> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2017-10-11

Pawan Jury BhilwaraRj

1) दीपावली की आतिशबाजी पर प्रतिबंध का मोदी साहेब और कोर्ट ने मिली भगत से लिया है !!
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2) मोदी साहेब ने रमन सिंह को आदेश दिए है कि वे छत्तीसगढ़ में रात 10 बजे से आतिशबाजी को प्रतिबंधित करें और तेज धमाकों वाले पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाएं !!
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3) महाराष्ट्र हाई कोर्ट ने आवासीय इलाको मे पटाखे बेचने वालों के लाइसेंस केंसिल कर दिए है , और अनुज्ञाधारी इलाको में पटाखे बेचने की उनकी सीमा को आधा कर दिया है !!
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4) दीवाली का आतिशबाजी से क्या सम्बन्ध है , और कैसे आतिशबाजी विहीन दिवाली हिन्दू धर्म का क्षरण कर देगी ?
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1)
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प्रदूषण बोर्ड केंद्र सरकार यानी मोदी साहेब उर्फ़ कल्कि पुरुष तृतीय के नियंत्रण में काम करता है। और इसी बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में जाकर यह मांग की थी कि दिवाली के दौरान आतिशबाजी पर प्रतिबन्ध लगाया जाए !!!
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दूसरे शब्दों में, मोदी साहेब खुद यह चाहते थे कि दिवाली पर आतिशबाजी प्रतिबंधित की जाए !! और इसीलिए मोदी साहेब ने सुप्रीम कोर्ट के इस एंटी-हिन्दू फैसले को संसद में रद्द करने से मना कर दिया !!!
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यह भी साफ़ है कि संघ के सभी कार्यकर्ता मोदी साहेब और सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का समर्थन कर रहे है।
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2)
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छत्तीसग़ढ में कोर्ट ने आतिशबाजी पर प्रतिबन्ध लगाने के कोई आदेश जारी नहीं किये है। किन्तु संघ के नेता और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने उच्च डेसीबल वाले पटाखों को पूर्णरूप से प्रतिबंधित कर दिया है , और रात 10 बजे बाद किसी भी प्रकार की आतिशबाजी पर बेन लगा दिया है। साथ ही उन्होंने यह भी आदेश जारी किये है कि राज्य भर में आतिशबाजी न करने का सरकारी अभियान चलाया जाए और इस अभियान में विशेष रूप से स्कूली बच्चो को शामिल किया जाए। यदि आप देख पा रहे तो देख सकते है कि आने वाली पीढ़ी दिवाली पर आतिशबाजी नहीं करने वाली है। वे उन्हें अभी से संक्रमित कर दे रहे है !!

लिंक - <http://economictimes.indiatimes.com/news/politics-and-nation/chhattisgarh-govt-bans-use-of-firecrackers-with-high-decibels/articleshow/61021553.cms>;
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3)
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महाराष्ट्र हाई कोर्ट के आदेश से अब आवासीय इलाको में आतशबाजी नहीं बेची जायेगी। जिन्हे लाइसेंस दिए गए थे उनके लाइसेंस रद्द कर दिए है और अनुज्ञाधारी धारी विक्रेताओं की सीमा को भी घटा कर आधा कर दिया है। इन दोनों हरकतों से आतिशबाजी में काफी गिरावट आएगी।

लिंक - <http://www.timesnownews.com/india/video/mumbai-maharashtra-bombay-high-court-firecrackers-diwali-delhi-national-capital-region/104483>;
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ये लोग अगले 10 सालों में दीपावली से आतिशबाजी को गायब कर देंगे। यह तय है। कुछ काम क़ानून करेगा और बचा हुआ काम हमारे पेड बुद्धिजीवियों के उपदेश कर देंगे। और यह सिलसिला रुकने वाला नहीं है। ऐसे सभी उत्सव कतार में है जिनमे धार्मिक जमाव होता है।
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4)
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दरअसल इस पूरी कवायद में एक पैटर्न है, जिसकी ज्यादातर लोग अनदेखी कर रहे है। एक एक करके लगातार ऐसे कदम उठाये जा रहे है, जिससे हिन्दू धर्म के "धार्मिक जमाव" में कमी आये। शायद आपको यह अजीब लगे, किन्तु यह सच है कि दीपावली को लक्ष्मी पूजन , होली को होलिका दहन एवं जन्माष्टमी को भोग लगाने मात्र से टिका कर नहीं रखा जा सकता !! यदि आतिशबाजी, रंग गुलाल एवं दही हांडी आदि जैसे मनोरंजन के तत्वो को गायब कर दिया गया तो इन उत्सवों में नागरिको का उत्साह कम होता चला जायेगा और ये उत्सव सांकेतिक स्तर पर ही रह जाएंगे !!! ऐसा होने से "धार्मिक जमाव" में कमी आ जाएगी। और शान्ति काल में किसी भी धर्म को टिकाये रखने के लिए धार्मिक जमाव एवं परोपकार की निर्णायक भूमिका होती है। युद्धकाल में यह फैसला हथियार करते है।
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हिन्दू धर्म का प्रशासन पहले से ही बिगड़ा हुआ है और यह और भी बदतर होता जा रहा है। ऐसी स्थिति में सिर्फ धार्मिक जमाव ही है जो हिंदू धर्म को आक्सीजन दे रहा है। यदि धार्मिक जमाव में कमी आयी तो हिन्दू धर्म का बचा खुचा आधार भी उखड़ जाएगा और मिशनरीज तेजी से हिन्दू धर्म के अनुयायियों को टेक ओवर कर लेगी।
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अध्यात्म ऊँचा भाव है। किन्तु उत्सवों में आमोद प्रमोद एवं मनोरंजन का तत्व होने से ज्यादातर नागरिक एवं विशेष तौर पर बच्चे / युवा आदि धार्मिक आयोजनों में भाग लेते है। कालांतर में यह आमोद प्रमोद उन्हें अध्यात्म से जोड़ लेता है और वे धार्मिक बने रहते है। उदाहरण के लिए दीपावली का मुख्य "आकर्षण" लक्ष्मी पूजन नहीं है। बल्कि यह आतिशबाजी, नए कपडे एवं मिठाई है। बच्चे मंदिर में प्रसाद लेने जाते है, मूर्ती के दर्शन करने नहीं। लेकिन प्रसाद के निमित्त जाने से ही उनमे धर्म के प्रति जुड़ाव आता है। यदि आप दीपावली को सिर्फ लक्ष्मी पूजन से जोड़ देंगे तो 80% युवाओ एवं बच्चो की रुचि इसमें से खत्म हो जायेगी और आने वाले समय में वे दिवाली मनाना छोड़ देंगे। और यदि मनाएंगे भी तो सांकेतिक रूप से।
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दही हांड़ी प्रतियोगिता, रंग खेलना, महाशिवरात्रि, गणपति स्थापना , दुर्गा पूजा, कुम्भ आदि धार्मिक आयोजनों में जमाव इसीलिए देखने को मिलता है क्योंकि इनमें मनोरंजन का तत्व प्रधान है। रक्षाबंधन एवं राम नवमी में यह तत्व नहीं है इसीलिए इन उत्सवों में जमाव देखने को नहीं मिलता।
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कैसे "धार्मिक जमाव" किसी धर्म को टिकाये रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है, इस विषय पर मैं जल्दी ही विस्तृत विवरण रखूँगा।
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कृपया प्रधानमंत्री को ट्वीट करें कि सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर केंसिल किया जाए। @PmoIndia पर यह ट्वीट भेजें :

@PmoIndia #CancelScjOrderToBanCrackers SCjs' judgment to ban firecracckers is wrong. Ask Loksabha to print money bill law law to cancel it "
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विशेष टिप्पणी - संघ के सभी कार्यकर्ताओ ने सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर केंसिल करने के लिए पीएम को ट्वीट भेजने से साफ़ मना कर दिया है, और वे अंदरखाने नागरिको को ट्वीट करने से मना कर रहे है। सबूत के लिए आप उनकी वॉल देख सकते है। वहां आपको ऐसा कोई ट्वीट नहीं मिलेगा। वे पूरे देश में दीवाली पर आतिशबाजी को बेन किये जाने का समर्थन कर रहे है, और इसे प्रदुषण से जोड़ दे रहे है !!
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"वेल्थ टेक्स ग्रुप"
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