Pawan Jury BhilwaraRj
दिवाली पर प्रदूषण बढ़ जाता है क्योंकि ज्यादातर लोग खरीददारी करने के लिए वाहन लेकर निकलते है। माल की खपत ज्यादा होने से से ट्रको का परिवहन भी बढ़ता है और और इस वजह से भी प्रदुषण बढ़ जाता है।
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आतिशबाजी से होने वाला प्रदुषण वातावरण में सिर्फ 1 घंटे के लिए ही टिका रह सकता है। अत: मध्यरात्रि तक आतिशबाजी का सारा प्रदुषण गायब हो जाता है।
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दूसरे शब्दों में , प्रदुषण आतिशबाजी के कारण नहीं है। प्रदुषण की असली वजह ट्रेफिक है।
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पिछले साल दिवाली के अगले दिन सुबह 5 बजे दिल्ली और लाहौर में प्रदुषण का स्तर एक समान था !!! क्यों ? क्योंकि दोनों इलाको में किसान फूस जला रहे थे। फूस जलाने से भी भारी प्रदुषण होता है।
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कुल मिलाकर प्रदुषण की सबसे बड़ी वजह ट्रेफिक है , और दूसरा कारण फूस है। मतलब मोदी साहेब के आदेश पर केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन प्रदुषण के लिए आतिशबाजी को जिम्मेदार ठहरा कर नागरिको को भ्रमित कर रहे है। और शर्म की बात है कि संघ=बीजेपी ( गंगाधर = शक्तिमान ) के कार्यकर्ता आतिशबाजी पर बेन का समर्थन कर रहे है।
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