Pawan Jury BhilwaraRj
टिप्पणी से प्रश्न : बस यह समझ नही आता मोदी साहब इतने पैसो को खर्च किस प्रकार करते है ?
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उत्तर : प्रत्येक चेनल हर महीने अपनी दर्शक संख्या के अनुपात में लगभग 50 लाख से 5 करोड़ का घाटा बनाता है। NDTV को शामिल करते हुए मुख्यधारा में लगभग 25 चेनल है। इस हिसाब से उनका सकल अनुमानित घाटा 2*25 = 50 करोड़ महिना है !! और लगभग इतना ही घाटा मुख्यधारा के अख़बार बनाते है। मतलब - 50*2 = 100 करोड़ !!
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और लगभग 10 करोड़ महीने का आई टी सेल के प्रोफेशनल्स, स्टाफ आदि के वेतन आदि !! और पेड मीडिया एवं सोशल मीडिया जैसे जैसे विस्तार कर रहा है इसका घाटा उठाने यह खर्चा लगातार बढ़ता जा रहा है !!
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यह 100–125 करोड़ महीने का खर्चा है जो पीएम को अपनी कुर्सी पर बने रहने के लिए करना होता है !! और चुनाव में यह खर्चा लगभग 5 से 10 गुना हो जाता है !! जब मनमोहन सिंह जी पीएम थे तो उनको भी यह घाटा उठाना होता था और मोदी साहेब को भी उठाना पड़ता है !!
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तो पीएम बहुरष्ट्रीय कंपनियों एवं टाटा-अम्बानी-अडानी आदि समूहों को अतिरिक्त मुनाफा देने वाले क़ानून छापता है और बदले में इन कम्पनियों के मालिक पेड मीडिया को पेमेंट करते है कि वे पीएम की छवि टिकाए रखने के हिसाब से प्रसारण करें।
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उदाहरण के लिए मोदी साहेब ने टाटा को झारखण्ड में 1 रूपये में कोयला खोदने के राइट्स जारी रखने के आदेश दिए हुए है। यदि मोदी साहेब ये राइट्स केंसिल कर देते है, तो टाटा अतिरिक्त मुनाफा बनाना बंद कर देगा। तब वह पेड मीडिया कर्मियों से कहेगा कि वे मोदी साहेब के कपड़े फाड़ना शुरू करें। और तब पेड मीडिया ऐसी खबरें निकाल निकाल कर दिखाने लगेगा कि, 2 हफ्ते में जनता पीएम के 10,000 पुतले फूंक देगी !!
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मोदी साहेब और आरएसएस की आय का स्त्रोत जीरो है !! फुटकर भ्रष्टाचार एवं गबन द्वारा नियमित रूप से इतने बड़े पैमाने पर पैसा नहीं बनाया जा सकता कि मीडिया का नियमित घाटा उठाया जा सके !! इतना पैसा सिर्फ क़ानून छाप कर ही बनाया जा सकता है !! अत: वे धनिकों को मुनाफा देने वाले क़ानून छापते है, और बदले में धनिक पेड मीडिया का घाटा उठाते है।
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ये जितना ही पेड मीडिया हाउस आप देख रहे है, ये वे शिकारी शिकारी कुत्ते है, जो पीएम को 24*7 घंटे घेर कर रखे हुए है। जितने ज्यादा लोगो को पेड मीडिया अपनी गिरफ्त में ले लेता है पीएम का खर्चा उतना ही बढ़ जाता है।
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दुसरे शब्दों में, पीएम पर जनता का लगभग शून्य दबाव होता है। जनता एवं पीएम के बीच में पेड मीडिया के स्पोंसर्स है। मीडियाकर्मी जनता को अंगेज करके रखते है, और बदले में पेड मीडिया के प्रायोजक पीएम को ब्लेकमेल करते है !!
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समाधान – #JuryCourt गेजेट में छापे बिना इस सर्कस को रोका नहीं जा सकता है।
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