> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2020-11-05

Pawan Jury BhilwaraRj

(1) 2003 में दिल्ली नगर निगम एवं स्वास्थ्य मंत्रालय नागरिको को आतिशबाजी करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा था !!! वजह ?
.
उन्होंने पाया कि घनघोर आतिशबाजी डेंगू के मच्छरों का नाश कर देती है। और इस लिहाज से आतिशबाजी जरुरी है। आतिशबाजी का धुंवा वातावरण की नमी सोख लेता है और धुंवे के कारण मच्छरों की एक बड़ी आबादी नष्ट हो जाती है। नतीजा : इससे नए मच्छरों के पनपने के अवसर भी कम हो जाते है !! पेड द हिन्दू का लिंक देखें -
.
<https://www.thehindu.com/todays-paper/tp-national/tp-newdelhi/say-yes-to-fire-crackers-to-control-dengue/article27803956.ece>;
.
(2) 2006 में पेड टाइम्स ऑफ़ इण्डिया ने विभिन्न स्वास्थ्य विशेषज्ञों के हवाले से रिपोर्ट किया कि दिवाली की आतिशबाजी मच्छरों से निपटने के लिए प्रभावी उपाय है। पेड टाइम्स ऑफ़ इण्डिया का लिंक -

<https://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/Diwali-cracker-fumes-dousing-dengue/articleshow/2229883.cms?fbclid=IwAR0wjVl4lP_z5HhYeB455LBY9uh0wXfiephplE7L-wh6ePO632r84-1Kfqc>;
.
(3) (1) आतिशबाजी से हुआ प्रदुषण सिर्फ 3 घंटे के अंदर वातावरण से पूरी तरह गायब हो जाता है !!! ऐसा दिल्ली के रोहिणी स्टेशन पर लगे प्रदूषण मापक सिस्टम के आंकड़ों से सिद्ध होता है। 2013 में आई आई टी कानपुर ने यह अध्ययन किया था !! उन्होंने कई सेम्पल इकट्ठे करके यह जांचा और पाया कि दिवाली के दिन सुबह 4 बजे तक PM2.5 का स्तर फिर से 300 से 375 micrograms तक आ जाता है, जो कि दिल्ली के नियमित दिनों के लिए प्रदुषण का औसत स्तर है। लिंक देखें -

<https://www.financialexpress.com/india-news/firecrackers-ban-delhi-ncr-not-just-diwali-whats-sc-plan-periods/889207/?fbclid=IwAR3XMKGfY7vgY4lnPab6HLIoYn7uesurOHeQqInXgWG14I_3yrFJSW8XK4k>;
.
उल्लेखनीय है कि पटाखों से जो धुंआ और गर्मी पैदा होती है वह मच्छरों के लिए तो हानिकारक है लेकिन इंसान के लिए नहीं। क्योंकि आतिशबाजी का धुंआ वातावरण में सिर्फ 3 घंटे ही टिका रह सकता है। सांय 6 बजे से आतिशबाजी शुरू होती है और 11 बजे तक यह बड़े पैमाने पर चलती रहती है। इन पांच घंटो में मच्छर मर जाते है और 2 बजे तक प्रदूषण का स्तर फिर से वही हो जाता है जैसा कि आतिशबाजी से पहले था !!!
.
दुसरे शब्दों में, दिल्ली में पिछले 15 सालो से जो आतिशबाजी के खिलाफ प्रचार चलाया जा रहा है, उसकी वजह से डेंगू एवं अन्य मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया लगता है। और अगर ऐसा है तो मेरे विचार में इन अतिरिक्त मौतों के लिए जिम्मेदार वे लोग है जो मिशनरीज द्वारा नियंत्रित पेड मीडिया की चपेट में आकर दिवाली की आतिशबाजी के खिलाफ प्रचार अभियान चला रहे है !!!
.
और जब इस सब से इनकी बात नहीं बनी तो ये अब अपने थेले में से कुत्ते-बिल्ली निकाल लाये है !!
.
---------