> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2021-04-02

Pawan Jury BhilwaraRj

क्या गिलगित बालतिस्तान भविष्य में पाकिस्तान का हिस्सा नहीं रहेगा?
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दिसम्बर 2020 में इमरान खान ने गिलगित बाल्टिस्तान का विलय पाकिस्तान में करने की सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी। मार्च 2021 में गिलगित बाल्टिस्तान की विधानसभा ने इस सम्बन्ध में बिल पास करके केंद्र सरकार को भेजा है।
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अब इमरान खान संविधान संशोधन द्वारा गिलगित बाल्टिस्तान को पाकिस्तान का पांचवा राज्य घोषित करेंगे और यदि यह संशोधन को जाता है, गिलगित बाल्टिस्तान पाकिस्तान का कानूनी रूप से हिस्सा हो जाएगा।
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Gilgit-Baltistan house passes joint resolution for interim provincial status for region - Times of India
<https://timesofindia.indiatimes.com/.../arti.../81418389.cms>;
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कश्मीर के मामले में यह काफी बड़ा और बुनियादी बदलाव है।
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गिलगित बाल्टिस्तान के बारे में पाकिस्तान द्वारा उठाया गया यह कदम उतना ही बड़ा है और इससे ठीक वैसा ही प्रभाव आएगा है जैसा प्रभाव भारत सरकार द्वारा धारा 370 को निरसित करने से आया है।
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भारत के पेड मीडिया एवं राजनैतिक आई टी सेल्स ने यह प्रकरण पूरी तरह से गायब कर दिया है या इसे अंडर रिपोर्ट किया है !!!
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उल्लेखनीय है कि, जब कश्मीर पर पाकिस्तान ने हमला किया था और भारत ने पाकिस्तान को खदेड़ा था तो युद्ध विराम के दौरान आधे कश्मीर पर भारत का नियंत्रण स्थापित हो गया और आधे कश्मीर पर पाकिस्तान ने सामरिक रूप से कब्ज़ा बनाए रखा।
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जिस आधे कश्मीर पर पाकिस्तान ने कब्ज़ा कर लिया था यही गिलगित बाल्टिस्तान है। इसे पाक अधिकृत कश्मीर भी कहा जाता है। कश्मीर को लेकर 1947 से भारत-पाक में लड़ाई इस बात की है कि, पाकिस्तान ने अवैध रूप से कश्मीर के आधे हिस्से (गिलगित बाल्टिस्तान) पर जबरन कब्ज़ा किया हुआ है, और पाकिस्तान को यह हिस्सा खाली कर देना चाहिए।
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और पाकिस्तानी के संविधान एवं कानून के अनुसार भी कश्मीर का यह हिस्सा पाकिस्तान का अंग नहीं है।
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किन्तु यदि यह संविधान संशोधन हो जाता है तो गिलगित बाल्टिस्तान पाकिस्तान का कानूनी रूप से पांचवा राज्य बन जाएगा और गिलगित बाल्टिस्तान के सांसदों को पाकिस्तान की संसद में प्रतिनिधित्व मिलेगा।
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सबसे पहले 1972 में शिमला समझौते के दौरान इस बिंदु पर रजामंदी बनाने की बात शुरू हुयी थी कि कश्मीर को यथा स्थिति में आधा-आधा बाँट लिया जाए।
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मतलब जो आधा कश्मीर भारत के पास है वह भारत का अंग बने, जिस आधे कश्मीर (गिलगित बाल्टिस्तान) पर पाकिस्तान का अवैध कब्ज़ा है भारत उस हिस्से पर अपना दावा छोड़ दे, और नियंत्रण रेखा (LOC) को अंतराष्ट्रीय सीमा मान लिया जाए। लेकिन बात नहीं बनी।
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इसके बाद से लगातार इस फार्मूले पर सुगबुगाहट चलती रही।
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माना जाता है कि, आगरा शिखर वार्ता (मुशर्रफ और वाजपेयी) के दौरान इस फार्मूले पर लगभग रजामंदी बन चुकी थी, लेकिन एन मौके पर फिर से बात टूट गयी।
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असल में, कोई भी प्रधानमंत्री इस फार्मूले पर पहल नहीं करना चाहता था। क्योंकि इस फार्मूले को सब के सामने स्वीकारने का मतलब है कि समझौता होने के साथ ही अगले दिन भारत-पाकिस्तान का नक्शा बदल जाएगा। और अवाम को यह साफ़ नज़र आने लगेगा कि हम आधा कश्मीर गँवा चुके है। और इसकी गाज उस सरकार पर गिरेगी जो यह समझौता करेगी।
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अब शायद आज के 5-10 साल बाद यह जानकारी सामने आए कि 2018 में भारत एवं पाकिस्तान की सरकारों ने इस फार्मूले को अनाधिकृत रूप से लागू करना तय किया था।
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सब कुछ तय हो जाने के बाद पहले चरण में भारत ने धारा 370 को निरस्त किया और पाकिस्तान की सरकार ने जबानी विरोध जताने का ड्रामा किया।
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और पाकिस्तान सरकार ने अपनी अवाम से यह बात छिपा ली कि, उन्हें यह जानकारी पहले से थी कि भारत 370 ख़त्म करके कश्मीर का विलय भारत में करेगा।
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और फिर पाकिस्तान (गिलगित बाल्टिस्तान) का विलय पाकिस्तान में करेगा और यह बात भारत सरकार को पहले से पता थी।
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बहरहाल, कुछ ही हफ्तों में मालूम हो जाएगा कि मोदी साहेब पाकिस्तान को यह संविधान संशोधन करने से रोकने के लिए कोई वास्तविक कदम उठाते है, या रस्मी विरोध दर्ज करवा कर कश्मीर (गिलगित बाल्टिस्तान) का विलय कानूनी रूप से पाकिस्तान में होने देते है।
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