Pawan Jury BhilwaraRj
रूस पर हमला पहले अमेरिका ने किया, और रूस यूक्रेन पर हमला करके सिर्फ़ अमेरिकी हमले का जवाब दे रहा है।
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यूक्रेन से मास्को की दूरी लगभग 400 km है। यदि यूक्रेन नाटो साइन कर देता तो अमेरिका एक वर्ष के भीतर ही “यूक्रेन की सुरक्षा” का हवाला देकर यूक्रेन में इतना अस्लहा तैनात कर देता कि रूस से फ़ुल स्केल वॉर किया जा सके। और इसके बाद अमेरिका रूस को तोड़ने के लिए यूक्रेन का इस्तेमाल अपने ऊँट की तरह करता।
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अतः अमेरिकी सेनाओं को यूक्रेन में घुसने से रोकने के लिए रूस के पास हमला करने के अलावा अन्य कोई विकल्प नही था।
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अमेरिका का ऊँट नम्बर 2 भारत है ।
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चीन पर हमला करने के लिए अमेरिका निम्नलिखित तैयारी कर चुका है :
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(1) मीडिया में FDI
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ताकि जनता को कंट्रोल करके राजनैतिक नेतृत्व को नियंत्रित किया जा सके।
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(2) डिफ़ेंस में FDI
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ताकि भारत में अमेरिकी कम्पनियाँ युद्ध के लिए हथियारों का उत्पादन कर सके।
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(3) कोमकासा एग्रिमेंट
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ताकि अमेरिकी जनरल भारतीय सेना का अधिकृत रूप से संचालन कर सके, एवं भारतीय ज़मीन पर अपनी सेना उतार सके।
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(4) धारा 370 का निरसन
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ताकि वहाँ पर राष्ट्रपति शासन लगाकर अमेरिकी कश्मीर में निवेश के नाम पर अपने इस्टाब्लिशमेंट खड़ी कर सके। और वहाँ पर अमेरिकीयों एवं सऊदी अरब ने निर्माण शुरू भी कर दिया है।
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अगले चरण में अमेरिकी जिहादियों को अस्लहा और पैसा देकर खुद के ही निर्माण पर आतंकी हमले करवाएगा, या इसी तरह का कोई ड्रामा स्टेज करेगा ।
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इसके बाद अमेरिकी कहेंगे कि हमारे निवेश को आतंकियों से ख़तरा है, और अब हम (अमेरिकी) कश्मीर में आतंकवाद को ख़त्म करने की जंग लड़ेंगे।
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पेड़ मीडिया रिपोर्ट करेगा कि — अब आतंकियों की ख़ैर नही है।
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और फिर अमेरिकी सेनाएँ कश्मीर में आना शुरू करेगी। कश्मीर से CPEC कुछ सौ किलोमीटर की दूरी पर ही है॥
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और इन हालात में चीन को इस बिंदु पर गम्भीरता से विचार करना पड़ेगा कि क्या उसे अमेरिकी सेनाओं के कश्मीर में अड्डा जमाने से पहले ही भारत पर आक्रमण कर देना चाहिए या नही !!!
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यदि चीन भारत पर हमला करता है तो चीन भारत पर सभी तरफ़ से हमला कर सकता है। पाकिस्तानी कश्मीर की तरफ़ से, पूर्वोत्तर से और नेवी के माध्यम से दक्षिण की सभी दिशाओं से॥
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