Pawan Jury BhilwaraRj
वाराणसी में तेज बहादुर यादव मोदी साहेब के खिलाफ सपा की तरफ से चुनाव लड़ रहे है। चूंकि वे भ्रष्ट लोगो का साथ लेकर भ्रष्ट लोगो के खिलाफ लड़ रहे है, अत: भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई से उनका कोई लेना देना नहीं है। खेद का विषय है कि समयाभाव एवं कार्यो का आधिक्य होने के कारण राईट टू रिकॉल पार्टी के कार्यकर्ता उनसे संपर्क नहीं कर पाए। यदि हम उन्हें राईट टू रिकॉल पार्टी की और से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव देते और वे इसे ख़ारिज कर देते तो यह बात स्पष्ट रूप से निकलकर सामने आती कि उनकी मंशा भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने की नहीं बल्कि ऊँचा मुकाम हासिल करने की है। पर चूंकि हमारी पार्टी उतनी बड़ी नहीं है और उस पर भी यह नयी भी है अत: यह सम्भावना है कि उन्हें हमारे एजेंडे के बारे में जानकारी न रही हो।
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तब भी मेरा मानना है कि यदि उनकी नियत भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने की थी तो उन्हें निर्दलीय ही चुनाव लड़ना चाहिए था, न कि सपा से। जब आप किसी जहाज में सवार हो जाते है तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपकी नियत किस गंतव्य तक पहुँचने की है, क्योंकि व्यवहारिक रूप से आप उसी तरफ जायेंगे जिधर जहाज जाएगा। सपा का जहाज किस दिशा में जाता है, और किस नियत के लोग इस जहाज में सवार होते है, यह लिखने की जरूरत नहीं है।
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बहरहाल, मैं तेज बहादुर यादव की उम्मीदवारी का समर्थन सिर्फ इसीलिए नहीं कर सकता कि वे फ़ौज में रहे है। सपा में जाने के बाद उनमे और अन्य भ्रष्ट उम्मीदवारों में कोई फर्क नहीं।
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