Pawan Jury BhilwaraRj
गाँवो में अभी तक टीवी एवं अख़बार का प्रसार व्यापक रूप से नहीं हुआ है, और इसीलिए ग्रामीणों की समझ शहरियों की तुलना में ज्यादा बेहतर बनी हुयी है। उनकी सोच ज्यादा खुली हुयी है। सिर्फ 2-3 मिनिट में वे यह बात खुद से समझ जाते है कि राईट टू रिकॉल आना चाहिए। उन्हें आगे समझाने की जरूरत नहीं होती, सिर्फ बताना काफी होता है। मतलब कहने को कुछ रह नहीं जाता।
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सुन कर ज्यादातर यही कहते है कि कोई भी पार्टी जीते या हारे पर यह कानून आना चाहिए !! इतनी सी बात टीवी-अख़बार से फीडिंग लेने वाले पढ़े लिखे शहरियों को समझाने में महीनो लग जाते है, और कभी कभी तो बरसों तक उन्हें यह बात समझ नहीं आती !!
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गाँवों में अभी भी गेदरिंग मौजूद है, जबकि टीवी ने शहरो में इसे पूरी तरह से तोड़ कर रख दिया है।
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आसींद एवं मांडल विधानसभा क्षेत्र में चुनाव प्रचार के कुछ दृश्य :
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