Pawan Jury BhilwaraRj
राईट टू रिकॉल पार्टी में पद सोपान के लिए प्रस्तावित रूप रेखा :
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राईट टू रिकॉल पार्टी में पद सोपान नहीं है, और ज्यादातर कार्यकर्ता इस बात पर सहमत है कि पार्टी को संचालित करने के लिए पदानुक्रम की आवश्यकता भी नहीं है। किन्तु, यदि हम निकट भविष्य में पद सोपान लागू किया जाना तय करते है तो यह किस तरह होना चाहिए इसकी रूपरेखा निचे दी गयी है।
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यदि अधिकांश कार्यकर्ता किसी समय पद सोपान को लागू करने की आवश्यकता महसूस करते है, तो आवश्यक संशोधनों को पूर्ण करके निम्नलिखित व्यवस्था को लागू किया जा सकेगा।
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यह पोस्ट अपूर्ण है। अन्य सुझावों पर विमर्श करके इसे पूरा किया जायेगा।
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----पदानुक्रम-----
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(A) इस पोस्ट में "कार्यकर्ता" शब्द से आशय ऐसे नागरिक से है जो नागरिक कर्तव्य दिवस यानी महीने की प्रत्येक 5 तारीख को पीएम / सीएम को चिट्ठी भेज रहा है, और चिट्ठी की फोटोकॉपी का रिकॉर्ड My Letters to Pm नाम से बनाए रजिस्टर में रख रहा है।
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(B) इस पोस्ट में "मीटिंग या सार्वजानिक बैठक" शब्द से आशय है महीने के द्वितीय रविवार को सांय 4 बजे होने वाली सार्वजनिक बैठक।
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(1) पद - वार्ड अध्यक्ष :
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यदि किसी नगर निकाय के वार्ड में कम से कम 10 कार्यकर्ता है तो अमुक वार्ड में वार्ड अध्यक्ष का पद खुल (Activate) जाएगा।
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(1.1) नियुक्ति : तब अमुक 10 या अधिक कार्यकर्ता सार्वजनिक बैठक में अपने वार्ड का अध्यक्ष चुनेंगे। यदि वार्ड अध्यक्ष पद के एक से अधिक उम्मीदवार है तो वोटिंग होगी। कोरम आदि के बारे में विस्तृत नियम जोड़े जाने शेष है।
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(1.2) वार्ड अध्यक्ष का कार्यकाल 2 वर्ष का होगा।
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(1.3) अमुक वार्ड के कार्यकर्ता चाहे तो सार्वजनिक बैठक में बहुमत से प्रस्ताव पास करके अध्यक्ष को किसी भी समय निष्कासित कर सकते है।
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(1.4) अमुक वार्ड जिस विधानसभा के अंतर्गत आता है उस विधानसभा के कार्यकर्ता चाहे तो सार्वजनिक बैठक में बहुमत से प्रस्ताव पास करके वार्ड अध्यक्ष को निष्कासित कर सकते है।
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(1.5) अमुक वार्ड जिस लोकसभा के अंतर्गत आता है उस लोकसभा के कार्यकर्ता चाहे तो सार्वजनिक बैठक में बहुमत से प्रस्ताव पास करके वार्ड अध्यक्ष को निष्कासित कर सकते है।
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(1.6) निम्नलिखित पदाधिकारियों के पास वार्ड अध्यक्ष को निष्कासित करने की स्व विवेकीय शक्ति नहीं होगी :
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(1.6.1) पार्टी का राष्ट्रिय अध्यक्ष या कोई भी राष्ट्रिय पदाधिकारी
(1.6.2) पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष या प्रदेश पदाधिकारी
(1.6.3) अमुक लोकसभा क्षेत्र का अध्यक्ष या विधानसभा पदाधिकारी
(1.6.4) अमुक विधानसभा क्षेत्र का अध्यक्ष या विधानसभा पदाधिकारी
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(1.4) 2 वर्ष पूर्ण होने के बाद वार्ड अध्यक्ष स्वत: निष्कासित हो जाएगा।
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(1.5) जो व्यक्ति वार्ड अध्यक्ष के रूप में निरंतर 2 कार्यकाल (4 वर्ष) पूरे कर चुका है, वह अगले 500 दिनों तक वार्ड अध्यक्ष नहीं बन सकेगा।
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(2) पद – वार्ड मंडल अध्यक्ष :
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5 वार्डो को मिलाने से एक वार्ड मंडल बनेगा और प्रत्येक वार्ड मंडल पर एक अध्यक्ष होगा। वार्ड मंडल अध्यक्ष का पद सिर्फ तब खुलेगा जब अमुक 5 वार्डो में वार्ड अध्यक्ष का पद खुल चुका हो।
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(2.1) नियुक्ति : अमुक वार्ड मंडल के कार्यकर्ता सार्वजनिक बैठक में अपने वार्ड मंडल का अध्यक्ष चुनेंगे।
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(2.2) वार्ड मंडल अध्यक्ष का कार्यकाल 1 वर्ष होगा।
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(2.3) अमुक वार्ड मंडल के कार्यकर्ता चाहे तो सार्वजनिक बैठक में बहुमत से प्रस्ताव पास करके अध्यक्ष को किसी भी समय निष्कासित कर सकते है।
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(2.4) अमुक वार्ड मंडल जिस विधानसभा के अंतर्गत आता है उस विधानसभा के कार्यकर्ता चाहे तो सार्वजनिक बैठक में बहुमत से प्रस्ताव पास करके वार्ड मंडल अध्यक्ष को निष्कासित कर सकते है।
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(2.5) अमुक वार्ड मंडल जिस लोकसभा के अंतर्गत आता है उस लोकसभा के कार्यकर्ता चाहे तो सार्वजनिक बैठक में बहुमत से प्रस्ताव पास करके वार्ड मंडल अध्यक्ष को निष्कासित कर सकते है।
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(2.6) निम्नलिखित पदाधिकारियों के पास वार्ड मंडल अध्यक्ष को निष्कासित करने की स्व विवेकीय शक्ति नहीं होगी :
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(2.6.1) पार्टी का राष्ट्रिय अध्यक्ष या कोई भी राष्ट्रिय पदाधिकारी
(2.6.2) पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष या प्रदेश पदाधिकारी
(2.6.3) अमुक लोकसभा क्षेत्र का अध्यक्ष या लोकसभा पदाधिकारी
(2.6.4) अमुक विधानसभा क्षेत्र का अध्यक्ष या विधानसभा पदाधिकारी
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(2.7) 1 वर्ष पूर्ण होने के बाद वार्ड मंडल अध्यक्ष स्वत: निष्कासित हो जाएगा।
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(2.8) जो व्यक्ति वार्ड मंडल अध्यक्ष के रूप में निरंतर 3 कार्यकाल (3 वर्ष) पूरे कर चुका है, वह अगले 300 दिनों तक वार्ड मंडल अध्यक्ष नहीं बन सकेगा।
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(3) पद – विधानसभा अध्यक्ष :
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यदि किसी विधानसभा में कम से कम 50 कार्यकर्ता है तो अमुक विधानसभा में विधानसभा अध्यक्ष का पद खुल (Activate) जाएगा।
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(3.1) नियुक्ति : तब अमुक विधानसभा क्षेत्र के कार्यकर्ता सार्वजनिक बैठक में अपनी विधानसभा का अध्यक्ष चुनेंगे।
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(3.2) विधानसभा अध्यक्ष का कार्यकाल 2 वर्ष का होगा।
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(3.3) अमुक विधानसभा के कार्यकर्ता चाहे तो सार्वजनिक बैठक में बहुमत से प्रस्ताव पास करके विधानसभा अध्यक्ष को किसी भी समय निष्कासित कर सकते है।
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(3.4) अमुक विधानसभा जिस लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है उस लोकसभा के कार्यकर्ता चाहे तो सार्वजनिक बैठक में बहुमत से प्रस्ताव पास करके विधानसभा अध्यक्ष को निष्कासित कर सकते है।
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(3.5) अमुक विधानसभा जिस प्रदेश में आता है उस प्रदेश के कार्यकर्ता चाहे तो सार्वजनिक बैठक में बहुमत से प्रस्ताव पास करके विधानसभा अध्यक्ष को निष्कासित कर सकते है।
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(3.6) निम्नलिखित पदाधिकारियों के पास विधानसभा अध्यक्ष को निष्कासित करने की स्व विवेकीय शक्ति नहीं होगी :
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(3.6.1) पार्टी का राष्ट्रिय अध्यक्ष या कोई भी राष्ट्रिय पदाधिकारी
(3.6.2) पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष या प्रदेश पदाधिकारी
(3.6.3) अमुक लोकसभा क्षेत्र का अध्यक्ष या लोकसभा पदाधिकारी
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(3.7) 2 वर्ष पूर्ण होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष स्वत: निष्कासित हो जाएगा।
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(3.8) जो व्यक्ति विधानसभा अध्यक्ष के रूप में निरंतर 2 कार्यकाल (4 वर्ष) पूरे कर चुका है, वह अगले 500 दिनों तक विधानसभा अध्यक्ष नहीं बन सकेगा।
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(4) पद – लोकसभा अध्यक्ष :
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यदि किसी लोकसभा में कम से कम 100 कार्यकर्ता है तो अमुक लोकसभा में लोकसभा अध्यक्ष का पद खुल (Activate) जाएगा।
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(4.1) नियुक्ति : तब अमुक लोकसभा क्षेत्र के कार्यकर्ता सार्वजनिक बैठक में अपनी लोकसभा का अध्यक्ष चुनेंगे।
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(4.2) लोकसभा अध्यक्ष का कार्यकाल 3 वर्ष का होगा।
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(4.3) अमुक लोकसभा के कार्यकर्ता चाहे तो सार्वजनिक बैठक में बहुमत से प्रस्ताव पास करके लोकसभा अध्यक्ष को किसी भी समय निष्कासित कर सकते है।
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(4.4) अमुक लोकसभा जिस प्रदेश के अंतर्गत आता है उस प्रदेश के कार्यकर्ता चाहे तो सार्वजनिक बैठक में बहुमत से प्रस्ताव पास करके लोकसभा अध्यक्ष को निष्कासित कर सकते है।
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(4.5) निम्नलिखित पदाधिकारियों के पास लोकसभा अध्यक्ष को निष्कासित करने की स्व विवेकीय शक्ति नहीं होगी :
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(4.5.1) पार्टी का राष्ट्रिय अध्यक्ष या कोई भी राष्ट्रिय पदाधिकारी
(4.5.2) पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष या प्रदेश पदाधिकारी
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(4.6) 3 वर्ष पूर्ण होने के बाद लोकसभा अध्यक्ष स्वत: निष्कासित हो जाएगा।
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(4.7) जो व्यक्ति लोकसभा अध्यक्ष के रूप में निरंतर 2 कार्यकाल (6 वर्ष) पूरे कर चुका है, वह अगले 500 दिनों तक लोकसभा अध्यक्ष नहीं बन सकेगा।
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नोट – पद सोपान लागू करने का एक संभावित गंभीर नुकसान यह होगा कि पद पाने के बाद पदाधिकारी अपना नाम अख़बार में छपवाने की कसरत में लग जायेंगे। पेड मीडिया ख्याति लोलुप पदाधिकारियों को प्रथम चरण में सकारात्मक कवरेज देगा ताकि अमुक व्यक्ति को आन्दोलन का चेहरा बनाया जा सके, और फिर अगले चरण में अमुक चेहरे को गिरा देगा।
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यदि हम अमुक व्यवस्था को लागू करते है तो हमें इसमें उन निर्देशांको को शामिल किये जाने की जरूरत है जिससे पदाधिकारियो को पेड मीडिया की और जाने से रोका जा सके।
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