भारत में शासन एवं नागरिकों के बीच संवाद करने की अधिकृत एवं पारदर्शी प्रक्रिया न होने के कारण नागरिक अपनी मांग, सुझाव आदि पीएम या सीएम तक नहीं पहुंचा पाते, और विभिन्न अनाधिकृत एवं बेतरतीब तरीको का सहारा लेने के लिए बाध्य होते है। इस कानून के आने के बाद ज्यादातर नागरिकों को किसी फैसले का समर्थन एवं विरोध करने के लिए या अपनी मांग रखने के लिए सड़कों पर आकर मजमा लगाने की जरूरत नहीं रह जायेगी। टीसीपी आने के बाद नागरिक अधिकृत रूप से अपनी मांग सरकार एवं जनता के सामने रख सकेंगे, और मतदाता किसी भी मांग पर अपनी सहमती या असहमती दर्ज कर सकेंगे ।

यह कानून कैसे काम करेगा मान लीजिए प्रधानमंत्री नागरिकों के दबाव में आकर टीसीपी कानून पर हस्ताक्षर कर देते हैं । उसके बाद यदि आपको, मुझे या किसी और को कोई भी कानून लागू करवाना है, तो वह व्यक्ति कलेक्टर के कार्यालय में जाएगा और अपने प्रस्तावित कानून के ड्राफ्ट को प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर अपलोड कराएगा और फिर उसे कानून के बारे में लोगों को जानकारियां देगा। यह कानून अखबार में प्रचारित की जा सकती है और यदि यह कानून लोगों के हित में है तो लोग इस कानून पर समर्थन देंगे और अन्य लोगों से समर्थन देने के लिए कहेंगे।

उदाहरण 1 मान लीजिए मुझे सरकारी जमीन किराया बंटवारा कानून लागू करवाना है । इसके लागू होने पर प्रति व्यक्ति प्रतिमाह लगभग ₹400 मिलेंगे । इस कानून को मैं कलेक्टर कार्यालय द्वारा प्रधानमंत्री के वेबसाइट पर अपलोड करवा दूंगा और अपने जान पहचान के 500-1000 लोगों को इस कानून की जानकारियां दूंगा । अधिकतर लोग चाहेंगे कि उन्हें यह लगभग ₹400 मिले तो वह इस कानून का समर्थन करेंगे और अन्य लोगों से भी इस कानून का समर्थन करने के लिए कहेंगे तो कुछ समय के अंदर इस कानून की मांग बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी और ना ही कोई बुद्धिजीवी, मीडिया, सरकार इस कानून को अनदेखा कर पाएंगे तो प्रधानमंत्री पर इस को कानून छापने के लिए दबाव बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा और उन्हें यह कानून छपना पड़ेगा।

ऐसे ही हमारे पास लगभग 200 कानून है

  1. right to recall over chief minister
  2. right to recover prime minister
  3. right to recall over supreme court judge
  4. right to recall over High court judge
  5. right to recall over district education officer
  6. jury court Kanoon
  7. laaj 2 minimize cow slaughter etc इस कानून के लागू होने के बाद मैं या कोई और व्यक्ति इन सभी कानूनो को प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर डलवाएंगे। इन कानून के लागू होने के लगभग 1 साल के अंदर भारत की सेना अन्य शक्तिशाली देश के समकक्ष हो जाएगी और मेरा अनुमान है की सिर्फ कुछ साल के अंदर चीन और अमेरिका की सेना से मजबूत हो जाएगी ।

मैं सभी भारतीय नागरिकों से अनरोध करता हूं कि वे प्रधानमंत्री पर निम्नलिखित अधिसूचना पर हस्ताक्षर करने का दबाव डालें:

अधिसूचना का ड्राफ्ट इस प्रकार है

टीसीपी: पारदर्शी शिकायत प्रणाली

(TCP: Transparent Complaint Procedure)

टिप्पणी: यह कानून भारत के राजपत्र में छापकर प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री द्वारा सीधे लागू किया जा सकता है। इसके लिए लोकसभा, राज्यसभा या विधानसभा से अनुमति की आवश्यकता नहीं है।
#TcpIndiaRrp #RRP18


खंड 1: नागरिकों एवं अधिकारियों के लिए निर्देश

01

यह कानून आपको (यहाँ 'आप' से आशय है—भारत का मतदाता) यह अधिकार देता है कि वे अपने जिला कलेक्टर कार्यालय में उपस्थित होकर कोई भी शपथपत्र जमा करवा सकें।

  1. यह शपथपत्र आपकी कोई शिकायत, सुझाव, RTI आवेदन, ताजातरीन कानून, या अन्य कोई याचना हो सकती है।
  2. शपथपत्र जमा करते समय आपको प्रति पृष्ठ ₹20 शुल्क अदा करना होगा।
  3. कलेक्टर कार्यालय एक विशेष सीरियल नंबर जारी करेगा।
  4. शपथपत्र को स्कैन कर प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा ताकि कोई भी नागरिक बिना लॉगिन के इसे देख सके।

02

कोई भी मतदाता किसी भी दिन पटवारी कार्यालय जाकर शपथपत्र नंबर का उल्लेख करते हुए उस पर अपनी हाँ / ना दर्ज कर सकता है।

  1. मतदाता द्वारा दर्ज हाँ/ना को नाम और मतदाता संख्या सहित सार्वजनिक रूप से वेबसाइट पर दिखाया जाएगा।
  2. हाँ/ना दर्ज करने या बदलने के लिए शुल्क लिया जाएगा – BPL कार्डधारकों के लिए ₹1 और अन्य नागरिकों के लिए ₹3।
  3. मतदाता किसी शपथपत्र पर हाँ/ना को किसी भी दिन कितनी भी बार बदल सकता है।

03

महत्वपूर्ण जानकारी:
किसी शपथपत्र पर दर्ज की गई हाँ / ना की गिनती प्रधानमंत्री, किसी मंत्री, अधिकारी या अदालत पर बाध्यकारी नहीं होगी।

04

धारा 1 में शपथपत्र देने के लिए कलेक्टर आपसे मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड लाने को कह सकता है, साथ ही आपकी फोटो और फिंगरप्रिंट भी ले सकता है।

  1. एक बार शपथपत्र फ़ाइल करने के बाद उसे हटाया नहीं जा सकता, सिवाय अदालत के आदेश के।
  2. यदि शपथपत्र में अनुचित या मानहानिकारक जानकारी होती है, तो अदालत में वाद दायर किया जा सकता है और दोष सिद्ध होने पर सजा हो सकती है।

05

आपको भारत भर में दर्ज सभी शपथपत्रों पर हाँ / ना दर्ज करने की आवश्यकता नहीं है।

06

आप अपना मोबाइल नंबर मतदाता सूची का रखरखाव करने वाले कर्मचारी को दर्ज करवा सकते हैं।

07

आपको वोटर कार्ड जैसा एक मैग्नेटिक कार्ड (ATM कार्ड जैसा) दिया जा सकता है।

08

कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते हैं जिससे आप SMS या मोबाइल ऐप के माध्यम से हाँ / ना दर्ज कर सकें।


खंड 2: अधिकारियों के लिए निर्देश

09

नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) के सचिव को आदेश जारी किए जाते हैं कि वे आवश्यक वेबसाइट एवं तकनीकी संरचना विकसित करें ताकि कलेक्टर उपरोक्त धाराओं को लागू कर सकें।

10

मुख्यमंत्री, मेयर, जिला / तहसील / ग्राम सरपंच इस कानून में आवश्यक परिवर्तन करके इसे अपने राज्य, नगर, जिले, तहसील या ग्राम स्तर पर लागू कर सकते हैं।

टीसीपी कानून किस तरह से काम करेगा?

मूल समस्या:

भारत में शासन एवं नागरिकों के बीच संवाद की अधिकृत और पारदर्शी व्यवस्था नहीं होने के कारण
नागरिक अपनी मांगें, सुझाव आदि पीएम या सीएम तक नहीं पहुँचा पाते।
उन्हें बेतरतीब, अनाधिकारिक तरीकों का सहारा लेना पड़ता है।

TCP आने के बाद:

(1) ज्ञापन से TCP अलग क्यों?

(2) सोशल मीडिया काफी क्यों नहीं?

(3) पेड मीडिया व पार्टियाँ TCP के विरोध में क्यों?


इस कानून को गज़ेट में प्रकाशित करवाने के लिए क्या करें?

1.

नाम-पता लिखें, 4 रुपये का डाक टिकट चिपकाएं,
और 5 तारीख को शाम 5 बजे लेटर बॉक्स में डालें।


2.

"प्रधानमंत्री जी से मेरी मांग" नाम से रजिस्टर बनाएं,
जिसमें पत्र की कॉपी चिपकाएं और संग्रहित रखें।


3.

फेसबुक पर "प्रधानमंत्री जी से मेरी मांग" नाम से एल्बम बनाएं और
रजिस्टर में चिपकाए गए पेज वहाँ अपलोड करें।
प्रधानमंत्री को पोस्टकार्ड या ट्वीट करें:

"प्रधानमंत्री जी, टीसीपी कानून गज़ेट में छापें – #TcpIndiaRrp"


4.

5 तारीख को शाम 5 बजे भेजना क्यों ज़रूरी?


5.

हर माह के दूसरे रविवार को शाम 4 बजे
सार्वजनिक स्थानों पर बैठक कर सकते हैं — जैसे मंदिर, स्टेशन परिसर।


6.

यह अहिंसात्मक जन आंदोलन महात्मा उधम सिंह से प्रेरित है।


✍️ Author’s Note

Anyone can freely print, distribute & circulate this doc without modification.
Modification is not permissible.
— Rahul Chimanbhai Mehta & Pawan Kumar Sharma