Pawan Jury BhilwaraRj
एयर स्ट्राइक पर मोदी साहेब ने कुछ तथ्यों पर खामोशी अख्तियार करके रखी है और इस वजह से एक तरफ पेड मीडिया धुंध फैला पा रहा है, और दूसरी तरफ भारतीय वायु सेना की प्रतिष्ठा धूमिल हो रही है !!
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भारतीय विदेश मंत्रालय का अधिकृत पक्ष : "हमने कल रात बालाकोट में जैश ए मुहम्मद के सबसे बड़े आतंकी कैम्प पर एयर स्ट्राइक की।"
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भारत सरकार का यह वर्जन एकदम ठीक और अधिकृत है। ( हालांकि यह विवरण अस्पष्ट है। अस्पष्टता का विवरण मैंने निचे दिया है )
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विपक्षी दल ने आतंकियों की संख्या पूछी, जिसकी प्रतिक्रिया में वायुसेना ने कहा : "हमारा काम आतंकियों की संख्या गिनना नहीं है। हमें जो निशाना दिया गया उसे हमने ध्वस्त कर दिया।"
वायु सेना का यह बयान भी एकदम ठीक एवं युक्तियुक्त है। वायुसेना को केंद्र सरकार से जो लोकेशन "दी" गयी थी, वायु सेना ने उस लोकेशन पर धमाके कर दिए। सेना का काम सरकार के निर्देशों का पालन करना है, उन्हें यह नहीं कहा जाता कि आप यह भी पता लगाकर आना कि हमले में कितने आतंकी मारे गए।
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पाकिस्तान सरकार का अधिकृत बयान : "भारतीय वायुसेना ने बालाकोट में धमाके किये।" ( पाकिस्तान के बयान में से शब्द "जैश ए मोहम्मद का कैम्प" गायब है !! )
तो यहाँ भारतीय वायु सेना द्वारा बालाकोट में धमाके किये जाने की पुष्टि स्वयं पाकिस्तान सरकार कर रही है। अत: यह बात यहीं पर साफ़ हो जाती है कि वायुसेना ने बालाकोट में धमाके किये है।
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अंतर्राष्ट्रीय पेड मीडिया का वर्जन : हमले के अगले दिन पेड रायटर्स, पेड वाशिंगटन, पेड गार्जियन, पेड अल जजीरा को शामिल करते हुए दुनिया भर के सभी मीडिया हाउस ने यह रिपोर्ट किया कि - "भारत सरकार ने पाकिस्तान के बालाकोट में धमाके किये है। किन्तु क्या यह धमाके जैश के कैम्प पर किये गए है, इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। भारत सरकार ने वायुसेना द्वारा किये गए हमले की लोकेशन और अन्य विवरण जारी नहीं किये है। हम और विवरणों की प्रतीक्षा कर रहे है।"
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तो अंतर्राष्ट्रीय पेड मीडिया , भारत सरकार एवं पाकिस्तान सरकार इस बात पर सहमत है कि भारत के विमानों ने बालाकोट में धमाके किये।
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लेकिन इस बिंदु को लेकर अस्पष्टता है कि, बम बालाकोट में किस जगह गिराए गए।
(1) पाकिस्तान ने एक खाली मैदान की तस्वीरें जारी करके कहा कि, ये उस जगह की तस्वीरें है जहाँ बम गिराए गए थे।
पाकिस्तान की तस्वीरों पर भरोसा नहीं किया जा सकता। क्योंकि पाकिस्तान द्वारा जारी की गयी तस्वीरें वेरिफायेबल नहीं है। इन तस्वीरों का कोई महत्त्व नही। हो सकता है पाकिस्तान ने बालाकोट के आस पास किसी मैदान पर खुद ही 4 बम गिराकर खड्डे कर दिए हो, और भारत का दावा कमजोर करने के लिए तस्वीरें जारी कर दी हो।
(2) और 2-3 दिन बाद दुनिया भर की सभी अंतर्राष्ट्रीय समाचार एजेंसियों ने यह रिपोर्ट करना शुरू किया कि :
"भारतीय वायु सेना द्वारा किये गए धमाके बालाकोट से कुछ हटकर एक खाली मैदान पर किये गए थे, और इनका उद्देश्य केवल भारतीयों के लोगो का गुस्सा शांत करना था।"
पेड मीडिया ने यह भी रिपोर्ट किया कि : "स्ट्राइक चुनावी उद्देश्यों को लेकर की गयी थी, एवं स्ट्राइक के दौरान यह सावधानी रखी गयी कि कोई जन हानि न हो।"
मैं दुनिया के किसी पेड मीडिया हाउस का विश्वास नहीं करता। इनको जो जितना पैसा देता है, ये उस हिसाब से ख़बरें छापते रहते है। तो ये सभी मीडिया हॉउस भी पेड है, और हमें इन पर विश्वास नहीं करना चाहिए। मैं मीडिया द्वारा रिपोर्ट की गयी सिर्फ उस खबर पर भरोसा करता हूँ जिसे स्वतंत्र स्त्रोत द्वारा वेरीफाई किया जा सके।
उदाहरण के लिए यदि मीडिया रिपोर्ट करता है कि कुतुबमीनार गिर गया है, तो इसे वेरीफाई किया जा सकता है। लेकिन ज्यादातर पेड मीडिया ऐसे मामले पर झूठ नहीं बोलता जिसे स्वतंत्र स्त्रोत द्वारा वेरीफाई किया जा सके। यदि पेड मीडिया वैरिफायेबल फेक्ट के साथ छेड़छाड़ करेगा तो एक्सपोज हो जाएगा। इसीलिए पेड मीडिया झूठ परोसने के लिए अनवैरिफायेबल तथ्यों का प्रसारण करता है। आम नागरिक इस महत्तवपूर्ण अंतर को समझ नहीं पाता एवं पेड मीडिया की चपेट में आ जाता है।
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रायटर्स द्वारा जैश के कैम्प की सेटेलाईट तस्वीरें जारी करना
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इस पूरे मामले में निर्णायक मोड़ तब आया, जब रायटर्स ने बालाकोट स्थित जैश के कैम्प की सेटेलाईट तस्वीरें जारी कर दी !! उल्लेखनीय है कि सेटेलाईट तस्वीरें स्वतंत्र स्त्रोत द्वारा वेरिफाई की जा सकती है।
सेटेलाईट तस्वीरों में अक्षांश, देशांतर, दिशा, आकार स्थिति आदि सभी कुछ होते है। इन अक्षांश एवं देशान्तरो को चिन्हित करके कोई भी देश या निजी सेटेलाईट एजेंसी इनकी पुष्टि कर सकती है।
इसे इस तरह से समझे कि जैश ए मुहम्मद यह दावा करता है कि उसने पोकरण स्थित भारत के एक मिलिट्री कैम्प को उड़ा दिया है। अब यदि भारत सरकार इसकी पुष्टि कर देती है कि हाँ इस मिलिट्री कैम्प को उड़ा दिया गया है, तो यह दावा क्रॉस वेरीफाई हो जाएगा। क्रोस वेरीफाई होने के बाद इसे कोई चुनौती नहीं देगा। और यदि कोई चुनौती देता भी है तो उसे प्रथम दृष्टया खारिज कर दिया जाएगा।
किन्तु यदि भारत सरकार जैश के दावे को ख़ारिज कर देती है, और जैश यह नही बताता कि पोकरण में जिस मिलिट्री कैम्प को उन्होंने निशाना बनाया है उसके अक्षांश, देशांतर, दिशा निर्देश और स्थिति क्या है, तो अब यह एक अस्पष्ट दावा है। मतलब इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती कि, मिलिट्री कैम्प वाकई जैश द्वारा उड़ा दिया गया है या नहीं।
किन्तु यदि जैश इसकी दिशा, स्थिति, अक्षांश एवं देशान्तर आदि जारी कर देता है, तो दुनिया भर में कोई भी देश या निजी सेटेलाईट एजेंसी अपने सेटेलाईट से अमुक अक्षांश एवं देशांतर की तस्वीरें निकाल कर इसकी पुष्टि कर सकता है।
मैं इसे और भी स्पष्ट करता हूँ - मान लीजिये कि पाकिस्तान यह दावा करता है कि उन्होंने ताजमहल उड़ा दिया है, और भारत इसे खारिज कर देता है। तो अमेरिका या रूस किसका दावा मानेगा ? क्या वे अपने राजदूत से कहेंगे कि आगरा जाओ और तस्वीरें निकाल कर भेजो !! नहीं। वे ताजमहल के अक्षांश एवं देशांतर पर सेटेलाईट ले जाकर तस्वीरें चेक करेंगे, और उन्हें मालूम हो जायेगा कि ताजमहल गिरा दिया गया है, या वहीँ खड़ा है।
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उदाहरण के लिए, उड़ी में भारत के 22 जवान शहीद हुए। जैश ने इस हमले की जिम्मदारी ली और भारत ने भी पुष्टि की कि हाँ इस हमले में हमारे 22 जवान शहीद हुए है।
फिर हमारे 44 जवान शहीद हुए , जैश ने हमले की जिम्मेदारी ली और भारत सरकार ने पुष्टि की कि , हाँ इस हमले में हमारे 44 जवान शहीद हुए है।
पुष्टि किये गए इन तथ्यों का जैश के लिए महत्त्व इसीलिए होता है, क्योंकि यदि शहीद हुए जवानो की पुष्टि ढंग से नहीं हो पायी तो जिसने भी इस हमले के लिए एडवांस पेमेंट की थी ( इसके लिए फंडिंग सऊदी अरब या अमेरिका की और से आती है ) वे अब बाकी का भुगतान नही करेंगे। अमूमन पेमेंट शहीद हुए जवानो की संख्या के आधार पर की जाती है। शहीद हुए जवानो की संख्या जितनी बढ़ेगी पेमेंट भी उतना ही मिलेगा, और अगले हमले के लिए तैयारी अच्छी बनेगी।
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मतलब सिर्फ हमला ही काफी नहीं होता है। इतना बड़ा कैम्प चलाने के लिए जिन संसाधनों की जरूरत होती है उसके लिए हमले की जिम्मेदारी भी लेनी होती है, और शहीदों की संख्या के रूप से संख्या भी दिखानी होती है। फिर जितना ये तस्वीरें सर्कुलेट होगी जैश को उतने ज्यादा युवाओं के रूप में रिक्रूटमेंट भी मिलेंगे। मतलब, इन संगठनो को भी कम्पीटीशन फेस करना पड़ता है। जो ज्यादा सफल होगा, उसे उतनी ज्यादा पहचान और फंडिंग मिलेगी।
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भारतीय सरकार ने अपनी प्रेस रिलीज में बालाकोट और जैश ए मुहम्मद के कैम्प का नाम लिया है। कृपया भारत के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान देखें :
" in an intelligence led operation in the early hours of today, India struck the biggest training camp of JeM in Balakot."
" आज के शुरुआती घंटों में एक खुफिया अभियान के तहत, भारत ने बालाकोट में जैश ए मुहम्मद के सबसे बड़े प्रशिक्षण शिविर पर हमला किया।"
और रायटर्स ने कुछ 4 दिन पहले बालाकोट स्थित जैश ए मुहम्मद के कैम्प की ताजा तस्वीरें जारी करके कहा है कि :
"बालाकोट में जैश ए मुहम्मद का कैम्प सुरक्षित रूप से चल रहा है !!! "
और रायटर्स ने यह भी लिखा कि :
" या तो भारतीय वायुसेना का निशाना पूरी तरह से चूक गया है, या फिर जानबूझकर बेहद कमजोर बम गिराए गए ताकि जनहानि भी न हो और नागरिको का गुस्सा भी शांत हो जाए !!! "
और फिर सभी देशो की न्यूज एजेंसियों ने इसे रिपोर्ट करना शुरू किया कि भारत ने एयर स्ट्राइक में किसी कैम्प को नहीं उड़ाया है पर चुनावों के कारण इस तरह का स्टेज बनाया है ताकि नागरिको को यह अहसास दिलाया जा सके कि पुलवामा का बदला ले लिया गया है।
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मतलब पेड मीडिया द्वारा भारत में जो ड्रामा चलाया जा रहा है वह घर की बात घर तक है। लेकिन यदि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय वायुसेना पर ऊँगली उठायी जाने लगती है, तो यह शर्मिंदगी का विषय है।
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अब पेड रायटर्स द्वारा सेटेलाईट इमेज जैसा वैरिफायेबल तथ्य जारी करने के बाद, मेरा मानना है कि भारत सरकार को इसके खंडन के लिए अवश्य कदम उठाना चाहिए। यदि भारत कोई कदम नहीं उठाता तो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की वायुसेना की प्रतिष्ठा धूमिल होगी, जो कि अच्छी बात नहीं है।
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पेड रायटर्स द्वारा सेटेलाईट इमेजेस जारी करने के बाद मैंने प्रधानमन्त्री को एक अर्जी भेजी थी। इसमें मैंने मोदी साहेब को यथासंभव निम्नलिखित कदम उठाने की विनती की थी। अर्जी का पीडीऍफ़ आप प्रधानमंत्री जी की इस अधिकृत वेबसाईट के इस लिंक को क्लिक करके देख सकते है। पीडीऍफ़ का टेक्स्ट मैंने निचे दिया है : Newindia.in/Causes/ReleaseSatelliteImagesAirStrike
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#ReleaseSatelliteImagesAirStrike
माननीय प्रधानमन्त्री श्री नरेंद्र मोदी साहेब , विदेशी समाचार एजेंसी रायटर्स ने सेटेलाईट इमेज जारी करके यह दावा किया है कि भारतीय वायु सेना द्वारा बालाकोट में जैश-ए-मुहम्मद के जिस कैम्प पर बम गिराए गए थे, वह कैम्प पूरी तरह से सुरक्षित है और उसे कोई नुकसान नहीं हुआ है। रायटर्स अमेरिका का काफी बड़ा अंतराष्ट्रीय मीडिया समूह है, और इस तरह की रिपोर्टिंग से अंतर्राष्ट्रीय जगत में भारतीय वायु सेना का पराक्रम धूमिल हो रहा है।
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आपसे आग्रह है कि भारतीय वायु सेना की प्रतिष्ठा कायम रखने के लिए उस लोकेशन के अक्षांश, देशांतर, दिशा निर्देश एवं स्थिति जारी करें जिस लोकेशन पर आपने वायु सेना को बम गिराने के आदेश दिए थे।
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क्या सच्चाई कभी सामने आएगी ?
अमूमन इस तरह की चीजे छिपती नहीं है। जब रॉ, आई बी या वायु सेना के शीर्ष अधिकारी रिटायर्ड होंगे तो ओपरेशन के लिए दी गयी लोकेशन का खुलासा कर देंगे, या फिर 2024 के आस पास जब सत्ता परिवर्तन होगा तो इस सच्चाई के सामने आने की संभावनाएं बढ़ जायेगी। हम सिर्फ उम्मीद कर सकते है, कि इस विषय पर भारत सरकार स्पष्टीकरण जारी करे। वैसे मुझे उम्मीद न के बराबर है।
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