> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2018-02-18

Pawan Jury BhilwaraRj

कल्कि पुरुष मोदी साहेब और अरविन्द गांधी "ऐसे" कपड़े क्यों पहनते है ?
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वे ऐसी वेशभूषा का चयन "अविश्वास का निलंबन" सिध्दांत को सक्रीय करने की नियत से करते है। कृपया "suspension of disbelief" पर गूगल करे एवं इसका विकी पेज भी देखें।
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स्टंट फिल्मो में पटकथा लेखक एवं निर्देशक जो दृश्य रचते है उनमें घटनाओ को काफी तेज एवं रहस्यमयी तरीके से घटते दिखाया जाता है, ताकि दर्शक का ध्यान दृश्यों एवं घटनाओ के इस भम्भड में गुम हो जाए और उसका दिमाग यह आकलन नहीं कर पाए कि अमुक दृश्य या घटनाक्रम कितना व्यवहारिक एवं युक्तियुक्त था।
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और परिधानो का चयन दर्शक के दृश्य में डूब जाने और वास्तविकता से कट जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दर्शक का ध्यान कुछ क्षणों के लिए वस्त्रो का आकलन करने में लग जाता है और इससे दर्शक के दिमाग को उपलब्ध उस समय में कमी आती है जिसका उपयोग दिमाग अभिनेता द्वारा अदा किये गए संवाद या हरकत की व्यावहारिकता एवं युक्ति संगतता का आकलन करने में करता है।
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तो ये दोनों महानुभाव किसी कम्पनी / बैंक आदि के सामान्य अधिकारियों द्वारा आम तौर पर पहने जाने वाले औपचारिक वस्त्र पहन सकते है, किन्तु अपनी अत्यियुक्त एवं छद्म छवि पर निर्भरता के चलते वे इस छवि को टिकाये रखने के लिए बाध्य है। अत: वे अपने वस्त्रो का चयन बेहद सतर्कता से करते है।
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भारतीय राजनीती में इस फैंसी ड्रेस कम्पटीशन के आदि प्रणेता महादुरात्मा गांधी थे। वे जानते थे कि अहिंसा के नाम पर जो उपदेश वे लोगो को पिलाना चाह रहे है यदि वह सामान्य वस्त्र पहनकर दिया गया तो वह लोगो के हाजमे के खिलाफ पड़ेगा, और यहाँ तक कि पिटने की नौबत भी आ सकती है। अस्तु उन्होंने फ़क़ीरनुमा वस्त्रो का चयन किया, ताकि उनके डायलॉग सुनने वाले लोग उनके भक्त हो कर उनके उपदेशो का व्यवहारिक आकलन करने का प्रयास न करे।
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गुजराती तब इस्लामिस्ट अपराधियों से जूझ रहे थे और गोधरा कांड हो जाने से लोग ऐसे व्यक्ति को हाथों हाथ लेने को तैयार थे जिसकी छवि सुपरमैन नुमा हो। इसी छवि को पुष्ट करने के लिए कल्कि पुरुष मोदी साहेब ने भड़कीले परिधानों का इस्तेमाल करना शुरू किया।
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अरविन्द गांधी अपने आप को "स्थापित व्यवस्था के खिलाफ लड़ाके" के रूप में प्रस्तुत करना चाहते थे , और चूंकि मौजूदा व्यवस्था भ्रष्ट है और वे भ्रष्टाचार के खिलाफ है अत: वे जानबूझकर ऐसे महंगे पेण्ट-शर्ट खरीद कर पहनने लगे जो दिखने में बहुत ही सस्ते नजर आये। ( बहुत ही सस्ते नजर आने वाले कपडे चुनने के लिए आपको बेहद महंगे डिजायनर की जरुरत होती है, और इसके ऊँचे दाम चुकाने होते है !!)
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कुल मिलाकर वे सामान्य कामकाजी अधिकारियो या उद्योगपतियों की तरह कपडे नहीं पहनते। बल्कि वे अपने श्रोताओ एवं दर्शको का ध्यान भंग करने और उन्हें "अविश्वास के निलंबन" की चपेट में लेने के लिए अपने वस्त्रो का चयन बहुत सावधानी से करते है।
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