> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2018-04-08

Pawan Jury BhilwaraRj

जब संघ के शीर्ष नेता मोहन भागवत कहते है कि -- "भारत में निवास करने वाला प्रत्येक व्यक्ति हिन्दू है।" तो यह बयान हिन्दुओ को विभाजित कर देता है। किंतु यही कथन यदि किसी धार्मिक संगठन या आम हिन्दू नागरिक द्वारा कहा जाएगा तो यह हिन्दुओ में विभाजित नहीं करता।
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कैसे ?
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जब यह बयान कोई राजनैतिक संगठन देता है तो यह बयान हिन्दुओ का धार्मिक नहीं बल्कि राजनैतिक रूपांतरण करने की मंशा बताता है। संघ 100 बार कहता है कि तुम हिन्दू हो , वो भी हिन्दू है , ये भी हिंदू है , और भारत में रहने वाला हर एक व्यक्ति हिन्दू है । फिर संघ कहता है कि -- हिन्दू खतरे में है , हिन्दू खतरें में है। और फिर संघ कहता है कि हम हिन्दूवादी पार्टी है। तो जब तुम हिन्दू हो , और हिन्दू खतरे में है, और हम हिंदूवादी पार्टी है तो तुम हमें वोट देकर हिन्दूओ और हिंदुत्व को बचाओ। यदि तुम हमें वोट नहीं दोगे तो हिन्दू खतरे में आ जाएगा। इस पूरी खिचड़ी का घूम फिर कर सार यही निकलता है कि -- कुल मिलाकर तुम हमें वोट दो।
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इससे विपक्षी पार्टियों को हिंदुत्व से दिक्कत शुरू हो जाती है। उन्हें दिक्कत यह है कि जब संघ यह बात बोलता है तो हिन्दू उनकी और दौड़ लगाते है, एवं उनके वोट कम होने लगते है। तो यदि यह सिलसिला जारी रहा तो आने वाले समय में हम ऐसे कई समुदायों एवं व्यक्तियों को जो संघ को वोट नहीं करना चाहते , यह कहते देख सकते है कि -- "हम हिन्दू नहीं है" !!!
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यदि यही बात बात कोई गैर राजनैतिक व्यक्ति या संगठन कहेगा तो टकराव टल जाएगा। मोहन भागवत यह बात जानते है। लेकिन वे वोट लेने के लिए एकता के नाम हिन्दुओ में विभाजन का जोखिम उठाने के लिए तैयार है।
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दरअसल एकता का आव्हान दुनिया में सबसे अधिक विभाजन कारी सिद्धांत है। यदि कोई व्यक्ति एकता की बात करें तो आपके दिमाग में संदेह के बादल तुरंत घुमड़ने चाहिए। सभी एकतावादी नेता बुनियादी तौर पर विभाजनकारी होते है।
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