Pawan Jury BhilwaraRj
फ़ीचर फ़िल्म Company के एक दृश्य में पुलिस वाले एक मुखबिर को उठाकर टार्चर रूम में ले आते है।
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कमिश्नर क़ैदी से कहता है कि दर्द सहने की एक सीमा होती है। थोड़ी देर तू इसे सह लेगा लेकिन अंत में टूट जाएगा। अभी पूरी रात पड़ी है।
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क़ैदी कहता है — साब आप बिना किसी बात के मुझे ऐसे ही नहीं पीट सकते। हमें भी क़ानून का पता है ।
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कमिश्नर जवाब देता है — वो सब तो ठीक है, लेकिन तुझे ये बात कौन बोला कि पुलिस क़ानून के अंदर काम करती है !! हाँय !!!
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पेड मीडिया इस तरह की धाँधलियाँ “जागरूकता का अभाव” लेबल के तहत करता है। वे इस तरह का ज्ञान प्रकाशित करते रहते है कि नागरिकों में जागरूकता का अभाव है। यदि लोग अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो जाएँगे तो अपने आप दमन ख़त्म हो जाएगा।
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वे इस बात का उल्लेख करना भूल जाते है कि पुलिस वाले जब आपको रोक कर बात कर रहे होते है तो उसके एक हाथ में लट्ठ होता है और साथ में एक जीप खड़ी होती है जिसमें आपको टांगा टोली करके भरा जा सकता है।
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शासक वर्ग द्वारा दमन की वजह ताक़त का असंतुलन है, क़ानून की जानकारी का अभाव नही।
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एस.पी. को वोट वापसी पासबुक एवं उसके स्टाफ़ को जूरी कोर्ट के दायरे में लाकर इस असंतुलन को संतुलित किया जा सकता है ।
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#VoteVapsiPassbook
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#JuryCourt