> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2017-10-09

Pawan Jury BhilwaraRj

एंटी-हिन्दू फैसला -- "पर्यावरण का बहाना" बनाकर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में आतिशबाजी बेचने पर बेन लगाया है, और मोदी साहेब ने संसद में इस फैसले को रद्द करने का प्रस्ताव रखने से इनकार कर दिया है !!
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फैसले के अनुसार, पटाखे चलाने पर कोई प्रतिबन्ध नहीं है। सिर्फ बेचने पर है। इससे कई लोग ब्लेक में इसे खरीदेंगे और बेचेंगे। कई लोग पटाखे हरियाणा से लेकर आयेंगे और इस परिवहन के कारण दुर्घटनाओं की दर में इजाफा हो जाएगा।
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इस विषय में दो पहलू है -- १) दिल्ली , २) शेष भारत
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दिल्ली में पहले से ही प्रदुषण है, लेकिन इसकी वजह आतिशबाजी नहीं है। यदि सरकार तकनिकी अध्ययन कराए तो यह बात निकलकर सामने आ जायेगी। दरअसल दिल्ली में प्रत्येक आदमी एक रोकेट पर सवार है और उनके साइलेंसर हर समय धुंवा उगलते रहते है। वाहन निर्माता एवं तेल कंपनियों ने सरकारों को घूस देकर वाहन लेना बहुत सुलभ कर दिया हैं , जिससे बैंको और वाहन निर्माता कंपनियों ने पूरे सड़को को "गैर जरुरी निजी वाहनों" से पाट दिया है। इसकी वजह से ट्रेफिक जाम और भी ज्यादा है, और इस वजह से गाड़ियाँ और भी ज्यादा धुंवा उगलती है। ये दिन पर चलने वाले करोड़ो फटाके है जो दिल्ली को प्रदूषित कर रहे है।
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तेल और वाहन निर्माता कम्पनिया सरकारों को सार्वजनिक परिवहन प्रणाली और फुटपाथ तोड़ने का भी पैसा खिलाती है। इस तरह नागरिक निजी वाहन लेने के लिए बाध्य होते है और इससे प्रदुषण बढ़ जाता है। प्रदुषण का हवाला देकर आतिशबाजी बेन का समर्थन करने वाले एक भी आदमी को आप सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में सुधार की चिंता करते नहीं देखेंगे। उनके हिसाब से उन्हें इससे कोई सरोकार नहीं। इन्हें सिर्फ आतिशबाजी से ही दर्द होता है। और ख़ास तौर पर जब यह आतिशबाजी किसी हिन्दू उत्सव से जुडी हुयी हो !!! वे जल प्रदुषण की भी फ़िक्र करेंगे लेकिन उनकी फ़िक्र में वे औद्योगिक इकाइयां कभी शामिल नहीं होती जो जहरीला पानी नदियों में बहा रहे है !! लेकिन गणपति या माताजी की मूर्तियों के विसर्जन से उन्हें अपच की शिकायत हो जाती है !!!
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वे होली पर जल विहीन होली की वकालत करेंगे लेकिन यदि आप उनसे पूछेंगे कि आखिर आप भारत में "युनिवर्सल मीटरिंग क़ानून" का समर्थन क्यों नहीं कर रहे, तो उनका मुहं घोड़े जैसा लटक जाता है। वे जब अपनी रौ में आयेंगे तो आपको यह भी समझाने से गुरेज नहीं करेंगे कि, अंतिम संस्कार से प्रदुषण फैलता है !! हाँ आपने सही पढ़ा है। एनजीटी इसकी सिफारिश कर चुका है कि हिन्दू धर्म में अंतिम संस्कार की प्रथा से लकड़ी की हानि हो रही है और प्रदुषण फ़ैल रहा है !! यहाँ तक की इन्हें गरबा भी साइलेंट चाहिए। सूची लम्बी है। दरअसल सारी कसरत "धार्मिक जमाव" को तोड़ने की है। धार्मिक जमाव में क्षरण आने से कैसे किसी धर्म के पैर उखड़ जाते है, इस विषय पर मैं अलग से विवरण लिखूंगा।
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ध्यान देने योग्य बात यह है कि -- दिल्ली प्रारम्भ है। पर्यावरण के नाम पर यह फार्मूला पूरे देश में थोपा जा रहा है। आज दिल्ली की बारी है। कल आपका और मेरा शहर होगा। मैं आपको नजीर देता हूँ। उदयपुर जैसे हरे भरे शहर में अभी दशहरे पर नगर निगम ने "धूम्र विहीन" रावण का दहन कर दिया !! उनके अनुसार रावण दहन से धूम्र प्रदुषण होता है !!! और सभी शहरो में पेड मीडिया की खुराक पर पलने वाले आपको ऐसे कई बुद्धिजीवी मिलेंगे जो इस बकवास का समर्थन ही नहीं करते बल्कि इसे प्रोत्साहित भी करते है !!
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१) दिल्ली में सरकार ऐसा तकनिकी अध्ययन करवाए जिससे यह मालूम हो कि आतिशबाजी से प्रदुषण की मात्रा बढ़ने और इसके टिके रहने की प्रभावी दर क्या है, तथा यह वाहनों द्वारा फैलाए जा रहे प्रदुषण की तुलना में कितना एवं किस अवधि तक असर रखता है।
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२) उपभोक्ता के लिए आतिशबाजी खरीद की एक न्यूनतम सीमा तय की जाये , और यदि कोई व्यक्ति इस सीमा से अधिक आतिशबाजी खरीदता है तो उस पर बढ़ी हुयी दर से टेक्स वसूला जाए। इससे आतिशबाजी बनी रहेगी किन्तु सीमा से अधिक आतिशबाजी करने वाले हतोत्साहित होंगे।
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३) आतिशबाजी में विस्फोट के लिए जिन तत्वों का इस्तेमाल होता है उनमें से ज्यादातर तत्व ठोस होते है और कुछ ही घंटो में जमीन पर आ जाते है। जो रसायन हवा में लम्बे समय तक बने रहते है उनमें शामिल विषेले रसायनों को चिन्हित करके उनका प्रयोग आतिशबाजी में करने पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।
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४) दिल्ली का ढांचा हर तरीके से बदतर हुआ जा रहा है और इसमें सुधार लाने के लिए दिल्ली में जनमत संग्रह प्रक्रिया के टीसीपी क़ानून की बेहद जरूरत है। इससे दिल्ली वासी खुद से ही यह तय कर सकेंगे कि उन्हें दिवाली पर आतिशबाजी चाहिए या नहीं चाहिए। और यदि चाहिए तो किस सीमा तक और किन विनियमों के तहत चाहिए।
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( जागरूक वर्ग के विशिष्ट बुद्धिजीवियों का लक्षण है कि वे दिल्ली वासियों को ऐसा कोई भी अधिकार देने की पैरवी कभी नहीं करेंगे, जिससे वे खुद अपने शहर के नियम तय कर सके। हिप्पोक्रेसी एट हिज बेस्ट !! )
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पीएम को ट्विट करें कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटा जाए। @pmoindia पर यह ट्विट भेजे :
"@PmoIndia #CancelScjOrdertToBanCrackers SCjs' judgment to ban firecracckers is wrong. Pls ask Parliament to print law to cancel it."
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मेरे द्वारा भेजा गया ट्वीट - <https://twitter.com/PawanJury/status/917367566506409984>;
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"वेल्थ टेक्स ग्रुप"
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