Pawan Jury BhilwaraRj
पिछले 4 वर्षो में बैंको द्वारा 60,000 करोड़ के 8,000 फौजदारी मुकदमे दर्ज किये गए। इनमे कितने मामलो में आरोपियों को सजा हुयी है ? लगभग शून्य !!
.
मनमोहन जी के जमाने में सौदा सीधे तरीके से तय किया जाता था -- बैंक चेयरमेन, वित्त सचिव, वित्त मंत्री, प्रधानमंत्री, सुपर प्रधानमंत्री ( सोनिया जी ) एवं जज को घूस दो , और बैंक से मोटा पैसा उठाकर खा जाओ। और इसमें से कुछ खुरचन कोंग्रेस के कार्यकर्ताओ को भी देनी होती थी।
.
इस समीकरण में से अब सुपर प्रधानमंत्री नदारद है। शेष गठजोड़ वैसे ही काम कर रहा है जैसे कि कोंग्रेस के जमाने में काम करता था। इसमें से जो हफ्ता पहले कोंग्रेस के कार्यकर्ता वसूलते थे उस पर अब संघ के कार्यकर्ताओ ने कब्जा कर लिया है। एक बदलाव और यह हुआ है कि मोदी साहेब इन घोटालो से जो पैसा खींच रहे है उसमे से एक बड़ा टुकड़ा वे पेड अर्नब गोस्वामी, पेड सरदेसाई , पेड सुधीर तिहाडी एवं पेड रजत शर्मा के सामने डाल देते है। और टुकड़े मिल जाने के बाद वे मोदी साहेब पर घूसखोरी का आरोप नहीं लगाते।
.
एक और तब्दीली यह आई है कि, कोंग्रेस के कार्यकर्ता बेधड़क घूस खाते थे और सभी आरोपो को चुपचाप पचा जाते थे। पर संघ के कार्यकर्ताओं ने इसमें एक नया पैंतरा और जोड़ा -- वे अपना हफ्ता वसूलने से पहले एवं बाद में भी नियमित रूप से दिन में दो बार "भारत माता की जय" एवं "वन्दे मातरम" के पुकारे लगाते है। कोंग्रेस के कार्यकर्ताओ ये कभी नहीं सूझा।
.
तो अब हमारे पास जो प्रधानमंत्री है उनकी छवि ज्यादा बेहतर है।
.
समाधान - जो कार्यकर्ता भारत की व्यवस्था में सुधार लाना चाहते है उन्हें सबसे पहले यह समझ लेना चाहिए कि सोनिया-मोदी-केजरीवाल के भरोसे व्यवस्था सिर्फ बदतर ही हो सकती है बेहतर नहीं। कार्यकर्ताओ को उन कानूनों को लागू करवाने के लिए प्रयास करने चाहिए जिससे वास्तविक रूप से व्यवस्था में सुधार आये। कौनसे क़ानून ? हमारा प्रस्ताव है कि राईट टू रिकॉल, ज्यूरी सिस्टम एवं सार्वजनिक नारको टेस्ट के क़ानून लाकर व्यवस्था को कुछ ही महीनो में पूरी तरह से दुरुस्त किया जा सकता है। ये क़ानून यदि आ जाते है तो सोनिया-मोदी-केजरीवाल जैसे नेता भी रातों रात तमीजदार हो जायेंगे।
.
=============