> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2020-06-01

Pawan Jury BhilwaraRj

जूरी सिस्टम, जज सिस्टम एवं जूरी कोर्ट में क्या अंतर है ? भारत में यह कैसे लागू हो सकता है?
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(1) दुनिया में अदालतें चलाने की दो प्रणालियाँ मौजूद है :
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(i) जज सिस्टम : जज सिस्टम में, दंड देने की शक्ति कुछ लोगो को स्थायी रूप से दे दी जाती है, और इनकी नियुक्ति एवं निष्कासन का अधिकार राजवर्ग के पास होता है। चूंकि जज सिस्टम में गठजोड़ बनाकर फैसलों को प्रभावित करना आसान होता है, अत: बहुधा धनिक वर्ग, रसूखदार एवं शासन में बैठे लोग जज सिस्टम को काफी पंसद करते है।
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(ii) जूरी सिस्टम : जूरी सिस्टम में दंड देने की शक्ति विभिन्न व्यक्तियों में लगातार हस्तांतरित होती रहती है। दंड देने की शक्ति के निरंतर नए लोगो के हाथ में जाने के कारण जूरी सिस्टम में पैसा फेंक कर पहुँच का इस्तेमाल करके न्याय खरीदना काफी मुश्किल हो जाता है। अत: संपत्तिशाली, अभिजन एवं राजवर्ग जूरी सिस्टम से अत्यंत घृणा करता है।
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(1.1) क्या जूरी सिस्टम लागू किया जा सकता है ?
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देखिये, यदि आपको देश में कोई भी प्रक्रिया लागू करनी हो तो उसे गेजेट में छापना होता है। लेकिन जूरी सिस्टम कोई प्रक्रिया नहीं है, जिसे गेजेट में छापा जा सके। यह सिर्फ एक सिद्धांत है। इस सिद्धांत को आधार बनाकर पहले इसकी प्रक्रिया लिखनी होगी। और तब ही इसे लागू किया जा सकता है।
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जूरी सिस्टम का सिद्धांत सिर्फ यह कहता है कि – दंड देने की शक्ति लगातार नए लोगो में हस्तांतरित होगी। बस !! जूरी सिस्टम का मतलब इतना ही है। जूरी सिस्टम का यह ड्राफ्टविहीन सिद्धांत निम्नलिखित सूचनाएं नहीं देता :
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(a) दंड देने की शक्ति किन लोगो या लोगो के किन समूहों में हस्तांतरित होगी ?
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(b) जूरी सदस्यों का चयन एवं जूरी मंडलों का गठन किस तरह होगा ?
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(c) जूरी को कौनसे मुकदमे सुनने का अधिकार होगा, और कौनसे मुकदमो को सुनने का अधिकार नहीं होगा ?
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(d) कौन व्यक्ति जूरी में शामिल होने के लिए अयोग्य होंगे ?
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(e) जूरी द्वारा सुनवाई करने की प्रक्रिया क्या होगी ?
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(f) अंतिम फैसला देने के अधिकार किसे होगा ?
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(g) क्या जूरी मंडल के फैसले के खिलाफ अपील की जा सकेगी ?
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और इसी तरह के सैंकड़ो प्रश्न। अत: जब तक हमारे पास जूरी के संचालन की लिखित प्रक्रिया नहीं हो तब तक इसे गेजेट में नहीं छापा जा सकता है, और इसीलिए इसे लागू भी नहीं किया जा सकता। मतलब प्रधानमंत्री जी, गेजेट में सिर्फ यह तो नहीं लिख सकते कि – जूरी सिस्टम लागू किया जाता है !!
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इसके लिए पहले प्रक्रिया बनानी होती है, ताकि अधिकारी दिए गए निर्देशों का पालन करके अमुक प्रकिया को लागू कर सके। उदाहरण के लिए जब भारत में मताधिकार लागू किये गए तो इसकी प्रक्रिया बनायी गयी कि, वोट कौन दे सकेंगे, कितनी आयु के लोगो को मताधिकार मिलेगा, वोट देने के लिए नागरिक कहाँ जायेंगे, किन किन पदों के लिए वे वोट दे सकेंगे आदि आदि।
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(1.2) जूरी कोर्ट क्या है ?
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जूरी कोर्ट उस प्रस्तावित प्रक्रिया या ड्राफ्ट का नाम है, जिसे गेजेट में छापने से जूरी सिस्टम लागू होगा। जूरी कोर्ट के ड्राफ्ट में 2 खंड एवं 44 धाराएं है, जिसमें जूरी मंडलों के संचालन के विस्तृत नियम एवं निर्देश दिए गए है। पहले खंड में सत्र न्यायालय, उच्च न्यायालय एवं उच्चतम न्यायालय में जूरी मंडलों के गठन, संचालन एवं सुनवाई की प्रक्रिया के नियम / निर्देश है, और दुसरा खंड वोट वापसी प्रक्रियाओ के बारे में है।
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तो जूरी कोर्ट एवं जूरी सिस्टम में मुख्य अंतर यह है कि —
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जूरी सिस्टम एक सिद्धांत है, और इसे लागू नहीं किया जा सकता है। जबकि जूरी कोर्ट एक ड्राफ्ट है, जिसे गेजेट में प्रकाशित करने से भारत में जूरी सिस्टम लागू होगा।
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(2) भारत में जूरी कोर्ट कैसे लागू हो सकता है ?
यदि जूरी कोर्ट को गेजेट में प्रकाशित कर दिया जाता है तो भारत में जूरी कोर्ट लागू हो जायेगा। गेजेट छापने की शक्ति सिर्फ 2 व्यक्तियों के पास है :
(i) प्रधानमंत्री
(ii) मुख्यमंत्री
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(2.1) यदि प्रधानमंत्री जूरी कोर्ट गेजेट में छापते है, तो यह पूरे देश में लागू होगा और भारत के प्रत्येक नागरिक को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। यदि पीएम द्वारा इसे लागू किया जाता है तो भारत की तीनो स्तर की अदालतों में जूरी कोर्ट की स्थापना होगी।
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(2.2) यदि मुख्यमंत्री राज्य जूरी कोर्ट गेजेट में छापते है तो जूरी कोर्ट अमुक राज्य में लागू होगा और राज्य के प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। राज्य जूरी कोर्ट यदि गेजेट में आता है तो यह सिर्फ सत्र न्यायालय एवं उच्च न्यायालय में ही लागू होगा और सुप्रीम कोर्ट में जूरी प्रक्रियाएं लागू नहीं होगी।
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(2.3) मुख्यमंत्री चाहे तो अपने राज्य के किसी जिले में भी “जिला जूरी कोर्ट” लागू कर सकते है। यदि मुख्यमंत्री किसी जिले में जिला जूरी कोर्ट लागू करते है, तो अमुक जिले के प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। जिला जूरी कोर्ट यदि गेजेट में आता है तो यह सिर्फ सत्र न्यायालय (शेषन कोर्ट) में ही लागू होगा, उच्च एवं उच्चतम न्यायालयों में नहीं।
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(1) जूरी कोर्ट का प्रस्तावित ड्राफ्ट - <https://www.facebook.com/groups/JuryCourt/permalink/909604579412620/>;
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