> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2020-10-21

Pawan Jury BhilwaraRj

राईट टू रिकॉल क़ानून प्रक्रियाओं के बारे में महत्त्वपूर्ण सूचना :
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(A) राईट टू रिकॉल प्रक्रियाएं 2 प्रकार की है।
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(1) नकारात्मक प्रक्रिया : इस प्रक्रिया में मतदाता किसी अधिकारी या नेता को सिर्फ "निकालने" के लिए अपनी सहमती दे सकता है, बदलने के लिए नहीं। सिर्फ नकारने की प्रक्रिया होने के कारण इसे नकारात्मक रिकॉल कहते है। नकारत्मक रिकॉल की प्रक्रिया से शासन में अस्थिरता आती है और प्रशासन और भी बदतर हो जाता है।
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उदाहरण :
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(1a) RSS की हरियाणा सरकार राईट टू रिकॉल सरपंच नामक जो क़ानून लागू कर रही है उसमें जब रिकॉल पोल होगा तो मौजूदा सरपंच निकाल दिया जाएगा और सरपंच की कुर्सी खाली हो जाएगी। और सरपंच की कुर्सी तब तक खाली रहेगी जब तक अमुक पंचायत में नए सरपंच के चुनाव नहीं होते !! सिर्फ नकारने की प्रक्रिया होने के कारण RSS का यह क़ानून प्रशासन में अस्थिरता लाएगा।
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(1b) RSS के सांसद वरुण गांधी जी ने राईट टू रिकॉल का जो क़ानून प्रस्तावित किया है उसमें भी सिर्फ नकारने की प्रक्रिया है। मतलब यदि मतदाता सांसद को रिकॉल करते है तो सांसद निकाल दिया जाएगा और नए चुनाव होने तक अमुक संसदीय क्षेत्र में सांसद की कुर्सी खाली रहेगी !!
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(2) सकारात्मक प्रक्रिया : राईट टू रिकॉल की सकारात्मक प्रक्रियाओ में मतदाताओ के पास यह विकल्प भी होता है कि वे अमुक अधिकारी को निकाल कर किस व्यक्ति को अमुक पद पर लाना चाहते है। मतलब कोई अधिकारी या नेता सिर्फ तब ही ‘बदला’ जाता है, जब नागरिको का बहुमत किसी अन्य व्यक्ति को अमुक पद पर नियुक्त करने की स्वीकृति दें। निकालने की जगह 'बदलने’ की प्रक्रिया होने के कारण कुर्सी किसी भी समय खाली नहीं रहती और अस्थिरता नहीं आती।
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उदाहरण : राईट टू रिकॉल पार्टी द्वारा प्रस्तावित सभी प्रक्रियाएं सकारात्मक है। हमारे द्वारा प्रस्तावित सभी कानूनों में मतदाता के पास अधिकारी / नेता को बदलने का विकल्प है। मतलब नागरिको के बहुमत को पहले यह बताना होता है कि वे किस व्यक्ति को अमुक पद पर नियुक्त करना चाहते है। और जब नए अधिकारी / नेता की नियुक्ति होने के बाद ही पदासीन अधिकारी / नेता को निष्कासित किया जाता है। अत: कुर्सी एक मिनिट के लिए भी खाली नहीं रहती।
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टिप्पणी : यदि कोई व्यक्ति राईट टू रिकॉल प्रक्रियाओं की बात कर रहा है, तो कृपया सबसे पहले अमुक राईट टू रिकॉल क़ानून का ड्राफ्ट देखें। ताकि आप यह जान सके कि अमुक राईट टू रिकॉल में सिर्फ नकारात्मक प्रक्रिया है, या सकारात्मक !! वरना नागरिक इस भ्रम के शिकार हो सकते है कि आप अस्थिरता लाने वाले RSS के नकारात्मक राईट टू रिकॉल प्रक्रियाओं के भी समर्थक है !!
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(B) वोट वापसी प्रक्रियाएं
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वोट वापसी की सभी प्रक्रियाएं सकारात्मक होती है। वोट वापसी प्रक्रियाएं नकारात्मक कभी भी नहीं होती।
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वोट वापसी प्रक्रियाओं में प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलती है, और पासबुक में मतदाता के पास यह विकल्प रहता है कि वे पदासीन अधिकारी / नेता को किस अधिकारी / नेता से बदलना चाहते है।
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टिप्पणी : यदि कोई व्यक्ति वोट वापसी पासबुक वाली प्रक्रियाओं का समर्थन कर रहा है, तो इसका आशय है कि वह सिर्फ सकारात्मक प्रक्रियाओं का समर्थन कर रहा है। क्योंकि भारत में (और पूरी दुनिया में भी) वोट वापसी पासबुक वाली सभी प्रस्तावित प्रक्रियाएं सकारात्मक है। राईट टू रिकॉल पार्टी द्वारा प्रस्तावित सभी वोट वापसी प्रक्रियाओं में पासबुक का प्रावधान है, और ये सभी सकारात्मक प्रक्रियाएं है।
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(C) 1919 से 2015 तक भारत में राईट टू रिकॉल की सिर्फ सकारात्मक प्रक्रियाएं मौजूद थी। और ये सभी प्रक्रियाएं राईट टू रिकॉल पार्टी द्वारा प्रस्तावित की गयी थी। 16 साल के सघन प्रचार के बाद जब राईट टू रिकॉल प्रक्रियाएं जनता में लोकप्रिय हो गयी तो 'राईट टू रिकॉल आन्दोलन एवं राईट टू रिकॉल प्रक्रियाओं' को बदनाम करने के लिए 2015 में RSS ने सांसद पद पर एक नकारात्मक क़ानून लाने का प्रस्ताव किया, जो कि अभी संसद में लंबित है।
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फिर RSS फिर इससे भी आगे बढ़ा। अब 2020 में उन्होंने राईट टू रिकॉल सरपंच नाम से एक और बेहद नकारात्मक प्रक्रिया वाला क़ानून लाने का फैसला किया है। यह क़ानून बेहद खतरनाक है, और इसके निम्नलिखित परिणाम आयेंगे :
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(i) गाँवों में सांप्रदायिक जातीय वैमनस्य एवं अलगाव बढेगा।
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(ii) पंचायत स्तर पर राजनैतिक लड़ाई-झगड़ो, मारपीट आदि में इजाफा होगा।
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(iii) आपसी भाईचारा एवं सौहार्द बिगड़ेगा।
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(iv) सत्ताधारी विधायक अपने विरोधी सरपंचो को निष्कासित करके पंचायतो पर कब्ज़ा कर लेंगे।
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(v) सरपंचो पर सत्ताधारी विधायको की पकड़ मजबूत होगी।
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(vi) रिकॉल होने पर पंचायतो में सरपंचो की कुर्सियां खाली हो जाएगी और अस्थिरता आएगी।
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RSS उपरोक्त बुरे बदलाव लाने की जिम्मेदारी राईट टू रिकॉल प्रक्रियाओं के समर्थको एवं कार्यकर्ताओ पर डालना चाहता है। अत: उन्होंने इस क़ानून का नाम भी 'राईट टू रिकॉल सरपंच' रखा है !!
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