Pawan Jury BhilwaraRj
ड्रोन और मिसाइलों के खिलाफ साधारण बंदूकों की शक्ति - अफगानिस्तान युद्ध से सबक :
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अमेरिका ने लाखों अफगानियों को मार डाला, लेकिन अमेरिका के सिर्फ कुछ हजार सैनिक मरे। तो अनुपात पूरी तरह से अमेरिका के पक्ष में रहा। अमेरिका से अफ़ग़ानिस्तान लड़ पाया क्योंकि चीन ने अफ़ग़ानिस्तान को बंदूकें और एंटी-ड्रोन्स मिसाइल्स सप्लाई की थी।
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लेकिन बंदूकों का एक बड़ा हिस्सा अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर रहने वाले स्थानिक अफगानियों ने बनाया था। आम तौर पर खैबर-पास कॉपी कही जाने वाली राइफल्स दरअसल AK -47 की कॉपी है, जिसे अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर रहने वाले अनपढ़ अफगानी क्राफ्ट्समैन बनाते है।
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सदियों से अफ़ग़ानिस्तान में ये रिवाज है कि प्रत्येक अफगान को हथियार धारण करना चाहिए, और 1880 तक लगभग सभी अफगानी युवा बंदूक चलाना सीख चुके थे।
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और बंदूक का प्रयोग करके ही वे रूस और अमेरिका को देश छोड़ने के लिए विवश कर सके।
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तो भले ही आज के दौर में ड्रोन्स, मिसाइल्स और लड़ाकू विमानों ने कितनी भी प्रगति कर ली हो, पर आज भी युद्ध में बंदूकों का महत्त्व कम नही हुआ है।
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तो इसलिए हमारा ये प्रस्ताव कि "प्रत्येक व्यस्क नागरिक को हथियार रखने का अधिकार हो", बहुत ज्यादा राजनैतिक और राष्ट्रीय मूल्य रखता है।
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