Pawan Jury BhilwaraRj
जस्टिस यू. यू. ललित चिंकारा के शिकार के मामले में सलमान के वकील थे !!! और भी है ---
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१) जस्टिस ललित के पापा मुंबई हाई कोर्ट में जज थे। तो एक जज के सफल वकील पुत्र होने के हिसाब से उनका जज बन जाना स्वाभाविक है। इस मामले में वे भी अपवाद नहीं है।
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२) सलमान के अलावा उन्होंने पुणे के घोडा व्यवसायी हसन अली खान का भी केस लड़ा था। हसन अली खान पर अवैध रूप से हजारो करोड़ की सम्पत्ति अर्जित करने का मामला था।
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३) जब पंजाब के भ्रष्ट मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह भ्रष्टाचार के मामले में फंस गए थे तब भी उनकी पैरवी ललित ने ही की थी।
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४) ललित बीजेपी के सांसद नवजोत सिंह सिद्धू पर हत्या के मुकदमे में भी सिद्धू के वकील थे। इस मामले को हत्या की जगह सदोष मानव वध के रूप में दर्शाया गया।
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दुसरे शब्दों में यह जज भी अन्य जजों के समान ही सिर से पाँव तक भ्रष्ट है , और इस आदमी का नैतिक मूल्यों से कोई लेना देना नहीं है। इस बात का सिर्फ अनुमान ही किया जा सकता है कि इन मामलो में अपने मुवक्किलों को बरी कराने के लिए इसने जजों से कैसे सेटिंग की होगी , और फैसला अपने पक्ष में लिखवाने के लिए जजों को कितनी घूस दी होगी।
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और हमेशा की तरह अपने बचाव में इस आदमी के पास भी वही थका हुआ स्पष्टीकरण है कि -- "मेरे मुवक्किल को बचाना मेरा पेशागत दायित्व है।"
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फिर यह आदमी 2014 में डायरेक्ट सुप्रीम कोर्ट का जज बन जाता है !! और जज बनने के बाद यह आदमी न्यायपालिका में व्याप्त भयंकर भ्रष्टाचार और भयंकर भाई भतीजावाद को कम करने के लिए कोई प्रयास नहीं करता।
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और यही आदमी आने वाले समय में चीफ जस्टिस ऑफ़ इण्डिया का पदभार संभालेगा !!! और फिर हमसे यह उम्मीद की जाती है कि हम इसे माननीय भी कहें !!!
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हमारे देश में यह क़ानून है कि , किसी भी वकील को उठाकर सुप्रीम कोर्ट से लेकर हाई कोर्ट तक में जज बनाया जा सकता है। और संघ के स्वयंसेवक इतने गिरे हुए है कि वे अदालतों में इस प्रकार की नियुक्ति व्यवस्था का समर्थन करते है !!! आज तक मोदी साहेब और उनके स्वयंसेवको ने देश की अदालतों को सुधारने एवं उनमे भ्रष्टाचार कम करने के लिए एक भी क़ानून पास नहीं किया , और न ही ऐसा कोई प्रस्ताव किया। संघ के सभी स्वयंसेवक अदालतों में भ्रष्टाचार के समर्थक है। वजह आप उनसे खुद पूछिए।
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यदि आप अदालतों में सुधार लाना चाहते है तो आपको इस बात को समझने की जरूरत है कि सोनिया-मोदी-केजरीवाल एवं इनके कार्यकर्ता मौजूदा व्यवस्था के समर्थक है। जजों का भ्रष्टाचार कम करने में कांग्रेस-बीजेपी-आपा के कार्यकर्ताओ की बिलकुल रुचि नहीं है। रुचि इसीलिए नहीं है क्योंकि इस भ्र्ष्टाचार से होने वाली आय इनके नेताओ की जेब में जाती है ,एवं इसमें से एक हिस्सा इन्हे भी मिलता है।
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यदि आप भारत की अदालतों में सुधार लाना चाहते है तो राईट टू रिकॉल जज एवं ज्यूरी सिस्टम कानूनों की मांग करें। इन कानूनों के प्रस्तावित ड्राफ्ट देखने के लिए मेरी फेसबुक प्रोफाइल का कवर पिक्चर क्लिक करें तथा डिस्क्रिप्शन देखें।
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