> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2020-02-28

Pawan Jury BhilwaraRj

क्या दिल्ली हिंसा का दोषी कपिल मिश्रा है या कोई और? आपका इस बारे में क्या कहना है?
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सोशल मीडिया एवं पेड मीडिया की फीडिंग के आधार पर इस तरह के जटिल मामले में कोई निर्णायक राय नहीं बनायी जा सकती है। मेरा मानना है कि, पूरी घटना स्क्रिप्टेड थी और पेड मीडिया के प्रायोजको के निर्देश पर पेड मीडिया पार्टियों द्वारा इसे जानबूझकर प्लांट किया गया था। कौनसी पार्टियाँ के कौनसे नेताओ की इसमें किस हद तक भूमिका है, इसका पता लगाने के लिए हमें फेयर ट्रायल की जरूरत है। नागरिको की जूरी बुलाये बिना फेयर ट्रायल होना मुमकिन नहीं है।
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अत: मेरा सुझाव है कि, दिल्ली में हुयी हिंसा के आरोपियों का जूरी ट्रायल हो और यदि जूरी सदस्यों का बहुमत अनुमति देता है तो आरोपियों का सार्वजनिक नारको टेस्ट हो। जूरी ट्रायल एवं सार्वजानिक नार्को टेस्ट द्वारा इस साजिश के सभी किरदार सामने आ जायेंगे।
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प्रस्तावित जूरी कोर्ट दिल्ली नामक क़ानून की धारा 4.4 कहती है कि -
"सभी प्रकार के सार्वजनिक प्रसारण एवं अभिव्यक्तियाँ जिनमें सभी प्रकार के दृश्य, श्रव्य, इलेक्ट्रोनिक आदि माध्यम जैसे - फ़िल्में, टीवी, समाचार पत्र, पुस्तकें, फेसबुक, यू ट्यूब आदि शामिल है -से सम्बंधित सभी प्रकार की शिकायतें एवं आपत्तियां जूरी मंडल के दायरे में आएगी।"
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इसके अलावा हिंसा, मृत्यु, गंभीर चोट कारित करना आदि मामले भी धारा 4.1. के तहत जूरी के दायरे में आते है।
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अत: इन दोनों धाराओं के तहत दिल्ली हिंसा के सभी गिरफ्तार आरोपियों पर मामला दर्ज करके जूरी ट्रायल किया जा सकता है।
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(1) जूरी मंडल का गठन :
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(1.1) जूरी सदस्यों का चयन दिल्ली राज्य की मतदाता सूचियों से लॉटरी द्वारा किया जाएगा
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(1.2) जूरी सदस्यों का आयु वर्ग 25 से 55 वर्ष के बीच होगा
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(1.3) जूरी का आकार 50 से 150 सदस्य होगा
प्रत्येक जूरी सदस्य को प्रति उपस्थिति 600 रू एवं यात्रा भत्ता मिलेगा।
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(2) मामले की सुनवाई :
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(2.1) सुनवाई सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगी। भोजन विराम दोपहर 1 बजे से 2 बजे के बीच शुरू होगा और 1 घंटे तक रहेगा। इसी तरह सुनवाई लगातार प्रत्येक दिन चलेगी।
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(2.2) मामले की सुनवाई न्यूनतम 2 दिन तक चलेगी। तीसरे दिन या उसके बाद यदि जूरी सदस्यों का बहुमत कहता है कि हमने दोनों पक्षों को पर्याप्त सुन लिया है, तो सुनवाई एक दिन और चलेगी। यदि अगले दिन बहुमत कहता है कि उन्हें और सुनना है तो सुनवाई तब तक चलती रहेगी जब तक जूरी का बहुमत सुनवाई ख़त्म करने को नही कहता।
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(2.3) सुनवाई 3 जजों की बेंच की उपस्थिति में होगी। जूरी मंडल एवं जज साथ में मामला सुनेंगे।
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(2.4) सार्वजनिक नारको टेस्ट के मामले में 75% से अधिक जूरी सदस्यों की मंजूरी आवश्यक होगी।
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(3) फैसला :
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अंतिम दिन दोनों पक्ष 1-1 घंटे तक अपना पक्ष रखेंगे। इसके बाद जूरी सदस्य 2 घंटे तक आपस में विचार मंथन करेंगे। यदि 2 घंटे बाद जूरी सदस्य ये निर्णय लेते है की उन्हें और विचार मंथन की आवश्यकता नहीं है, तो जूरी अपना फैसला सार्वजनिक करेगी। जिन धाराओं के तरह आरोपी दोषी पाए गए है उनमें निर्धारित सजाओं के अनुरूप जूरी सदस्य कारावास या आर्थिक दंड का फैसला देंगे।
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(3.1) प्रत्येक जूरी सदस्य अपना फैसला बंद लिफ़ाफ़े में ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर को सौपेंगा। बहुमत द्वारा अनुमोदित निर्णय को जूरी का फैसला फैसला माना जाएगा।
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(3.2) जूरी मंडल जो भी अंतिम फैसला देंगे उसे ट्रायल के पदासीन जज द्वारा अनुमोदित किया जाएगा। यदि जज चाहे तो जूरी के फैसले में संशोधन कर सकता है, या फैसले को पूरी तरह से पलट सकता है।
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(3.3) जज जब भी अपना फैसला लिखेगा तब वह सबसे पहले जूरी के फैसले को उद्धत करेगा। सरकारी दस्तावेजो, बुलेटिन एवं अन्य सभी जगह जहाँ पर भी फैसले को दर्ज / उद्धत किया जाएगा , वहां पर अनिवार्य रूप से सबसे पहले जूरी द्वारा दिए गए फैसले का जिक्र किया जाएगा।
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ऊपर दी गयी प्रक्रिया को गेजेट में छापकर पीएम दिल्ली हिंसा का षड्यंत्र रचने वालो का जूरी ट्रायल एवं सार्वजानिक नार्को टेस्ट* का आदेश जारी कर सकते है।
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[ कृपया ध्यान दें कि यहाँ आशय सार्वजनिक नार्को टेस्ट से है, सिर्फ नारको टेस्ट से नहीं ]
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(4) जूरी ट्रायल को लेकर पेड मीडिया का स्टेंड :
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पेड मीडिया के प्रायोजक भारत में जूरी ट्रायल एवं सार्वजानिक नारको टेस्ट का कानून लाने के सख्त खिलाफ है। अत: भारत की सभी पेड मीडिया पार्टियाँ एवं उनके नेता भी दिल्ली में हुयी हिंसा के आरोपियों का जूरी ट्रायल करने के खिलाफ है !!
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(4.1) PMP01* एवं PMP03 के नेताओ एवं कार्यकर्ताओ का कहना है कि -- दंगो की साजिश PMP02 ने रची थी। लेकिन जब PMP01 एवं PMP03 के नेताओं से पुछा जा रहा है कि PMP02 के नेता कपिल मिश्रा का जूरी ट्रायल एवं नार्को टेस्ट होना चाहिए या नहीं, तो वे इनकार कर रहे है !! उनका कहना है कि सुनवाई तो जज ही करेगा, चाहे जो जाए।
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(4.2) इसी तरह PMP02 के नेताओ एवं कार्यकर्ताओ का आरोप है कि – दंगो की साजिश PMP03 के नेता ताहिर हुसैन ने की है। लेकिन जब आप उनसे पूछेंगे कि ताहिर का सार्वजनिक रूप से नार्को टेस्ट लिया जाना चाहिए कि या नहीं, तो PMP02 के नेता भी मना कर रहे है !! उनका भी यही कहना है कि सुनवाई तो जज ही करेगा !!
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(4.3) इस बारे में आपको सोशल मीडिया पर भी विभिन्न बुद्धिजीवियों के अलग अलग स्टेंड/ राय / विचार आदि देखने को मिलेंगे। लेकिन घूम फिर कर सभी बुद्धिजीवी यही बात कहेंगे कि – सुनवाई तो जज ही करेगा, और जूरी ट्रायल किसी भी सूरत में नहीं होना चाहिए !!
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(*) PMP - पेड मीडिया पार्टी, PMP01 – कोंग्रेस, PMP02 – संघ=बीजेपी, PMP03 – आम आदमी पार्टी, PMP10 – AIMIM )
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(5) जरुरी बात : निचे दिया गया हिस्सा बुद्धिजीवियों के लिए नहीं है। बुद्धिजीवी वर्ग इस हिस्से की स्पष्ट रूप से अवहेलना करें। किन्तु यदि आप दिल्ली के निवासी है और पिछले हफ्ते भर में निचे दी गयी परिस्थिति से गुजरे है तो यह भाग आपके काम का है :
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(5.1) यदि इन दंगो में आपकी संपत्ति चपेट में आई है, और यह घाटा सहना आपके बूते से बाहर है,
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(5.2) यदि हिंसा शुरू होने के बाद आप दहशत में थे, और निरंतर पुलिस के आने को मना रहे थे,
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(5.3) यदि आपने यह नोट किया कि, हिंसा इसीलिए हुयी क्योंकि पुलिस हर जगह मौजूद नहीं थी,
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(5.4) यदि आपने इस हिंसा में अपने परिवार के किसी सदस्य को खो दिया है
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(5.5) यदि आपने नोटिस किया कि दंगाई आम नागरिको की तुलना में बेहद कम संख्या में थे, किन्तु हथियारबंद होने के कारण वे डोमिनेट कर रहे थे,
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(5.6) यदि आपने खुद को उपरोक्त परिस्थिति में पाया था तो आपको यह बात समझने की कोशिश करनी चाहिए कि हथियारबंद नागरिक समाज की रचना क्यों जरुरी है।
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इस बात पर विचार करें कि यदि दिल्ली में दंगाईयो को 1000 AK-47 पहुँचा दी जाती है, तो आप इससे कैसे निपटेंगे !! और इस बात पर भी ध्यान दें कि यदि “वे” 1000 AK-47 भेजना तय करते है तो क्या अब उन्हें ऐसे 1000 लोग दिल्ली में मिल जायेंगे।
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मेरा मानना है कि आज से 6 साल पहले ऐसे 1000 लोग दिल्ली में मौजूद नहीं थे। लेकिन पेड मीडिया ने अपने कठपुतली नेताओं की सहायता से अब स्थिति बदल दी है !! पेड मीडिया पार्टियों ने ये हालात बनाने में वाकयी काफी मेहनत की है !! अभी तो यह शुरुआत है। और क्या होगा जब अमेरिकी-ब्रिटिश धनिक दिल्ली-मुंबई-हैदराबाद जैसे शहरो में कट्टरपंथियों को बड़े पैमाने पर हथियार (AK-47) भेजने लगेंगे !! मैं अपने कई जवाबो में लिख चुका हूँ कि अमेरिकी-ब्रिटिश धनिक भारत में दशको तक चलने वाले हिन्दू-मुस्लिम सिविल वॉर की जमीन तैयार कर रहे है। अभी यह शुरूआत है।
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