Pawan Jury BhilwaraRj
NaMo ने बिजली पैदा करने वाली कंपनियां को बिजली के लिए प्रति यूनिट 50 रुपये तक चार्ज करने की अनुमति दी !! (24-फरवरी-2023)
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कोयला संयंत्रों की लागत 2 रुपये प्रति यूनिट से लेकर 3 रुपये प्रति यूनिट अधिक से अधिक है। और सोलर की लागत अब कम है। इसके बावजूद, NaMo ने एक राजपत्र अधिसूचना प्रकाशित की जिसमें बिजली पैदा करने वाली कंपनियां को 50 रुपये प्रति यूनिट के रूप में उच्च शुल्क वसुलने की अनुमति दी गई !!! पहले यह सीमा 12 रुपये थी। अब नरेंद्र मोदी ने सीलिंग बढ़ाकर 50 रुपये कर दी है।
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तो बिजली पैदा करने वाली कंपनियों को केवल यह दिखाने की जरूरत है कि खर्च बढ़ गया है !!!
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और आयातित कोयले का उपयोग करने वाली बिजली कंपनी अब आधिकारिक तौर पर अधिक शुल्क ले सकती है !!! स्थानीय कोयले का उपयोग करने वाली कंपनी अधिक से अधिक 3 रुपये से 5 रुपये ही चार्ज कर सकती है क्योंकि उन्हें 300 रुपये प्रति टन से 2000 रुपये प्रति टन की दर से कोयला मिलता है।
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और अब कोयला का बड़ा निर्यातक कौन है? गौतम अड़ानी !!
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भारत के पास इतना कोयला है जो 200 साल तक चलेगा, और 300 रुपये प्रति टन में खोदा जा सकता है !!! लेकिन इसके बजाय, बिजली कंपनियां, अडानी की कंपनी से 10000 रुपये प्रति टन से 20000 रुपये प्रति टन कोयले का आयात करेगी। और वो आस्ट्रेलिया की कंपनी जिससे अडानी कोयला मंगाएगा उसका मालिक मात्र Rothschild का मुखौटा है। ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया आदि में कोयले की खदानों का असली मालिक Rothschild है।
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इस कोयले को गुणवत्ता के आधार पर अच्छा कोयला मानकर जबरदस्ती मंगाया जाता है और वह भी कई गुना उसी कीमत पर क्योंकि रोशन के पास मौजूद हथियारों की शक्ति के आगे भारतीयों को यह रकम चुकाने के अलावा कोई चारा नहीं।
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राहुल मेहता जी की पोस्ट से
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नीचे के लिंक में आप देख सकते हैं कि स्पष्ट रूप से बताया गया है कि 1 टन कोयले को खोजने मैं सरकारी कंपनी को 1000 रुपए का खर्च आता है और प्राइवेट कंपनी को अधिक से अधिक ₹800 का खर्च आता है।
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कोयले को खुद के सीधे-सीधे इस्तेमाल में लाया जा सकता है तो 10,000 से लेकर 20,000 प्रति टन तक कोयला बाहर से मंगाने की आवश्यकता क्या है ?
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प्रधानमंत्री को वोट वापसी पासबुक के दायरे में लाकर इस गड़बड़ झाले को रोका जा सकता।
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#VoteVapsiPassbook Over Pm
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