Pawan Jury BhilwaraRj
राजस्थान में चुनावी नतीजे आ चुके है, और मुख्यमंत्री कौन होगा इस बारे में कसरत चल रही है। आलाकमान और जीते हुए विधायक (दोनों मिलकर) जिस व्यक्ति के नाम पर सहमत हो जाएँगे वह मुख्यमंत्री बनेगा।
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विधायकों का सहमत होना या न होना आम तौर पर 35 से 40 करोड़ की राशि प्रति विधायक, मंत्री पद आदि पर निर्भर करता है। यानी अब विधायक मतदाताओ से इकट्ठे किए हुए वोटो को ऊँचे दाम पर बेचेंगे।
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यदि राजस्थान में मुख्यमंत्री वोट वापसी पासबुक के दायरे में होता तो राजस्थान के मतदाता यह स्वीकृति दर्ज करवा सकते थे कि वे किस विधायक को मुख्यमंत्री बनाना चाहते है। इस स्थिति में विधायको, आलाकमान और उनके प्रायोजको को भारी नुकसान होगा।
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विधायक के पास गेजेट छापने की शक्ति नहीं होती। गेजेट छापने की शक्ति मुख्यमंत्री एवं मंत्रियों के पास होती है। और वे चाहते है कि क़ानून छापने की ताकत रखने वाला व्यक्ति उनकी पसंद का हो। वे इसमें नागरिको का कोई दखल नहीं चाहते। अत: कोंग्रेस, बीजेपी, आम आदमी पार्टी के नेता और उनके अंधभगत मुख्यमंत्री को वोट वापसी पासबुक के दायरे में लाने के खिलाफ है !!
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#VoteVapsiPassbook