Pawan Jury BhilwaraRj
1) सुप्रीम कोर्ट का कहना है ; जो भी हो , हम दिल्ली में पटाके नहीं बेचने देंगे।
2) रोहिंग्यो को देश से बाहर करने पर सुप्रीम कोर्ट की रोक।
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1) सुप्रीम कोर्ट जज एके सीकरी का कहना है -- कुछ लोग हमारे आदेश को साम्प्रदायिक रंग दे रहे है। लेकिन हम दिल्ली में पटाके नहीं बेचने देंगे !!
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<http://epaper.bhaskar.com/detail/1295846/10141573451/0/map/tabs-1/10-14-2017/158/1/image/>
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क्या सीकरी के पास कोई इंडिकेटर है जिससे उसे यह मालूम हो जाता है कि इस फैसले का विरोध करने वाले लोग "कुछ" है या "ज्यादा" !! मतलब जो मन में आये वो आदेश दो और नागरिको के मत की जैसी मन में आये वैसी व्याख्या करो !! क्या इस जज में इतनी हिम्मत है कि वह दिल्ली में आतिशबाजी बेन पर "जनमत संग्रह" करवाने की अनुमति दे सके ? भूल जाइए !!
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एके सीकरी जब से जज बना है तब से ही यह जनमत संग्रह प्रक्रियाओ का विरोधी है। इसका मानना है कि भारत के आम मतदाताओ को किसी भी विषय पर अपनी सहमती / असहमति दर्ज करवाने का अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए !! और फिर न्यायमूर्ति पूजक हम आम नागरिको से यह उम्मीद भी करते है कि हम उन्हें "माननीय" कह के संबोधित करे !!
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मेरे विचार में यह फासीवाद बयान है , और भारत के मतदाताओ की अवहेलना करके उनका अपमान करता है। इस आदमी की इतना अपमानजनक बयान देने की हैसियत इसीलिए हुयी क्योंकि यह जानता है कि भारत के नागरिको के पास उसे नौकरी से निकालने का अधिकार नहीं है।
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अब दीपावली पर आतिशबाजी के बेन का विरोध करने वाले नागरिको को फैसला करना है कि क्या वे सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश को नौकरी निकालने का अधिकार चाहते है या नहीं। राईट टू रिकॉल सुप्रीम कोर्ट न्यायधीश का क़ानून आने के अगले 24 घंटे में जज आसमान से उतर कर जमीन पर आ जाएंगे और तमीज से पेश आने लगेंगे।
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2)
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सुप्रीम कोर्ट ने रोहिंग्यो को देश से बाहर निकालने की कार्यवाही को अगली सुनवाई तक रोक दिया है।
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<http://indiatoday.intoday.in/story/rohingya-muslims-refugee-crisis-myanmar-india-supreme-court-security-humanitarian-values/1/1067983.html>
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अगली सुनवाई 11 नवम्बर को होगी , और उसकी अगली सुनवायी कब होगी वो पता नहीं। सुप्रीम कोर्ट इस मामले को मर्जी पड़े उतने समय तक घसीट सकती है, और चाहे तो रोहिंग्यो को देश से बाहर खदेड़ने पर रोक भी लगा सकती है !!!
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वजह फिर से वही है - सुप्रीम कोर्ट के जज जानते है कि जनता उनका कुछ भी उखाड़ने में सक्षम नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के पास सेना है , पुलिस है , सरकारी मशीनरी है और अंतिम फैसला देने की शक्ति है। जबकि भारत के आम नागरिको के पास न तो उन्हें चुनने का अधिकार है और न ही उन्हें नौकरी से निकालने का अधिकार है।
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अब रोहिंग्यो को देश से बाहर खदेड़ने की मांग कर रहे नागरिको को यह तय करना है कि वे सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीशो को नौकरी से निकालने का अधिकार चाहते है या नहीं।
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मेरा प्रस्ताव है कि, भारत में मौजूदा सभी जजों को नौकरी से निकाला जाए। कोई अपवाद नहीं। और फिर भारत में जजों के चुनाव हो। बर्खास्त किये गए जज इन चुनावों में अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत कर सकेंगे। जिन्हें जनता चुने उसकी नौकरी रहेगी, शेष की जाएगी। और जनता के पास यह भी अधिकार होगा कि भ्रष्ट आचरण करने पर नागरिक अपना बहुमत सिद्ध करके इन्हें नौकरी से निकाल सके। इस तरह जो न्यायधीश आयेंगे वे जनता के प्रति जवाबदेह होंगे और प्रजा हितो के लिए काम करेंगे।
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इसके साथ ही भारत में ज्यूरी सिस्टम लागू किया जाए। ज्यूरी सिस्टम आने से क़ानून एवं संविधान की व्याख्या करने का अधिकार आम नागरिको के पास आ जायेगा और वे बहुमत से किसी भी मामले में फैसला कर सकेंगे। ज्यूरी सिस्टम आने से जजों की भूमिका एवं उनकी असीमित शक्तियाँ बेहद कम हो जायेगी।
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