> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2017-10-27

Pawan Jury BhilwaraRj

[ राष्ट्रीय हिन्दू देवालय प्रबंधक ट्रस्ट ( NHDMT ) का अपडेटेड संस्करण ]
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हिन्दू मंदिरों के प्रशासन को सुदृढ़ बनाने के लिए हम यहाँ शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी ( SGPC ) जैसा एक ढांचा प्रस्तावित कर रहे हैं। प्रत्येक हिन्दू, सिख, जैन, बौद्ध आदि इस ट्रस्ट के जन्म से सदस्य होंगे, जब तक कि वे स्वयं अपनी सदस्यता नहीं छोड़ देते। इन सदस्यों को अध्यक्ष एवं ट्रस्टियो को चुनने एवं किसी भी दिन बदलने का अधिकार भी होगा। मुस्लिम तथा क्रिश्चियन इस ट्रस्ट के सदस्य नहीं बन सकेंगे।
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शुरू में राष्ट्रीय हिंदू देवालय प्रबंधक ट्रस्ट ( NHDMT ) 4 मंदिरों की देख-रेख करेगा -- कश्मीर का अमरनाथ देवालय, राम जन्म भूमि देवालय, कृष्ण जन्म भूमि देवालय तथा काशी विश्वनाथ देवालय। आगे चलकर यदि सम्बंधित संप्रदाय स्वेच्छा से अपने मंदिर सुपुर्द करते है तो यह अन्य मंदिरों की देख-रेख भी कर सकता है।
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इस ड्राफ्ट की पीडीऍफ़ फाइल, sha1 हैश एवं मूल अंग्रेजी संस्करण का लिंक कमेंट बॉक्स में देखें। यदि आप इस कानूनी ड्राफ्ट का समर्थन करते है तो कृपया अपने पीएम को ट्विट करके कहें कि इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित किया जाए।
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प्रधानमंत्री को भेजे जाने वाले ट्वीट का प्रारूप :
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@pmoindia I insturct you to print - <https://newindia.in/causes/nhdmt/>; , sha1- 5aa04b00713192b0e78263a7f31af3c334c838b5 #NHDMT
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( कृपया ऊपर दिए गए ट्वीट को कॉपी करे तथा अपने ट्विटर एकाउंट से @pmoindia पर ट्वीट करे। )
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राष्ट्रीय हिन्दू देवालय प्रबंधक ट्रस्ट (NHDMT)
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[ टिप्पणी: यह कानूनी ड्राफ्ट प्रधानमंत्री द्वारा राजपत्र अधिसूचना के रूप में छापा जा सकता है। इसे देश में लागू करने के लिए लोकसभा या राज्यसभा से अनुमति लेने की ज़रूरत नहीं है।
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इस ड्राफ्ट के तीन भाग है -
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भाग - 1 : नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश
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भाग - 2 : कानूनी ड्राफ्ट का सारांश
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भाग - 3 : अधिकारियों और नागरिकों के लिए निर्देश और टिप्पणियाँ
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इस क़ानून के महत्वपूर्ण खंड है - (3), (5), (10.2), (10.3 ), (10.8), (11.3.2), (11.3.4), (12.1), (12.5), (14.2) ]
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भाग-1 : नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश
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(1) यह कानून सिर्फ हिंदुओं के लिए लागू होगा। इस कानून में "हिन्दू" शब्द उन सभी समुदाय के अनुयायीयों को शामिल करता है जो स्वयं को हिन्दू कहते है। यह कानून किसी भी प्रकार से उन नागरिकों पर हिन्दू का लेबल लगाने का प्रयास नहीं करता, जो स्वयं को हिन्दू नहीं कहते या हिन्दू नही कहलाना चाहते। और ये कानून इस्लाम, ईसाई, पारसी और अन्य धर्म जो भारतीय उपमहाद्वीप के बाहर उत्पन्न हुए है , के अनुयायीयों पर कोई भी प्रतिबंध या दायित्व नहीं लगाता है। यदि सिक्ख, जैन और बौद्ध आदि धर्मो के धर्मावलम्बी इस कानून में नामांकित होना चाहते है तो वे स्वैच्छिक रूप से नामांकित हो सकते है।
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(2) प्रधानमंत्री एक ट्रस्ट गठित करेंगे जो राष्ट्रीय हिन्दू देवालय प्रबंधक ट्रस्ट तथा संक्षेप में NHMDT कहलायेगा। NHMDT सिर्फ उन्ही देवालयों का प्रबंधन करेगा जिन्हें संसद ने NHMDT को सौपा है, या जब किसी हिन्दू मंदिर के मालिकों ने अपना देवालय NHMDT को सौपा है। NHMDT उन देवालयों का अधिग्रहण या प्रबंधन नहीं करेगा जिनका प्रबंधन देवालय के मालिक NHMDT द्वारा करवाना नहीं चाहते। NHMDT मस्जिदों, चर्चों, गुरुद्वारो या बौध तीर्थ स्थलो या जैन तीर्थ स्थलो का प्रबंधन भी नहीं करेगा।
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(3) यदि एवं जब भारत के मतदाता जनमत संग्रह या ऐसी कोई प्रक्रिया जो 45 करोड़ से अधिक मतदाताओं की मंशा सिद्ध करें, के माध्यम से प्रस्तावित (a) राम जन्म भूमि देवालय, अयोध्या (b) कृष्णा जन्म भूमि देवालय, मथुरा (c) काशी विश्वनाथ देवालय, वाराणसी (d) अमरनाथ देवालय, कश्मीर के भू-खंड NHMDT को सौंप देते है तो NHMDT इन 4 देवालयों का प्रबंधन करेगा।
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(4) प्रधानमंत्री प्रथम अध्यक्ष और 4 ट्रस्टियों को नियुक्त करेगा।
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(5) आप ( आप अर्थात मतदाता ) अध्यक्ष और ट्रस्टियों को "राईट टू रिकॉल NHMDT अध्यक्ष" और ट्रस्टियों पर राईट टू रिकॉल प्रक्रिया जिन्हें बाद के खंडो में विस्तार से दिया गया है, के द्वारा बदल सकते है। ट्रस्टियों एवं अध्यक्ष का आजीवन कार्यकाल 1000 दिवस होगा।
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(6) NHMDT अध्यक्ष और ट्रस्टी देवालय प्रबंधन के लिए अपने अधीनस्थ कर्मचारियों की भर्ती करेंगे। कर्मचारियों के बीच यदि कोई विवाद होता है या हिन्दुओं व कर्मचारियों के बीच कोई विवाद होता है, तो विवाद के निपटान के लिए जिला या राज्य या भारत की मतदाता सूची में से क्रमरहित तरीके से चुने गए 12 से 1500 हिन्दुओं की जूरी जिनकी आयु 30 वर्ष से 55 वर्ष के मध्य होगी ,बुलाई जा सकती है। जूरी सदस्य दोनों पक्षों को सुनेंगे और अपना निर्णय देंगे। यदि आपका नाम इस जूरी ड्यूटी में चुना गया है, तब आपको जूरी सदस्य के रूप में प्रस्तुत होना पड़ेगा और मामले का फ़ैसला करना होगा।
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भाग-2 : कानूनी ड्राफ्ट का सारांश
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(7) टिप्पणी : NHMDT के गठन के लिए इस राजपत्र अधिसूचना को प्रकाशित किया जाएगा। यह क़ानून प्रवृत होने के बाद NHMDT 4 मुख्य हिन्दू देवालयो का प्रबंधन करेगा। प्रबंधन का यह ढांचा लोकतान्त्रिक एवं SGPC के सदृश होगा। देवालय प्रबंधन की यह व्यवस्था उन सभी देवालयों पर भी लागू होगी जिन देवालयों के मालिकों ने अपना देवालय NHMDT को सुपुर्द कर दिया है।
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भाग-3 : अधिकारियों और नागरिकों के लिए निर्देश और टिप्पणियाँ
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(8) टिप्पणी : टिप्पणीयां इस कानूनी ड्राफ्ट का वास्तविक हिस्सा नहीं है। कार्यकर्ता और नागरिक ड्राफ्ट को समझने हेतु इसका उपयोग कर सकते है। जूरी सदस्य इन टिप्पणीयों का उपयोग निर्णय देने के लिए कर सकते है। किन्तु टिप्पणीयां किसी पर भी बाध्यकारी नहीं है।
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(9) प्रारंभिक नियुक्ति : प्रधानमंत्री राष्ट्रीय हिन्दू देवालय प्रबंधक ट्रस्ट का गठन करेंगे एवं अपनी पसंद से किसी भी हिन्दू को कार्यरत अध्यक्ष व अन्य 4 हिन्दुओं को ट्रस्टी चुनेंगे।
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(10) राईट टू रिकॉल NHDMT अध्यक्ष
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(10.1) यदि कोई भारतीय हिन्दू नागरिक जिसकी आयु 30 वर्ष से अधिक है एवं वह अध्यक्ष बनना चाहता है तो वह जिला कलेक्टर के सामने प्रस्तुत हो सकता है। कलेक्टर सांसद के चुनाव में जमा होने वाली राशि के बराबर आवेदन शुल्क लेकर उसे एक सीरियल नंबर जारी करेगा और उस व्यक्ति का नाम प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर रखेगा। पदासीन अध्यक्ष स्वयं को भी एक उम्मीदवार के रूप में पंजीकृत करवा सकता है।
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(10.2) यदि कोई हिन्दू मतदाता स्वयं पटवारी कार्यालय आता है एवं 3 रू शुल्क देकर अधिकतम 5 उम्मीदवारों को अध्यक्ष पद के लिए अनुमोदित करता है तो पटवारी उसके अनुमोदनो को कंप्यूटर में डालेगा और उस व्यक्ति की मतदाता पहचान पत्र संख्या, समय / दिनांक और उसके अनुमोदित व्यक्तियों के विवरण की एक रसीद देगा। बीपीएल कार्ड धारकों के लिए शुल्क रु.1 होगा।
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(10.3) यदि कोई मतदाता अपने अनुमोदनों को निरस्त करने आता है तो पटवारी बिना कोई शुल्क लिए उसके एक या उससे अधिक अनुमोदन निरस्त कर देगा।
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(10.4) कलेक्टर मतदाता को एस.एम.एस. फीडबैक भेजने वाला एक सिस्टम बना सकता है। कलेक्टर मतदाता के फिंगर प्रिंट और फोटो लेकर बदले में रसीद देने वाला सिस्टम भी बना सकता है।
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(10.5) प्रधानमन्त्री नागरिको को ऐसी सुविधा दे सकते है जिससे वे एस.एम.एस या एटीएम या मोबाइल फ़ोन एप्प या इन्टरनेट के माध्यम से अनुमोदन दर्ज करवा सके।
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(10.6) पटवारी नागरिक द्वारा दर्ज किये गए अनुमोदनों को उनकी पसंद के क्रम में ज़िले की वेबसाइट पर नागरिक के मतदाता पहचान पत्र संख्या के साथ रखेगा।
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(10.7) प्रत्येक सोमवार को कलेक्टर प्रत्येक उम्मीदवार के अनुमोदनो की गिनती जारी करेंगे।
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(10.8) यदि अध्यक्ष पद में किसी उम्मीदवार के पास 25 करोड़ से अधिक हिन्दू मतदाताओं का अनुमोदन है, और यह अनुमोदन पदासीन अध्यक्ष के अनुमोदनों से 1 करोड़ अधिक भी है, तब प्रधानमंत्री उसे नए अध्यक्ष के रूप में नियुक्त कर सकते हैं।
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(10.9) यदि कोई 30 वर्षीय भारतीय हिन्दू नागरिक ट्रस्टी बनना चाहता है तो वह कलेक्टर के सामने अपना आवेदन प्रस्तुत कर सकता है। कलेक्टर सांसद चुनाव में जमा होने वाली राशि के बराबर आवेदन शुल्क लेकर उसे एक सीरियल नंबर जारी करेगा और उस व्यक्ति का नाम प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर रखेगा। नागरिक ट्रस्टी पद के लिये अधिकतम 10 उम्मीदवारों को अनुमोदित कर सकते है और अपने अनुमोदनो को किसी भी दिन निरस्त कर सकते है।
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(10.10) यदि किसी उम्मीदवार के पास 20 करोड़ से अधिक हिन्दू मतदाताओं का अनुमोदन है और यह सबसे कम अनुमोदित ट्रस्टी के अनुमोदनों से 1 करोड़ अधिक है तो प्रधानमंत्री उसे नए ट्रस्टी के रूप में नियुक्त कर सकते है , और न्यूनतम अनुमोदन पाने वाले ट्रस्टी को हटा सकते है।
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(10.11) कोई व्यक्ति ट्रस्टी के साथ अध्यक्ष के रूप में भी उम्मीदवार बन सकता है।
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(10.12) यदि कोई व्यक्ति 1000 दिनों के लिए ट्रस्टी या अध्यक्ष के रूप में सेवाए दे चुका है तो प्रधानमंत्री उसे सबसे अधिक अनुमोदनों वाले व्यक्ति से प्रतिस्थापित करेंगे।
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(11) ट्रस्ट और ट्रस्ट के नियंत्रण में आने वाले देवालयों का प्रबंधन करना
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(11.1) अध्यक्ष और ट्रस्टी ट्रस्ट संचालन और कर्मचारियों के प्रबंधन लिए जरुरी नियम बनाएंगे। अध्यक्ष के सभी निर्णयों को कम से कम दो ट्रस्टियों के अनुमोदन की ज़रूरत होगी।
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(11.2) अध्यक्ष लिखित परीक्षा द्वारा 1000 दिनों की अवधि के लिए पुरोहितों एवं अन्य कर्मचारियों की भर्ती करेगा। अध्यक्ष विशेष कार्यों के लिए बाहरी ठेकेदारों को ठेके दे सकता है।
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(11.2.1) अध्यक्ष कर्मचारियों के विरुद्ध शिकायतें सुनने के लिए जूरी सिस्टम की स्थापना करेगा। अध्यक्ष जूरी सिस्टम का ड्राफ्ट तैयार करेगा और इसे प्रशासित करेगा। अध्यक्ष जूरी सिस्टम के संचालन हेतु अधिकारीयों को भी नियुक्त करेगा।
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(11.3) टिप्पणी :
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(11.3.1) जूरी सिस्टम में एक राष्ट्रीय जूरी प्रशासक तथा अन्य राज्यो / जिलो में राज्य / जिला जूरी प्रशासक शामिल होंगे।
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(11.3.2) प्रत्येक जूरी प्रशासक क्रम रहित ( रेंडमली ) तरीके से 30 से 55 वर्ष के मध्य की आयु के 45 हिन्दू मतदाताओं को 3 महीने की अवधि के लिए चुनकर महा जूरी मंडल ( ग्रेंड ज्यूरी ) का गठन करेगा।
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(11.3.3) प्रत्येक शिकायत पर विचार करके महा-जूरी सदस्य यह तय करेंगे कि शिकायत बर्खास्त करनी चाहिए या जूरी को भेजी जानी चाहिए।
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(11.3.4) यदि महा-जूरी सदस्य जूरी ट्रायल का निर्णय करते है तो महा-जूरी सदस्य जूरी का आकर तय करेंगे। ज्यूरी का आकार 12 से 1500 सदस्यों के बीच हो सकता है। महा-जूरी सदस्य यह भी तय करेंगे कि मामले के लिए जूरी जिला स्तर पर होनी चाहिए या राज्य स्तर पर या राष्ट्रीय स्तर पर।
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(11.3.5) जूरी मंडल में हिन्दू जूरी सदस्यों का चयन जिला / राज्य / राष्ट्र ( जो भी लागू हो ) की मतदाता सूची में से रेंडमली किया जाएगा। जूरी सदस्य तय करेंगे कि कर्मचारी पर जुर्माना लगाना है या नहीं अथवा उसे निष्काषित करना चाहिए या नहीं।
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(11.3.6) जिला जूरी मंडल के निर्णय की अपील राज्य जूरी मंडल के सामने की जा सकती है, एवं राज्य जूरी मंडल के फैसले की अपील राष्ट्रीय जूरी मंडल के सामने की जा सकेगी। किसी भी जूरी मंडल के फैसले की अपील जिला / उच्च / उच्चत्तम न्यायालय ( जो भी लागू हो ) में की जा सकेगी।
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(11.3.7) अध्यक्ष ऊपर दिए गए निर्देशों का प्रयोग करते हुए प्रस्तावित जूरी सिस्टम का ड्राफ्ट सार्वजनिक करेगा। यदि मतदाता पाते है कि प्रस्तावित जूरी सिस्टम बहुत कमजोर है, तो मतदाता अध्यक्ष को बदल सकते है या अध्यक्ष से ड्राफ्ट में संशोधन की मांग कर सकते है।
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(12) राष्ट्रीय देवालय
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(12.1) इस खंड में मतदाता का आशय सभी धर्मों के भारत के सभी मतदाताओं से है। राष्ट्रीय जनमत संग्रह या किसी अन्य ऐसी प्रक्रिया द्वारा जो 45 करोड़ से अधिक मतदाताओं की मंशा को सिद्ध करें, का उपयोग करके प्रधानमंत्री इन 4 भू-खंडो को अधिगृहित करेंगे -- (a) राम जन्म भूमि देवालय, अयोध्या (b) कृष्णा जन्म भूमि देवालय, मथुरा (c) काशी विश्वनाथ देवालय, वाराणसी (d) अमरनाथ देवालय, कश्मीर।
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(12.2) प्रधानमंत्री ये भू-खंड NHDMT को सौंप देंगे।
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(12.3) NHDMT इन 4 देवालयों का प्रबंधन करेगा।
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(12.4) NHDMT उन सभी देवालयो का प्रबंधन भी करेगा जो किसी संप्रदाय ने उसे सौंप दिया है। यदि अमुक सम्प्रदाय चाहे तो सौंपे गए देवालय को 5 साल के भीतर वापस ले सकता है। 5 साल बाद, ट्रस्ट औपचारिक रूप से संप्रदाय से पूछेगा कि क्या उसे देवालय वापस चाहिए। यदि सम्प्रदाय के 65% से ऊपर संप्रदाय मालिक "ना" में उत्तर करते है सिर्फ तब और तब ही NHDMT द्वारा देवालय अधिग्रहत किया जायेगा। लेकिन इसके बाद NHDMT संप्रदाय को देवालय वापस नहीं दे सकेगा।
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(13) मतदान अधिकार
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(13.1) प्रत्येक व्यक्ति जो हिन्दू है और NHDMT ड्राफ्ट राजपत्र में छपने की दिनांक पर 18 वर्ष से ऊपर की आयु का है मतदाता सदस्य होगा। NHDMT में गैर-मतदाता सदस्य नहीं होंगे। शब्द "हिन्दू" में हिन्दू , सिक्ख , जैन और बौद्ध के सभी संप्रदाय शामिल है।
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(13.2) यदि कोई व्यक्ति स्वयं को गैर-हिन्दू कहता है तो उसका अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति / अन्य पिछड़ा वर्ग का दर्जा इस कानून द्वारा प्रभावित नहीं होगा। यदि अन्य कानून इस दर्जे को प्रभावित करते है, तब ये प्रभावित हो सकता है।
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(13.3) यदि कोई व्यक्ति इस्लाम या ईसाई में धर्मान्तरित हो जाता है तो उसका मताधिकार निलम्बित कर दिया जाएगा। यदि धर्मान्तरित हुआ अमुक व्यक्ति एक वर्ष के भीतर फिर से हिन्दू धर्म में पुन: धर्मान्तरित नहीं हो जाता है तो उसका नाम मतदाता सूची में से हटा दिया जाएगा। और यदि वह दो बार किसी अन्य धर्म में परिवर्तित हो जाता है तो दूसरी बार उसका नाम सदस्य सूची में से बिना 1 साल इंतज़ार किये हटा दिया जायेगा। किसी विवाद की स्थिति में जूरी का निर्णय अंतिम होगा।
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(13.4) यदि कोई ईसाई या मुस्लिम धर्मावलम्बी हिन्दू बनना चाहता है तो जूरी मंडल उसकी पहचान की पुष्टि करके अनुमोदित करेगी। जूरी मंडल के अनुमोदन के बाद यदि सभी ट्रस्टी भी इसका अनुमोदन करते है तो अध्यक्ष उसका नाम मतदाता सूची में जोड़ेगा। नाम तब तक नहीं जोड़ा जायेगा जब तक कम से कम 100 हिन्दू मतदाताओ का जूरी मंडल स्वीकृति नहीं देता।
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(13.5) यदि किसी व्यक्ति की माता हिन्दू या पिता हिन्दू है और वह स्वयं को हिन्दू घोषित करता है तो वह 18 वर्ष की आयु से मतदाता बन जाएगा।
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(14) दान, आय और कर
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(14.1) NHDMT ट्रस्ट किसी भी व्यक्ति या गैर व्यक्ति इकाई या विदेशी इकाई से दान प्राप्त कर सकता है। NHDMT ट्रस्ट किसी भी व्यवसाय गतिविधि में भी शामिल हो सकता है, जैसे कोई उद्योग, निगम या संस्था आदि।
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(14.2) प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या अन्य सरकारी एजेंसी NHDMT ट्रस्ट पर लागू होने वाले आयकर, संपत्ति कर, वस्तु एवं सेवा कर और सभी अन्य कर वसूल सकते है।
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(15) टिप्पणी : राज्य के मुख्यमंत्री "राज्य हिन्दू देवालय प्रबंधन ट्रस्ट (RHDMT)" कानून ड्राफ्ट को राज्यों में लागू कर सकते है। ऐसे ड्राफ्ट NHDMT के समान हो सकते है। लेकिन राज्यों के RHDMT के सदस्य वे हिन्दू हो सकते है जो अमुक राज्य में 2 साल से अधिक अवधि से निवास कर रहे हो या अमुक राज्य के वे मूल निवासी हो। तो इस तरह किसी हिन्दू के पास विकल्प होगा कि वह किस राज्य के RHDMT का सदस्य होना चाहता है। लेकिन वह दोनो का सदस्य नहीं हो सकेगा। और यदि वह सदस्यता बदलता है तो नयी सदस्यता 6 महीने बाद प्रभावशाली होगी।
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(CV) जनता की आवाज (Citizens’ Voice):
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(CV.1 ) यदि देश के किसी भी क्षेत्र में निवास करने वाला कोई भी नागरिक मतदाता इस विधेयक के किसी अनुच्छेद में बदलाव चाहता हो अथवा वह इस विधेयक से सम्बन्धित कोई शिकायत दर्ज करना चाहता हो तो ऐसा नागरिक मतदाता जिला कलेक्टर के कार्यालय में उपस्थित होकर एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है। जिला कलेक्टर या उसका क्लर्क इस शपथपत्र को 30 रूपए प्रति पृष्ठ का शुल्क लेकर दर्ज करेगा तथा एक सीरियल नंबर जारी करके इस शपथपत्र को स्कैन करके अमुक मतदाता के छाया चित्र एवं अन्य विवरण के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर रखेगा।
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(CV.2 ) किसी पटवारी कार्यालय के कार्यक्षेत्र में निवास करने वाला कोई भी नागरिक मतदाता यदि इस विधेयक अथवा इसके किसी अनुच्छेद पर अपनी आपत्ति दर्ज कराना चाहता हो अथवा ऊपर दिए खण्ड (CV.1 ) के तहत प्रस्तुत किसी भी शपथपत्र पर अपनी हां / नहीं दर्ज कराना चाहता हो, तो वह अपना मतदाता पहचान पत्र लेकर पटवारी कार्यालय में जाएगा और उपलब्ध आवेदन पर शपथपत्र का सीरियल नंबर दर्ज करके अपनी हाँ / नही दर्ज करेगा। पटवारी 3 रूपए का शुल्क लेकर इस हाँ / नहीं को दर्ज करके एक रसीद जारी करेगा । मतदाता द्वारा दर्ज की गयी हाँ / नहीं को प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर मतदाता के नाम, मतदाता पहचान संख्या, दिनांक एवं अन्य विवरणों के साथ रखा जाएगा।
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====== NHDMT ड्राफ्ट का समापन =====