> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2020-05-17

Pawan Jury BhilwaraRj

कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा है कि कोरोना आर्थिक संकट से उबरने के लिए केंद्र सरकार को देशभर के धार्मिक ट्रस्टों के पास पड़ा सोना अपने कब्जे में ले लेना चाहिए। क्या आप इस सुझाव से सहमत है?
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(1) मंदिरों के पास जो संपत्ति है, वह उन्हें श्रधालुओ द्वारा दान में मिली है। मंदिर देश या सरकार की संपत्ति नहीं होती है। मंदिर हिन्दू समुदाय की संपत्ति है। मंदिरों को चलाने के लिए सरकार अपने कोष से कोई व्यय नहीं करती। एक चवन्नी भी नहीं।
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तो जब कोई राजनेता कहता है कि मंदिरों की जमीन एवं संपत्ति का अधिग्रहण कर लेना चाहिए तो मैं इसे अधिग्रहण नहीं कहता। मैं इसे लूट कहता हूँ। यह लूट है !! सीधी लूट !!! और मुझे यह कहने में कोई परहेज नहीं कि ऐसा प्रस्ताव देने वाले राजनेता गजनीयों की तर्ज पर व्यवहार कर रहे है !!
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कोई व्यक्ति यदि सरकार को दान देना चाहेगा तो वह प्रधानमन्त्री राहत कोष में सीधे दान भेज सकता है। जाहिर है, जब व्यक्ति किसी मंदिर को दान देना चाहता है तो उसकी मंशा मंदिर को दान देने की होती है, सरकार को नहीं !! और सरकार जब यह दान हस्तगत कर लेती है, तो यह गैर कानूनी भी है, और अनैतिक भी है !!
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वैसे भी भारत एक धर्म निरपेक्ष देश है, और सरकार को यह हक़ किसी भी तरह से नहीं है कि वे किसी धार्मिक संस्था की संपत्ति का हरण करें। यदि सरकार को पैसा चाहिए तो सरकार टेक्स लगा सकती है, दान की अपील जारी कर सकती है, किन्तु हमारी संपत्ति का बलात अधिग्रहण नही कर सकती।
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बहरहाल, पेड मीडिया के प्रायोजक चाहते है कि सभी संपत्ति शाली मंदिरों को लूट लिया जाना चाहिए। और चूंकि चुनाव जीतने एवं अपनी छवि बनाए रखने के लिए हमारे सभी नेता पेड मीडिया पर बुरी तरह से निर्भर करते है अत: भारत की मुख्यधारा की सभी पार्टियों के सभी नेता मंदिरों को लूट लिए जाने के समर्थन में है।
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जब मोदी साहेब मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने भी कई मंदिरों की सम्पतियों का अधिग्रहण किया। कोंग्रेस, सपा, बसपा और आम आदमी पार्टी के नेता भी हमेशा से मंदिरों की संपत्ति का अधिग्रहण किये जाने के समर्थक रहे है, और उन्होंने मंदिरों की संपत्ति लूटने का कोई मौका नहीं गंवाया है !! और आने वाले समय में भी मुख्यधारा में नजर आने वाली पार्टियों के सभी नेता मंदिरों की संपत्ति लूट लेने के प्रयास करते रहेंगे। कोरोना हो या ना हो, मंदिरों की संपत्ति वे छोड़ने वाले नहीं है। वे कोई न कोई बहाना निकालकर मंदिरों को लूटने की योजना सामने रखते रहेंगे।
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(2) यह एक तथ्य है कि मंदिरों में आने वाले दान को ट्रस्टियों द्वारा सही दिशा में खर्च नहीं किया जाता है। मंदिर अपनी संपत्ति का ज्यादातर इस्तेमाल तड़क भड़क, ऐशो आराम एवं अनुत्पादक मदों में करते है। इस समस्या का समाधान हिन्दू बोर्ड की स्थापना है। यदि राष्ट्रिय हिन्दू बोर्ड के प्रस्तावित क़ानून को गेजेट में प्रकाशित कर दिया जाता है तो मंदिरों में -
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(i) वारिसान / उत्तराधिकार परम्परा का अंत हो जाएगा
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(ii) हिन्दू श्रधालुओ को यह अधिकार मिलेगा कि वे ट्रस्टियों को बदल सके
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(iii) सभी मंदिर सरकारी नियंत्रण से मुक्त होकर सीधे श्रधालुओ के नियंत्रण में आ जायेंगे
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उपरोक्त बदलाव आने से ट्रस्टी प्राप्त होने वाले दान को परोपकार के कार्यो में खर्च करने लगेंगे, और दान का उपयोग विलासिता में करने की प्रवृति में कमी आएगी। सिक्ख धर्म में गुरुद्वारों का प्रबंधन इसी तरीके से किया जाता है। गुरूद्वारे SGPC एक्ट द्वारा शाषित होते है, और आम सिक्ख श्रधालुओ को अपने ग्रंथियों (ट्रस्टियों) को चुनने का अधिकार प्राप्त है। और यह एक बड़ी वजह है कि, गुरुद्वारों में प्राप्त दान का इस्तेमाल बेहतर तरीके से किया जाता है।
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हिन्दू कार्यकर्ताओ को यह बात समझनी चाहिए कि, यदि उन्होंने हिन्दू मंदिरों का प्रशासन सुधारने के लिए आवश्यक क़ानून लागू करवाने के लिए प्रयास शुरू नही किये तो पेड मीडिया के प्रायोजक किसी न किसी बहाने से राजनेताओ का इस्तेमाल करके भारत के ज्यादातर मंदिरों को लूट लेंगे। और एक बार यदि मंदिर उजाड़ हो गए तो हिन्दू धर्म का क्षरण बेहद तेजी से होना शुरू होगा।
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किस तरह पेड मीडिया के प्रायोजक मंदिरों को ध्वस्त करने की नीति पर काम कर रहे है, और किस क़ानून को गेजेट में छापकर इस प्रक्रिया को रोका जा सकता है, इस बारे में विस्तृत विवरण मैंने इस जवाब में दिया है – <https://www.facebook.com/groups/JuryCourt/permalink/894058847633860/>;
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