Jury BhilwaraRj

अतुल सुभाष और पुनीत खुराना ने अदालतों की चपेट में आकर आत्महत्या कर ली, और ऐसे हजारों और भी लोग है जो इसी परिस्थिति से गुजर रहे है।
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इसमें किस की गलती है ?
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भारत में ऐसे हजारो कारोबारी, पेशेवर, वैतनिक युवा है जो पर्याप्त रूप से पढ़े-लिखे भी है और संसाधन युक्त भी है। लेकिन इन लोगो को लगता है कि सप्ताह के सातो दिन और साल के 365 दिन उन्हें अपनी ऊर्जा, समय और संसाधनों का निवेश सिर्फ़ और सिर्फ़ अपनी ब्लड लाइन (मेरा घर, मेरा परिवार, सोसाइटी/देश जाए भाड़ में) को उन्नत और सुरक्षित बनाने में ही करना चाहिए।
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ये लोग इस ग़लतफ़हमी के शिकार रहे कि देश के क़ानूनों को सुधारने के लिए उन्हें एक मिनिट का भी लोड लेने की ज़रूरत नहीं है, और स्वयं को ताकतवर बनाना सुरक्षित जीवन के लिए पर्याप्त है!!
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इनके हिसाब से देश की अदालतों/पुलिस/कानूनों को सुधारने की दिशा में काम करना इनकी जिम्मेदारी में नहीं आता !!
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दरअसल, इनमे से ज्यादातर लोग इससे भी आगे जाते है, और उन कार्यकर्ताओ को बेवक़ूफ़, फ़ुरसतिया और खब्ती समझते है, जो देश के कानूनों को सुधारने की दिशा में काम करते है।
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और नतीजा यह होता है कि सरकारें कभी लॉकडाउन, कभी बाध्यकारी टीकाकरण, कभी जीएसटी और कभी पुलिस-अदालतों के माध्यम से इनकी गर्दन मरोड़ती रहती है।
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इस तरह निहायत ही निजी स्वार्थ केंद्रित जीवन जीने का जायज तावान ये लोग चुकाते है।
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