> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2020-02-10

Pawan Jury BhilwaraRj

प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के पास गेजेट में इबारतें छापने की विशिष्ट शक्ति होती है। और वे बहुधा वे ऐसी इबारतें छापने में अपना वक्त जाया करना पंसद नहीं करते जिससे लाभ न हो। चूंकी भारत के ज्यादातर कार्यकर्ताओ को पेड मीडिया द्वारा नेताओं के बयानों, भाषणों एवं विचारधाराओ की जुगाली करने के लिए सधाया गया है अत: वे इस विषय में रुचि नहीं लेते कि पीएम गेजेट में क्या और क्यों छाप रहा है। अत: भारत के बहुधा नागरिक इस प्रकार के भ्रष्टाचार से परिचित ही नहीं है। हाल ही छापे गये एक क़ानून का उदाहरण देखिये
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(i) 17 जनवरी 2020 को मोदी साहेब ने गेजेट में छापा कि –
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"In exercise of the powers conferred by Explanation 1 to section 44A of the Code of Civil Procedure, 1908 (5 of 1908), the Central Government hereby declares, United Arab Emirates to be a reciprocating territory for the purposes of the said section..."
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"नागरिक प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) की धारा 1 के खंड 44A द्वारा प्रदत्त शक्तियों के तहत केंद्र सरकार निर्धारित करती है कि संयुक्त अरब अमीरात उक्त धारा के प्रयोजनों के लिए एक पारस्परिक क्षेत्र है..।"
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<https://indianexpress.com/article/explained/dubai-reciprocating-territory-india-6226390/?fbclid=IwAR0hsnhVqrCN_McG2zLQUt5QQYjRjKVzWUXIIo-ifyY9dct5FZpLUKNrtv4>;
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(ii) इस इबारत का क्या आशय है ?
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अब तक यूएई में यदि कोई व्यक्ति / कम्पनी किसी भारतीय व्यक्ति या भारतीय कम्पनी के विरुद्ध अदालत में वाद दायर करता है, और यूएई कोर्ट भारतीय व्यक्ति की संपत्ति को जब्त करने का आदेश जारी करता है, तो अभी तक यूएई कोर्ट के ये आदेश सिर्फ यूएई तक ही लागू हो सकते थे, भारतीय सीमा में नहीं।
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लेकिन मोदी साहेब द्वारा छापा गया यह क़ानून कहता है कि, अब यूएई कोर्ट एनआरआई या गैर-एनआरआई या भारतीय व्यक्ति की भारत में स्थित संपत्ति को जब्त करने के आदेश भी जारी कर सकेगी !! वहां की अदालत जो फैसला देगी वे यहाँ पर सीधे लागू होंगे। दुबई से आदेश लाकर यहाँ की अदालत में जमा कर दीजिये। और यहाँ की अदालत संपत्ति जब्त करने के आदेश निकाल देगी !!
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(iii) इसमें संभावित भ्रष्टाचार क्या है ?
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कायदा यह है कि इस तरह का क़ानून उस दिन से प्रभावी होना चाहिए जिस दिन से यह क़ानून लागू हुआ है। क्योंकि आज से 10 साल पहले यदि दुबई के किसी बैंक ने भारत के किसी व्यक्ति या फर्म को लोन दिया था तो अमुक बैंक यह जानता था कि यदि व्यक्ति को कारोबार में घाटा होता है तो बैंक का पैसा डूब जाएगा, और बैंक अमुक व्यक्ति की सिर्फ उतनी ही संपत्ति पर दावा कर सकेगा, जितनी संपत्ति UAE में स्थित है।
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किन्तु मोदी साहेब ने यह क़ानून भूतलक्षी प्रभाव ( Retrospectively) के साथ लागू किया है !! मतलब आज से 20 साल पहले तक भी जितना पैसा UAE के बैंको का डूब चुका था वह सारा पैसा मोदी साहेब की इस इबारत ने जिन्दा कर दिया है !! पेड इकोनॉमिक टाइम्स ने रिपोर्ट किया है कि UAE के लगभग आधा दर्जन बैंक भारत के डिफाल्टर्स से 50,000 करोड़ की वसूली की तयारी में लग गए है !!
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<https://economictimes.indiatimes.com/industry/banking/finance/banking/uae-banks-headed-for-india-to-recover-rs-50000-crore/articleshow/74019520.cms?fbclid=IwAR2EDVyZus2o9C3-z0dvV8dkRzbwMoQlSYus1Ad7eus9JMiymBF6SCjgcxM&from=mdr>;
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डिफाल्टर्स की इस सूची में भारतीय फर्म्स, कम्पनियां एवं व्यक्तिगत ऋण भी शामिल है। जिन लोगो का दुबई से सरोकार है वे इस बात से परिचित होंगे कि यहाँ से जाने वाले कई लोग वहां पर पर्सनल या बिजनेस लोन ले लेते है। इसमें वे लोन भी होते है जो बैंक अधिकारीयों की मिली भगत से लिए जाते है, और लोन लेने वाला भी जानता है कि, लोन मुझे देना नहीं है।
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उदाहरण के लिए मान लीजिये कि, X दुबई में पैसा कमाने के लिए 2 साल के वीजा पर जाता है और कोई लेबर वर्क करता है। तो वहां पर पहले से रह रहा व्यक्ति उसके नाम पर 1 करोड़ का लोन दिलाने की सेटिंग करेगा। इसमें से 90 लाख रू बैंक अधिकारी एवं स्थानीय मांडवाल रख लेंगे और 10 लाख X को देंगे। फिर ये लोग X को भारत रवाना कर देंगे। इस तरह से लोन लेकर भारत आ जाने वाले भारतीयों की संख्या हजारों में है।
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इसी तरह कई लोग वहां पर पैसा लगाकर धंधा शुरू करते है, और फिर काम बढाने के लिए लोन ले लेते है। और यदि उन्हें घाटा हो जाता है तो सब छोड़ छाड़ कर वापिस भारत आ जाते है। कई कोरबार पार्टनरशिप फर्म के रूप में होते है, यदि एक फर्म उड़ जाती है, तो गारंटर फर्म भी काम समेट कर निकल जाती है। UAE की बैंको का ये सारा पैसा अब खड़ा हो चुका है। पहले बैंक नोटिस भेजना शुरू करेंगे और फिर कुर्की के आदेश !!
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(iv) यदि 20,000 करोड़ की भी वसूली हो जाती है, तो बैंकिंग कम्पनियों के लिए यह शुद्ध मुनाफा होगा !! यह मुनाफा उन्हें मोदी साहेब की सिर्फ 3 लाइनों की इबारत ने बनाकर दिया है !! यह अनुमान लगाने की बात है कि मोदी साहेब ने यह इबारत छापने के लिए क्या लिया होगा।
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मेरा अनुमान है कि, मोदी साहेब ने इसके लिए कम से कम 2% ( 20,000*2% ) यानी 400 करोड़ का मीडिया कवरेज* चार्ज किया होगा। मेरा अनुमान गलत भी हो सकता है। आप अपना अनुमान लगाने के लिए स्वतन्त्र है।
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(*) मेरा मानना है कि श्री अरविन्द केजरीवाल की तरह मोदी साहेब भी नकदी कभी नहीं लेते है। हालांकि कोंग्रेस के ज्यादातर नेता सीधे नकदी लेने में ही मानते है। मोदी साहेब जो भी क़ानून छापते है उसके एवज में सीधे मीडिया चैनल्स को भुगतान करने के लिए कह देते है। अभ्यर्थी पेड मीडिया को भुगतान कर देता है, और पेड मीडिया अमुक राशि के बराबर उन्हें सकारत्मक फुटेज दे देता है। उनकी रैली का निर्बाध प्रसारण वगेरह।
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यदि कोई व्यक्ति अपना सारा राजनैतिक ज्ञान पेड मीडिया के माध्यम से नहीं ले रहा हो तो यह बात समझ सकता है कि UAE के लिए मोदी साहेब ने ऐसा क़ानून छापा है जो दुबई के धनिकों को अतिरिक्त फायदा पहुंचाता है, और इसके एवज में हजारो भारतीयों को कोर्ट कचहरी, कुर्की, जब्ती आदि का सामना करना पड़ेगा। सिर्फ एक जीनियस ही बता सकता है कि दुबई में रहने वाले धन कुबेरों को फायदा पहुँचाने के लिए भारतीयों पर जाया तौर पर वजन क्यों डाला गया है। यदि मामला भारत का हो तब भी बात समझ आती है। दुबई के धनिक यदि अपना पैसा गँवा चुके है तो हम क्यों अपने नागरिको को इनके हवाले कर रहे है ? वो भी भूतलक्षी प्रभाव के साथ।
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हमें नहीं पता कि इनमे से कितने लोगो की आर्थिक स्थिति कितनी टूटी हुयी है। कोई आदमी चलकर दुबई में फ्रोड करने नहीं जाता है, और न ही वहां से ऐसे भागकर आता है। हालात बिगड़ जाते है, व्यक्ति को घाटा हो जाता है। अब ये वसूली भारत में फिर से उनका पीछा करना शुरू करेगी। ऐसे में किसी के पास सिर्फ एक घर है तो कोर्ट के आदेश से वह घर जब्त हो जाएगा, और नीलामी होगी !! और ऐसे कितने लोगो के नाम पर वारंट निकलेंगे, और उन्हें भागना पड़ेगा, हमें कोई अंदाजा नहीं !!
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मेरे मानने में इस क़ानून को भूतलक्षी प्रभाव से छापने की अन्य कोई वजह नहीं है। क्योंकि इससे भारत को एवं भारत के किसी भी नागरिक को किसी भी तरह का फायदा नहीं है। यह क़ानून छपवाने के लिए UAE के बैंक मालिक काफी समय से लोबिंग कर रहे थे। कोंग्रेस ने कोशिश भी की थी, परन्तु "दुबई जैसे" देश के बैंको को भारत में इतना बड़ा जैकपॉट देने की वे हिम्मत नहीं जुटा पाए।