Pawan Jury BhilwaraRj
आगामी चुनावो में "संभावित फ्रोड उम्मीदवार" की पहचान कैसे करे ?
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राजनीति में स्टेंड न लेना सबसे बारीक चाल है। धूर्त एवं मक्कार उम्मीदवार ऐसे मुद्दों पर कभी "स्पष्ट" स्टेंड नहीं लेता जिससे उसे वोटो की हानि हो सकती है। इसीलिए वह किसी मुद्दे पर उसके रुख की "स्पष्ट प्रक्रिया" यानी ड्राफ्ट कभी भी सामने नहीं रखता है।
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उदाहरण के लिए -- मान लीजिये कि एक उम्मीदवार X चुनावों में प्रत्याशी है। अब यदि वह आरक्षण पर क्लियर स्टेंड लेता है कि यदि मैं सत्ता में आया तो अमुक क़ानून पास करके आरक्षण ख़त्म कर दूंगा , तो वह आरक्षण के समर्थको के वोट गँवा देगा। और यदि वह चुनाव से पहले आरक्षण बढाने का वादा करता है तो आरक्षण विरोधी उसके खिलाफ वोट कर देंगे। ऐसे स्थिति में यह फ्रोड उमीदवार अव्वल तो कोई क्लियर स्टेंड नहीं लेगा। वह अपने टोले के नेताओं को इस मुद्दे पर विरोधाभासी बयान देने को कहेगा। इस तरह वह चुप रहकर या विरोधाभासी बयान देकर दोनों पक्षों को मूर्ख बनाएगा और दोनों पक्षों के वोट ले उड़ेगा।
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और यदि उसे लगता है कि अमुक मुद्दे पर बहुमत किसी एक तरफ झुक रहा है और "क्लियर स्टेंड" लेने में फायदा है तो भी वह सिर्फ जबानी स्टेंड लेगा , मतलब सिर्फ घोषणा करेगा। लेकिन वह उस मुद्दे को हल करने के लिए चुनाव पूर्व लिखित क़ानूनी ड्राफ्ट कभी नहीं देगा। क्योंकि लिखित ड्राफ्ट देने से वह बाद में कोई बहाने नहीं बना सकेगा, और यदि वह पलट जाता है तो साफ़ तौर पर एक्सपोज हो जाएगा। उदाहरण के लिए ऐसा उम्मीदवार यह तो कहेगा कि हम राम मंदिर का निर्माण करेंगे या गौ हत्या बंद करेंगे , किन्तु यदि आप इस आदमी से पूछेंगे कि -- "आप किस क़ानून को लागू करके राम मंदिर का निर्माण करेंगे एवं गौ हत्या रोकेंगे" , तो यह उम्मीदवार कोई जवाब नहीं देगा। यह उम्मीदवार चुनाव से पहले ऐसा क़ानून ड्राफ्ट कभी नहीं रखेगा जिसे पास करके मंदिर निर्माण किया जा सकता है, या गौ हत्या रोकी जा सकती है । और चुनाव जीतने के बाद वह आपको अगले 5 साल तक तकनिकी और गैर तकनिकी अनगिनत बहाने गिनाते रहेगा।
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इसी तरह से यदि कोई उम्मीदवार यह कहता है कि मैं देश में पुलिस व्यवस्था सुधार दूंगा या न्यायपालिका का भ्रष्टाचार ख़त्म कर दूंगा तो उनसे इसके क़ानून ड्राफ्ट मांगे। यदि वह इसके लिए आपको लिखित कानूनी ड्राफ्ट नहीं देता है तो यह मानकर चले कि वह आपको बेवकूफ बनाने का इरादा बनाकर बैठा है।
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मेरा बिंदु यह है कि -- जो भी उम्मीदवार चुनाव से पहले उन कानूनों के ड्राफ्ट सार्वजनिक नहीं करता जिन मुद्दों को वह उठा रहा है , तो ज्यादातर से भी ज्यादातर सम्भावना है कि वह प्रथम दृष्टया फ्रोड उम्मीदवार है और उसकी मंशा सिर्फ वोट बटोरने की है। ऐसे उम्मीदवारों पर आप दबाव बनाए कि वे उन कानूनों के ड्राफ्ट सार्वजनिक करे जिन्हें वे जीतने के बाद लागू करने वाले है। यदि उम्मीदवार आपकी पहुँच में नहीं है तो उनके समर्थक कार्यकर्ताओ से ड्राफ्ट मांगे। यदि फिर भी अमुक उम्मीदवार ड्राफ्ट नहीं देता है तो ऐसे उम्मीदवार की अवहेलना न करे बल्कि नागरिको को यह सूचना भी दें कि अमुक उम्मीदवार मुद्दे उठाकर मतदाताओं को बेवकूफ बनाने का इरादा बनाकर बैठा है, और उलटे सीधे बयान चलाकर सिर्फ वोट इकट्ठे करना चाहता है।
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फ्रोड कार्यकर्ताओ की पहचान कैसे करे ?
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फ्रोड कार्यकर्ता हमेशा "संभावित फ्रोड उम्मीदवारों" का समर्थन करते है। उनका हमेशा से यही स्टेंड रहता है कि आप मेरे नेता पर विश्वास करो। उसे वोट दे दो बस। बाद में जो होगा देखेंगे।
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समाधान ?
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यदि आपके विधानसभा क्षेत्र में किसी भी उम्मीदवार ने चुनाव पूर्व कोई कानूनी ड्राफ्ट नहीं दिए है मतलब सभी उम्मीदवार पर्याप्त रूप से चालाक है तो आप खुद चुनाव लड़ने की कोशिश करे या ऐसे छोटे उम्मीदवार का प्रचार करे जिसने चुनाव से पहले लिखित कानूनी ड्राफ्ट दिए हो। साथ ही अपने एजेंडे में राईट टू रिकॉल कानूनों को भी शामिल करे , वर्ना अच्छा उम्मीदवार भी जीतने के अगले दिन ही भ्रष्ट हो जाएगा। सिर्फ राईट टू रिकॉल ही "संभावित फ्रोड उम्मीदवार" को चुनाव जीतने के बाद फ्रोड होने से रोक सकता है।
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प्रस्तावित राईट टू रिकॉल कानूनों के ड्राफ्ट देखने के लिए इस लिंक पर जाए ---- <https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/563544197157112>
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