Pawan Jury BhilwaraRj
साध्वी प्रज्ञा ; 8 वर्ष जेल में रही। कोई फैसला नहीं। और ऐसे कितने ही लोग सुस्त एवं भ्रष्ट अदालतों में फंसे हुए है। कितने ही वर्षो से।
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तो बीजेपी=संघ ने पिछले 5 सालो में अदालतों को सुधारने के लिए कितने और कौनसे क़ानून पास किये है ? शून्य !!
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उन्हें अदालतें सुधारने की फ़िक्र नहीं है। उनका सारा ध्यान और जोर इस बात पर पर है कि साध्वी प्रज्ञा पर हुए अत्याचार की मार्मिक कहानी सुनाकर हिन्दुओ का खून गरम किया जाए और इससे वोट खींचे जाए !! और जो लोग साध्वी प्रज्ञा से सहानूभूति दर्शा रहे है उनमे से कितने लोगो ने अदालतों को सुधारने के कानूनों की मांग की है ? शून्य !!
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यदि जूरी सिस्टम होता था तो गिरफ़्तारी के हफ्ते भर में जूरी इस मामले की सुनवाई करती और फैसला आ जाता। जूरी सिस्टम न होने के कारण उन्हें इतनी पीड़ा सहनी पड़ी। और आज भी बीजेपी=संघ के मेनिफेस्टो में से अदालतें सुधारने का मुद्दा गायब है !! और यही स्थिति कांग्रेस की भी है।
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भीलवाड़ा लोकसभा से मैं एक मात्र उम्मीदवार हूँ जिसने अदालतें सुधारने के आवश्यक क़ानून ड्राफ्ट्स को अपने प्राथमिक एजेंडे में शामिल किया है। मेरा प्रस्ताव है कि राइट टू रिकॉल जज एवं जूरी सिस्टम कानूनों को गैजेट में प्रकाशित किया जाए। मैंने इसके लिए लिखित में ड्राफ्ट भी दिया है। प्रस्तावित जूरी सिस्टम ड्राफ्ट का सारांश निचे दिया गया है :
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प्रस्तावित जूरी सिस्टम क्या है ?
यह कानून पारित होने के बाद भ्रष्टाचार, हत्या, अपहरण, बलात्कार, मारपीट जैसे मामलो की सुनवाई करने और सजा सुनाने का अधिकार जज की जगह नागरिको की जूरी के पास रहेगा। जूरी का चयन जिले की मतदाता सूचियों में से लॉटरी द्वारा किया जाएगा। जूरी सदस्यों का आयु वर्ग 25 से 55 वर्ष के बीच होगा व जूरी मंडल में 15 से 1500 तक जूरी सदस्य हो सकेंगे। यह जूरी मुकदमा सुनेगी और फैसला देगी। प्रत्येक मुकदमे की सुनवाई के लिए अलग जूरी होगी। जूरी सिस्टम ड्राफ्ट का सारांश निचे दिया गया है :
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1. यदि आपका नाम वोटर लिस्ट में है तो यह कानून लागू होने पर आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। जूरी ड्यूटी में आपको आरोपी, पीड़ित, गवाहों और दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा प्रस्तुत तथ्य और बहस सुननी होगी और सजा या रिहाई तय करनी होगी।
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2. प्रत्येक जिले में एक जूरी प्रशासक होगा, जिसकी नियुक्ति मुख्यमंत्री करेंगे। राईट टू रिकॉल प्रक्रिया का प्रयोग करके मतदाता उसे किसी भी दिन बदल सकेंगे। जूरी प्रशासक जिले की मतदाता सूची में से 30 सदस्यीय महाजूरी मंडल की नियुक्ति करेगा। इनमे से हर 10 दिन में 10 सदस्य सेवानिवृत होंगे और नए 10 सदस्यो का चयन मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा कर लिया जाएगा। इस तरह यह महाजूरी मंडल निरंतर काम करता रहेगा। महाजूरी मंडल के सदस्य को प्रति उपस्थिति 500 रूपये एवं यात्रा व्यय मिलेगा।
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3. कोई भी वादी अपने मामले की शिकायत महाजूरी मंडल के सदस्यों को लिख कर दे सकते है। यदि महाजूरी मंडल मामले को निराधार पाते है तो शिकायत खारिज कर सकते है, अथवा इस मामले की सुनवाई के लिए एक नए जूरी मंडल के गठन का आदेश दे सकते है।
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4. मामले की जटिलता एवं आरोपी की हैसियत के अनुसार महाजूरी मंडल तय करेगा कि 15-1500 के बीच कितने सदस्यों की जूरी बुलाई जानी चाहिए। तब जूरी प्रशासक मतदाता सूची से लॉटरी द्वारा सदस्यों का चयन करते हुए जूरी मंडल का गठन करेगा और मामला इन्हें सौंप देगा। यह जूरी 11 बजे से 4 बजे तक इस मुकदमे की नियमित सुनवाई करेगी।
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5. यह जूरी मंडल दोनों पक्षों एवं गवाहों को सुनकर इस मामले में फैसला देगा। प्रत्येक जूरी सदस्य अपना फैसला बंद लिफ़ाफ़े में लिखकर ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर को देंगे, और दो तिहाई सदस्यों द्वारा मंजूर किये गये निर्णय को जूरी का फैसला माना जाएगा। किन्तु मृत्यु दंड में 75% सदस्यों का अनुमोदन आवश्यक होगा। प्रत्येक मामले की सुनवाई के लिए अलग से जूरी मंडल होगा। पक्षकार जूरी मंडल के फैसले की अपील हायर जूरी में कर सकते है। हायर जूरी में 50 से कम सदस्य नही होंगे और इनका चयन राज्य भर की वोटर लिस्ट से होगा।
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यदि आप भारत में जूरी सिस्टम लाना चाहते है तो है तो @pmoindia पर यह ट्विट करें : प्रधानमंत्री जी, कृपया इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करें – rtrp.in/JurySys3 ,#JurySys3
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नाम : पवन कुमार शर्मा
पार्टी : राईट टू रिकॉल पार्टी
चुनाव चिन्ह : प्रेशर कुकर
ईवीएम पर मेरा नंबर : 4
मतदान की तारीख : 29 अप्रेल
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