Pawan Jury BhilwaraRj
(A) स्वास्थ्य मंत्री पर वोट वापसी आने से क्या बदलाव आएगा ?
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मौजूदा व्यवस्था में हम विधायक को चुनते है, विधायक अपने बहुमत से मुख्यमंत्री का चुनाव करते है, और मुख्यमंत्री अपनी इच्छा से स्वास्थ्य मंत्री को नियुक्त करता है। इस तरह स्वास्थ्य मंत्री की नियुक्ति में राज्य के मतदाताओ की कोई भूमिका नहीं होती।
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स्वास्थ्य मंत्री की नियुक्ति एवं निष्कासन में नागरिको की कोई भूमिका नहीं होने के कारण स्वास्थ्य मंत्री जनहित की अवहेलना करते हुए फार्मा एवं बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिको से घूस खाकर उन्हें फायदा पहुँचाने वाले क़ानून बनाता है। यह क़ानून इस स्थिति को किस तरह पलट देगा, इसे हम कुछ उदाहरणों से समझते है :
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(a1) शक्कर, रिफाइंड तेल को दी जा रही सब्सिडी : फार्मा कम्पनियां शक्कर पर दी जा रही सब्सिडी जारी रखना चाहती है, ताकि खांड एवं गुड की तुलना में शक्कर सस्ती रहे और शक्कर का उपभोग बढ़े। शक्कर का उपभोग बढ़ने से दवाइयों की बिक्री बढ़ती है, जिससे फार्मा कम्पनियों का मुनाफा बढ़ता है। इसी तरह से तेल को रिफाइंड करने, चावल को पॉलिश करने के लिए भी सब्सिडी दी जाती है।
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रिफाइंड तेल एवं पॉलिश किये हुए चावल का उपभोग बढ़ने से दवाइयों की बिक्री बढती है। शक्कर, तेल, चावल मिलो के मालिक एवं फार्मा कम्पनियां यह सब्सिडी जारी रखना चाहती है, और इसे जारी रखने के लिए वे स्वास्थ्य मंत्री को चंदो के रूप में घूस एवं सकारात्मक कवरेज के लिए मीडिया कर्मियों को भुगतान करते है।
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इस कानून के आने के बाद स्वास्थ्य मंत्री नागरिको के स्वास्थ्य को नुकसान देने वाले उपरोक्त अनुदानों को बंद कर देगा और इस तरह की व्यवस्था करेगा कि यह सब्सिडी राज्य के नागरिको के खाते में सीधे जमा हो। यदि स्वास्थ्य मंत्री उपरोक्त कदम नहीं उठाता है तो नागरिक वोट वापसी पासबुक का प्रयोग करके स्वास्थ्य मंत्री को बदल देंगे।
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(a2) बाध्यकारी लॉकडाउन एवं वैक्सीनेशन : यह खुली हुयी बात है कि कोरोना संक्रमण को रोकने का लॉकडाउन से कोई सम्बन्ध नहीं था। किन्तु धनिक वर्ग ने कोरोना का इस्तेमाल लॉकडाउन डालने में किया। लॉकडाउन की वजह से छोटे एवं मझौले कारोबारी बाजार से बाहर हो गए और धनिक वर्ग का बाजार में हिस्सा बढ़ गया।
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यदि भारत में वोट वापसी स्वास्थ्य मंत्री का कानून लागू होता तो स्वास्थ्य मंत्री यह अनुशंषा करता कि, लॉकडाउन, वैक्सीनेशन एवं मास्क वैकल्पिक होना चाहिए अनिवार्य नहीं। और चूंकि मतदाताओं का बहुमत लॉकडाउन के खिलाफ था, अत: यदि स्वास्थ्य मंत्री ये सिफारिश नहीं करता तो मतदाता स्वास्थ्य मंत्री को बदल सकते थे।
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सार यह है कि, इस क़ानून के आने से स्वास्थ्य मंत्री सीधे राज्य के मतदाताओं द्वारा नियंत्रित होगा, और इस वजह से स्वास्थ्य मंत्री जनहित में फैसले लेना शुरू करेगा। क्योंकि वोट वापसी आने के बाद वह जान जाएगा कि यदि उसने ‘अपना काम बनता, भाड़ में जाए जनता’ के ढर्रे पर काम किया तो नागरिक बहुमत का प्रयोग करके उसे मंत्री पद से निष्कासित कर देंगे और धनिक वर्ग उसकी रक्षा नहीं कर पायेगा।
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(B) इस कानून को लागू करवाने के लिए आप क्या कदम उठा सकते है ?
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(b1) आने वाली 5 तारीख को अपने राज्य के मुख्यमंत्री को एक खुला आदेश-पत्र भेजे। खुले आदेश पत्र के रूप में आप बुक पोस्ट, लेटर, अंतर्देशीय पत्र, या पोस्टकार्ड भी भेज सकते है। आदेश पत्र में में यह लिखे : मुख्यमंत्री जी, आपके लिए निर्देश है कि स्वास्थ्य मंत्री पर वोट वापसी लागू करें - #VvpHealthMin
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(b2) राजनैतिक दलों पर दबाव बनाने एवं कार्यकर्ताओ का ध्यान आकृष्ट करने के लिए चुनावो में भाग लेना सबसे महत्त्वपूर्ण है। अत: इस क़ानून की मांग आगे बढ़ाने के लिए इस मुद्दे पर अपने क्षेत्र से विधायक, सांसद, पार्षद, सरपंच आदि का चुनाव लड़े, या उन उम्मीदवारों को वोट करें जिन्होंने अपने एजेंडे में इस कानून को शामिल किया है।
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