Pawan Jury BhilwaraRj
बजट को नजरंदाज करें - इस बात पर ध्यान दें कि जीएसटी का समर्थन एवं वेल्थ टेक्स का विरोध करके सोनिया-मोदी-केजरीवाल एवं कोंग्रेस-बीजेपी-आपा के कार्यकर्ता देश को किस दुश्चक्र में धकेल रहे है।
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कुछ मामूली बदलावों को दरकिनार करते हुए बजट बहुधा पूर्व बजट का कॉपी-पेस्ट संस्करण होता है। अब जीएसटी के कारण, अप्रत्यक्ष करों के संग्रहण में कमी आयी है !! पेट्रोल के कारण एक्साइज/वैट से होने वाली आय में इजाफा हुआ है। सीमा शुल्क के संग्रहण में भी बढ़ोतरी हुयी है , किन्तु सीमा शुल्क से आय तब बढती है, जब आयात बढ़ता है। और आयात बढ़ने से देश पर डॉलर चुकाने का भार बढ़ जाता है।
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तो जबकि अप्रत्यक्ष करो से होने वाली आय में गिरावट हुयी है तो सरकार के पास भरपाई करने के लिए प्रत्यक्ष कर ही बचे है।
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और समस्या आयकर की दरो को लेकर नहीं है। असली समस्या यह है कि -- सोनिया-मोदी-केजरीवाल संयुक्त रूप से जीएसटी के समर्थन एवं वेल्थ टेक्स के विरोध में है।
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तो हमें आयकरो की दरों पर तब्सरा करने की जगह इस विषय पर भार देना चाहिए कि कौन कौन से नेता-पार्टियाँ जीएसटी का समर्थन एवं वेल्थ टेक्स का विरोध कर रहे है। क्योंकि जीएसटी के रहते हुए बजट कैसे भी रचा जाए वह देश को होने वाले नुकसान की भरपाई नहीं कर सकेगा।
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