Pawan Jury BhilwaraRj
दिल्ली में सरकारी स्कूल के 73% छात्रों ने कक्षा 10 में बेसिक गणित को चुना है।
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बेसिक गणित मतलब -- अपना नाम लिखो और पास हो जाओ !!!
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<https://indianexpress.com/article/education/73-of-class-x-students-in-delhi-govt-schools-opt-for-basic-maths-6160721/lite/?fbclid=IwAR3yUOyjZTWA13xIdLCMGpAsAbLzDLkTxkKD8fbdEGeLVnYgTzZ9E6F5xVU>
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मानक गणित लेने पर गणित के सवाल हल करके पर्चा पास करना पड़ता है !!
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तो भारत और दिल्ली में गणित विज्ञान शिक्षा की गुणवत्ता गिर रही है , गिर रही है और अरविन्द केजरीवाल के कार्यकाल में यह और भी तेजी से गिर रही है !!
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और जो लोग दावा करते हैं कि महात्मा अरविंद गांधी और आपा कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में गणित शिक्षा में काफी सुधार कर दिया है, मेरे हिसाब से वे सभी जीनियस है !!!
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अगर दिल्ली स्कूल गणित शिक्षा में विशाल सुधार हुआ तो इतने सारे छात्र बेसिक गणित क्यों ले रहे हैं?
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असल में पिछले पांच वर्षों में दिल्ली सरकारी स्कूलों में गणित-शिक्षा में कोई सुधार नहीं हुआ है। बल्कि स्थिति और भी बदतर हो गयी है। लेकिन यह नजर इसीलिए नहीं आता क्योंकि उन्होंने स्कूल के फर्श और इमारतों को चमका दिया है !! लेकिन इस शोशे के आड़ में वे गणित-विज्ञान की शिक्षा को तोड़ रहे है। जो कि अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों का एजेंडा है।
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समाधान ?
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मेरा प्रस्ताव जिला शिक्षा अधिकारी को वोट वापसी पासबुक के दायरे में लाये बिना गणित-विज्ञान की शिक्षा सुधारना संभव नहीं है। और गणित विज्ञान की शिक्षा के बिना सारी पढ़ाई लिखाई कमतर और अनुत्पादक नस्ल का उत्पादन करेगी।
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