> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2017-10-24

Pawan Jury BhilwaraRj

सितम्बर 2016 के मुकाबले सितम्बर 2017 में बिजली की खपत में सिर्फ 4.6% की वृद्धि हुयी। आप कुछ समझ सकते है कि "विकास" दर किधर जा रही है।
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सितम्बर 2012 के मुकाबले सितम्बर 2013 में बिजली की खपत में 12% की वृद्धि दर्ज की गयी थी !!
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स्त्रोत
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( लिंक में दी गयी तालिका में सिर्फ अचिवमेंट कॉलम को देखें, लक्ष्य के आंकड़ों को नहीं। )

पेज नंबर - 4 देखें <http://www.cea.nic.in/reports/monthly/executivesummary/2017/exe_summary-09.pdf>;
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पेज नंबर - 3 देखें <http://www.cea.nic.in/reports/monthly/executivesummary/2013/exe_summary-09.pdf>;
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तो आखिर हम ऐसी स्थिति में 7% या 6% या यहां तक कि 5% की भी विकास दर कैसे हासिल कर सकते है जबकि बिजली के उपभोग में वृद्धि दर सिर्फ 4.6% है !!! ऐसा सिर्फ तब संभव है जब हम ऐसी महंगी वस्तुओ जैसे सेलफोन्स, एलसीडी या चिप्स आदि का उत्पादन कर रहे हो जिनमे बिजली की खपत कम होती हो। लेकिन हम ऐसी चीजों का उत्पादन नहीं करते। हम दोयम दर्जे की वस्तुओ का उत्पादन करते है , और उनमे विद्युत् का ज्यादा उपभोग होता है। तो क्या बिजली की खपत में सिर्फ 4.6% की वृद्धि के बावजूद क्या हम 7% या 6% या यहां तक कि 5% की भी विकास दर हासिल कर सकते है ?
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मुझे लगता है विकास दर के आंकड़ों के साथ हेराफेरी की गयी है।
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