Pawan Jury BhilwaraRj
रिकालिस्ट्स द्वारा खोजा गया चिट्ठी-रजिस्टर सिस्टम (open letter-register method) 1947 के बाद से अब तक खोजे गए प्रचार के तरीको में सबसे बेहतरीन प्रचार का तरीका है। और यह पहली बार है कि पेड मीडिया एक केम्पेन मेथड – जो कि अभी तक अपनी शैशव अवस्था में है, को हाईजेक करके नष्ट करने के लिए इतनी मेहनत कर रहा है !! वे जानते है कि, यदि यह तरीका चलन में आ गया तो न तो इसे बढ़ने से रोका जा सकता है, और न ही गिराया जा सकता है।
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चिट्ठी रजिस्टर सिस्टम में निम्न कदम उठाने होते है :
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(1) आपको महीने के किसी एक निश्चित दिन एवं निश्चित समय (5 तारीख 5 बजे) को पीएम / सीएम को खुला निर्देश पत्र भेजना होता है।
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(2) आपको निर्देश पत्र में अपनी मांग की हेश लिखनी होती है, और हेश के अतिरिक्त कुछ नहीं लिखना होता है।
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(3) आपको यह निर्देश पत्र प्रत्येक महीने तब तक भेजना होता है जब तक कि पीएम / सीएम आपकी मांग को पूरा न करें।
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(4) आपको “My Letters to Pm” नाम से एक रजिस्टर बनाना होता है, और इसकी फोटोकॉपी इस रजिस्टर में रखनी होती है। तथा इस रजिस्टर में चिपकाई गयी फोटोकॉपी के पेज की फोटो अपनी फेसबुक प्रोफाइल पर रखनी होती है।
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(5) निर्देश पत्र पोस्टकार्ड में डालते समय आपको फेसबुक पर लाइव आना होता है।
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उपरोक्त में से किसी किसी एक भी बिंदु की अवहेलना की गयी तो चिट्ठी-रजिस्टर सिस्टम काम नहीं करेगा, और मांग खड़ी नहीं हो पाएगी। तो आरएसएस के शीर्ष नेताओं (कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठोड़ आदि) ने रिकालिस्ट द्वारा खोजे गए इस सिस्टम को तोड़ने के लिए शेष 4 बिन्दुओ को गायब कर दिया है, और वे नागरिको से सिर्फ पोस्टकार्ड डालने को कह रहे है !! सिर्फ एक बार चिट्ठी (पोस्टकार्ड) भेजना और उसकी फोटोकॉपी रजिस्टर में नहीं रखना चिट्ठी फेंकने के बराबर है।
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<https://www.facebook.com/GopiChandMeenamla/posts/1128788314601986>
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बहरहाल, पिछले 3 वर्षो से आरएसएस के कार्यकर्ता यह पुकारा लगा रहे थे कि पीएम को चिट्ठी भेजना एक बकवास कदम है, और इससे कोई बदलाव नहीं आएगा !! और अब 3 साल बाद वे ही लोग पीएम को पोस्टकार्ड भेज रहे है !!
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और ठीक ऐसा ही उन्होंने राईट टू रिकॉल कानूनों के साथ किया। वे पिछले 20 वर्षो से यह कह रहे थे कि राईट टू रिकॉल अव्यवहारिक है, संविधान के खिलाफ है, इससे अस्थिरता आएगी, इससे रोज चुनाव होंगे और यह भारत जैसे देश के लिए युक्तिसंगत नहीं है।
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लेकिन जब उन्होंने देखा कि राईट टू रिकॉल कानूनों की मांग कार्यकर्ताओ में लगातार बढ़ रही है, तो उन्होंने 2020 में हरियाणा में अस्थिरता लाने वाला एक नकारत्मक राईट टू रिकॉल सरपंच का क़ानून लागो किया, ताकि राईट टू रिकॉल आन्दोलन को हाईजेक करके तोड़ा जा सके।
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चिट्ठी-रजिस्टर सिस्टम के बारे में और अधिक जानकारी के लिए इस एल्बम के पोस्ट पढ़ें - <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/3162726007178947>
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