Pawan Jury BhilwaraRj
मोदी साहेब का इंटरव्यू : हमें नेताओ के डायलोग सुनने ही नही चाहिए । सिर्फ़ यह देखना चाहिए कि उन्होंने गेजेट में कौनसे क़ानून प्रकाशित किए ।
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उदाहरण के लिए यदि आप पिछले 5 साल में संघ के नेताओ के राम मंदिर निर्माण पर दिए गए सभी बयानो की आप सूची बनाये तो एक पूरी किताब प्रकाशित हो सकती है, और 1990 से अब तक राम मंदिर पर उन्होंने जितने डायलोग बोले है उससे पूरी एक लाइब्रेरी बन सकती है । वे ये डायलोग 1992 से ही सुना रहे है । जब तक आप सुनते रहेंगे वे सुनाते रहेंगे ।
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मेरे विचार में, ऐसा कोई भी नेता जो मंदिर बनाने की बात कहता है किंतु मंदिर बनाने का ड्राफ़्ट नही देता है , पहली नज़र में फ्रोड है । और यही बात देश के अन्य सभी मुद्दों पर लागू है ।
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