> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2019-01-10

Pawan Jury BhilwaraRj

बूजने* है तो हमको मिले हमारा जंगल
आदमी है तो मदारी से छुड़ाया जाए !! ( बूजने - बंदर )
.
राम मंदिर का केस अदालत में 1949 में दर्ज हुआ था। पहले अदालत ने 40 साल तक इस मुद्दे को लटकाये रखा। बाद में 1990 में संघियो ने आकर कहा कि -- "अदालत कौन होती है आस्था के मामले में दखल देने वाली, हम क़ानून लाकर मंदिर बना देंगे।" तो उन्होंने इस मुद्दे पर हिन्दुओ को इकट्ठा किया उनसे वोट लिए , तीन बार सरकार बनायी और अब 2019 में यानि 40 साल बाद उनका कहना है कि मामला अदालत में है। हम क़ानून बनाकर कैसे मंदिर बना सकते है !!
.
(1) 1990 में संघ ने मंदिर बनाने के लिए हिन्दुओ को इकट्ठा किया और विवादित ढांचा गिरा दिया ( तब मामला कोर्ट में था )
.
(2) 1998 , संघ ने मंदिर निर्माण की सौगंध खायी और वाजपेयी ने सरकार बनायी। वाजपेयी ने कहा कि गठबंधन सरकार है और लोकसभा में बहुमत नहीं है। अत: मंदिर नहीं बनेगा। ( तब भी मामला कोर्ट में था )
.
(3) 2004 से 2014 तक संघ कहता रहा कि कांग्रेस मंदिर न बनाने दे रही है। हमारी सरकार बने तो मंदिर बने ( तब भी मामला कोर्ट में था )
.
(4) 2014 में मोदी साहेब ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनायी और 3 साल बाद संघ के नेता अमित शाह ने कहा कि राज्यसभा में बहुमत नहीं है। ( तब भी मामला कोर्ट में था )
.
(5)) 2018, चुनावों के 4 महीने पहले संघ के शीर्ष नेता मोहन भागवत ने संघ के नेता मोदी साहेब कहा से कहा कि अध्यादेश ले आओ ( ( तब भी मामला कोर्ट में था )
.
(6) और चुनाव से ३ महीने पहले संघ के नेता और देश के प्रधानमंत्री ने इंटरव्यू में देश के करोडो नागरिको को एक ऐसी बात बतायी जो संघियो को छोड़कर पूरे देश को पता थी !!

उन्होंने बताया कि - मामला कोर्ट में है !!!
.
संघ के कार्यकर्ताओ को यह बात पता नहीं थी, क्योंकि मोदी साहेब ने उन्हें यह बात अब जाकर बतायी है। अब तक तो उन्हें यही बताया गया था कि बीजेपी सरकार बनने से मंदिर बन जाएगा।
.
इसीलिए मैं संघ के कार्यकर्ताओ के बारे में कहता हूँ कि वे राम मंदिर का निर्माण कभी नहीं चाहते। क्योंकि राम मंदिर का निर्माण होने से उनके हाथ से यह मुद्दा निकल जाएगा , और तब वे मंदिर के नाम पर हिन्दुओ को संगठित करके उनके वोट इकट्ठे नहीं कर पाएंगे।
.
संघ के कार्यकर्ताओ को अपने संगठन से प्यार है , मुद्दे से नहीं। और इस मुद्दे से उन्हें प्यार इसीलिए है क्योंकि यह मुद्दा उन्हें अपने संगठन को बड़ा करने का अवसर देता है। मंदिर बनने से यह मुद्दा उनके हाथ से निकल जाएगा और उन्हें घाटा होगा। सभी संगठनों के साथ ऐसा ही होता है। वे खुद के संगठन को बड़ा एवं संगठित बनाये रखने के लिए मुद्दों की अवहेलना करनी शुरू करते है , और धीरे धीरे मुद्दा सिर्फ नारो और बयानों में रह जाता है।
.
मैं इसीलिए संगठन में नहीं मानता और एकता का आव्हान करने वाले कार्यकर्ताओ को विभाजनकारी की तरह देखता हूँ. क्योंकि उनका लक्ष्य मुद्दों को उठाकर लोगो को "खुद के निचे" एक करना होता है, ताकि संगठन खड़ा किया जा सके. मैं इसीलिए सिर्फ उस क़ानून ड्राफ्ट में मानता हूँ जिसके गेजेट में आने से अमुक मुद्दा हल होगा.
.
संघ के कार्यकर्ताओ को कम से कम अब तो यह बात समझ लेनी चाहिए कि पिछले 40 साल से हिन्दुओ को जगाकर उन्हें "एक" और संगठित करके तीन बार सरकार बनाने से सिर्फ सरकार बनती है , मंदिर नहीं बनता। मंदिर बनाने के लिए सिर्फ ३ पेज का क़ानून चाहिए होता है। और इन तीन पेज के गैजेट में छपने से राम जन्म भूमि पर राम मंदिर का निर्माण हो जाएगा। इसी तरह हिन्दुओ को संगठित और एक करने से या जगाने से न तो बांग्लादेशी घुसपैठिये भागने वाले है , न ही टू चाइल्ड लॉ आने वाला है और न ही भारत में इस्लाम / मिशनरीज के बढ़ते हुए नाजायज गलत प्रभाव में कमी आने वाली है।
.
राईट टू रिकॉल उच्चतम न्यायालय मुख्य न्यायाधीश के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
<https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/859860420858820>;
.
राम मंदिर निर्माण के लिए "राष्ट्रीय हिन्दू देवालय प्रबंधक ट्रस्ट" का प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
<https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/838551942989668>;
.
========